डॉ. यशपाल सिंह मलिक, उप-महानिदेशक (कृषि शिक्षा), भाकृअनुप ने भाकृअनुप-एनबीएआईआर, बेंगलुरु का किया दौरा

डॉ. यशपाल सिंह मलिक, उप-महानिदेशक (कृषि शिक्षा), भाकृअनुप ने भाकृअनुप-एनबीएआईआर, बेंगलुरु का किया दौरा

24 सितंबर, 2026, बेंगलुरु

भाकृअनुप के उप-महानिदेशक (कृषि शिक्षा) डॉ. यशपाल सिंह मलिक ने आज भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि कीट संसाधन ब्यूरो, बेंगलुरु का दौरा किया। संस्थान के वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और छात्रों की उपस्थिति में प्रभारी निदेशक डॉ. सुनील जोशी, प्रभागाध्यक्ष, जर्मप्लाज्म संरक्षण एवं उपयोग प्रभाग, डॉ. के. सुबहरन और एसएओ, भाकृअनुप-एनबीएआईआर, श्री मैथ्यू ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।

 

Dr Yashpal Singh Malik, DDG (Agricultural Education), ICAR, Visits ICAR- NBAIR, Bengaluru

अपने दौरे के दौरान, डॉ. मलिक ने भाकृअनुप-एनबीएआईआर की प्रमुख सुविधाओं का दौरा किया, जिनमें राष्ट्रीय कीट संग्रहालय (एनआईएम), जीवित कीट भंडार इकाई (एलआईआरयू), कीट जैव सुरक्षा प्रयोगशाला (आईबीएसएल-2) और भाकृअनुप राष्ट्रीय फेलो प्रयोगशाला शामिल हैं। उन्होंने ब्यूरो के वैज्ञानिकों और कर्मचारियों द्वारा किए जा रहे महत्वपूर्ण अनुसंधान कार्यों और योगदान की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से सुव्यवस्थित और अच्छी तरह से रखे गए कीट संग्रहालय, कीट पालन सुविधाओं, जीनोम-एडिटिंग सुविधाओं और अनुसंधान प्रयोगशालाओं की सराहना की।

Dr Yashpal Singh Malik, DDG (Agricultural Education), ICAR, Visits ICAR- NBAIR, Bengaluru

संस्थान की सुविधाओं और प्रयोगशालाओं के दौरे के बाद, डॉ. मलिक ने सम्मेलन कक्ष में कर्मचारियों को संबोधित किया। उन्होंने संस्थान के प्रयासों की सराहना की और वैज्ञानिक अनुसंधान तथा नवाचारों को किसानों के लिए व्यावहारिक समाधानों में बदलने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने वैज्ञानिकों को ब्यूरो में किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्यों का प्रभावी ढंग से प्रसार करने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि कृषक समुदाय के बीच इसकी पहचान, पहुंच और प्रभाव को बढ़ाया जा सके।

Dr Yashpal Singh Malik, DDG (Agricultural Education), ICAR, Visits ICAR- NBAIR, Bengaluru

डॉ. मलिक ने छात्रों के साथ भी बातचीत की और उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान के माध्यम से उत्कृष्टता हासिल करने तथा परिश्रमपूर्वक कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया। कर्मचारियों और छात्रों के साथ उनकी बातचीत अत्यंत प्रेरणादायक और उत्साहवर्धक रही, जिससे उन्हें अपने अनुसंधान के प्रभाव को और मजबूत करने तथा विज्ञान और कृषक समुदाय की आवश्यकताओं में अधिक प्रभावी योगदान देने के लिए प्रोत्साहन मिला।

(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि कीट संसाधन ब्यूरो, बेंगलुरु)

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