जनजातीय समुदाय की समृद्धि की दिशा में बड़ा कदम: डीएसटी पोषित कृषि परियोजना का उद्घाटन

जनजातीय समुदाय की समृद्धि की दिशा में बड़ा कदम: डीएसटी पोषित कृषि परियोजना का उद्घाटन

19 मार्च, 2026, प्लाण्डु

भाकृअनुप के पूर्वी अनुसंधान परिसर, कृषि प्रणाली का पहाड़ी एवं पठारी अनुसंधान केन्द्र, प्लाण्डु में आज डी.एस.टी., भारत सरकार के अंतर्गत “झारखंड के खूंटी जिले के कर्रा ब्लॉक में आवश्यकता-आधारित कृषि तकनीकों के माध्यम से जनजातीय समुदाय की आजीविका, पोषण एवं आय के स्तर को बढ़ाना” शीर्षक से जुड़े परियोजना का उद्घाटन एवं ओरिएन्टेशन कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य जनजातीय कृषक समुदाय के बीच जागरूकता पैदा करना, विभिन्न तकनीकों का प्रसार करना तथा आजीविका के अवसरों को सुदृढ़ बनाना था।

    

इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. मेजर सिंह, पूर्व सदस्य, कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल, नई दिल्ली, मौजूद थे। कार्यक्रम में अतिथि गण के रूप में श्री प्रदीप हजारी, पूर्व-विशेष सचिव-सह-सलाहकार, कृषि,पशुपालन एवं सहकारिता विभाग, झारखण्ड सरकार; केन्द्र के पूर्व प्रधानगण, डॉ. शिवेन्द्र कुमार, सदस्य, अनुसंधान परामर्श समिति; डॉ. अरुण कुमार सिंह, डीन, बागवानी महाविद्यालय, खूँटपानी, बी.ए.यू. एवं डॉ. एस.पी. सिंह, प्रधान, क्षेत्रीय केन्द्र, केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, पटना, सम्मिलित हुए। इस अवसर पर एक कृषि प्रदर्शनी का उद्घाटन भी अतिथिगण द्वारा किया गया।

मुख्य अतिथि, डॉ. मेजर सिंह ने अपने सम्बोधन में सह्याद्रि फार्म, महाराष्ट्र की सफलता का उदाहरण देते हुए किसान उत्पादक संगठन (एफ.पी.ओ.) के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एफ.पी.ओ. के माध्यम से खरीद-बिक्री में मोल-भाव का बेहतर अवसर मिलता है जिससे किसानों की आय में वृद्धि होती है।

   

समारोह के उद्घाटन सत्र में, डा. वीरेंद्र कुमार यादव, प्रधान अन्वेषक, परियोजना एवं प्रमुख वैज्ञानिक, ने इस परियोजना के अंतर्गत प्रस्तावित कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया। डॉ. अवनि कुमार सिंह, प्रधान द्वारा सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए किसानों एवं अन्य हितधारकों के लिए रांची केन्द्र द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी प्रदान की गई।

इस अवसर पर उपस्थित अन्य अतिथियों ने भी अपने विचार रखे। इस सत्र में किसानों के लाभार्थ प्रकाशित संस्थान के 2 उपयोगी प्रकाशनों का विमोचन किया गया।

आयोजन में ओरमाँझी के प्रगतिशील किसान बैजनाथ महतो ने बताया कि उन्नत तकनीकों से 35 एकड़ में तीन फसली खेती कर वे लगभग एक करोड़ वार्षिक आय अर्जित कर रहे हैं तथा अन्य किसानों को भी प्रशिक्षण दे रहे हैं।

नामकुम के सपारोम के स्वयं सहायता समूह को ऑइल मिल, सहेरा के स्वयं सहायता समूह को मिनी राइस मिल तथा नामकुम ब्लॉक 4S4R एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड को कंप्यूटर एवं फर्निचर तथा किसानों को उन्नत किस्मों की सब्जियों के बीज तथा मशरूम स्पॉन इस सत्र में प्रदान किया गया।

   

कार्यक्रम में ‘अधिक कीमत वाली सब्जियाँ आधारित समेकित कृषि प्रणाली’, ‘आलू उत्पादन की उन्नत तकनीक’ तथा ‘वैज्ञानिक तरीके से मवेशी पालन एवं कम्युनिटी एनिमल शेल्टर’ विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किया गया।

परियोजना में चयनित गांवों के लगभग 200 लाभार्थी किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन केन्द्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रीना कुमारी कमल द्वारा किया गया।

(स्रोतः भाकृअनुप के पूर्वी अनुसंधान परिसर, कृषि प्रणाली का पहाड़ी एवं पठारी अनुसंधान केन्द्र, प्लाण्डु)

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