21 मार्च, 2026, भुवनेश्वर
प्रो. कन्हैया त्रिपाठी, विशेष मॉनिटर (मानवाधिकार वकालत—मानवाधिकार शिक्षा एवं लैंगिक समानता), राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएपआरसी), भारत ने भाकृअनुप–महिला कृषि केंद्रीय संस्थान (भाकृअनुप–सीआईडब्ल्यूए), भुवनेश्वर, का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण तथा कृषि विकास में मानवाधिकार दृष्टिकोण के समावेशन में संस्थान के योगदान की समीक्षा की।
गरिमामय अतिथि का स्वागत करते हुए, डॉ. मृदुला देवी, निदेशक, भाकृअनुप–सीआईडब्ल्यूए, ने कृषि-खाद्य प्रणालियों में लैंगिक-संवेदनशील अनुसंधान को बढ़ावा देने और महिलाओं को सशक्त बनाने में संस्थान की प्रमुख पहलों तथा उपलब्धियों को रेखांकित किया। यह दौरा अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 के अवसर पर हुआ साथ ही इस प्रकार का यह पहला अवसर था जब एनएचआरसी के किसी विशेष मॉनिटर ने संस्थान का दौरा किया। यह कृषि अनुसंधान में मानवाधिकार ढांचे को समाहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रगतिशील कदम है। डॉ. मृदुला देवी ने बताया कि इस प्रकार की पहलें लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के साथ-साथ समावेशी एवं सतत कृषि विकास के प्रयासों को सुदृढ़ करेंगी।

वैज्ञानिकों और कर्मचारियों के साथ संवाद के दौरान, प्रो. त्रिपाठी ने कृषि में महिलाओं की भूमिका को सशक्त बनाने और अनुसंधान एवं विस्तार प्रणालियों में लैंगिक मुख्यधारा को बढ़ावा देकर आजीविका के अवसरों को बढ़ाने में भाकृअनुप–सीआईडब्ल्यूए के अग्रणी प्रयासों की सराहना की। उन्होंने मानवाधिकार आयामों को शामिल करते हुए सहयोगात्मक अनुसंधान पहलों की आवश्यकता पर जोर दिया और कृषि में महिला सशक्तिकरण पर उच्च प्रभाव वाले शोध प्रकाशनों को प्रोत्साहित करने की बात कही। उन्होंने संस्थान की उपलब्धियों को वैश्विक मंचों पर प्रस्तुत करने के महत्व को भी रेखांकित किया, ताकि उन्हें व्यापक पहचान को बढ़ाया जा सके।
संस्थागत प्रयासों को वैश्विक मानवाधिकार ढांचों के अनुरूप बनाने के महत्व को रेखांकित करते हुए, प्रो. त्रिपाठी ने संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ रणनीतिक सहयोग का सुझाव दिया, जिससे पहुंच और प्रभाव को बढ़ाया जा सके। उन्होंने भाकृअनुप–सीआईडब्ल्यूए में एक समर्पित ‘मानवाधिकार प्रकोष्ठ’ स्थापित करने का भी प्रस्ताव रखा, ताकि अनुसंधान, क्षमता निर्माण एवं नीतिगत वकालत में मानवाधिकार दृष्टिकोण को संस्थागत रूप दिया जा सके। साथ ही, उन्होंने “कृषि में महिलाओं के मानवाधिकार” विषय पर एक व्यापक प्रकाशन तैयार करने की भी सिफारिश की।

अपने संबोधन में प्रो. त्रिपाठी ने पुनः दोहराया कि कृषि क्षेत्र में महिलाएं प्रमुख हितधारक हैं और उनके मौलिक अधिकारों को सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने ऐसे अनुसंधान को सुदृढ़ करने का आह्वान किया जो इन आयामों को प्रतिबिंबित करता हो।
यह दौरा कृषि अनुसंधान में मानवाधिकार-आधारित दृष्टिकोण को सशक्त करने एवं कृषि-खाद्य प्रणाली में महिला किसानों के सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता के साथ संपन्न हुआ।
(स्रोत: भाकृअनुप–महिला कृषि केन्द्रीय संस्थान, भुवनेश्वर, ओडिशा)







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