छोटे किसानों की आय बढ़ाने हेतु वैज्ञानिक पशुपालन एवं जलीय कृषि पद्धतियों पर एचआरडी कार्यक्रम का आयोजन

छोटे किसानों की आय बढ़ाने हेतु वैज्ञानिक पशुपालन एवं जलीय कृषि पद्धतियों पर एचआरडी कार्यक्रम का आयोजन

27-29 जनवरी, 2026, कोलकाता

पशु एवं मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल (डब्ल्यूबीयूएएफएस), कोलकाता, के अनुसंधान, विस्तार तथा फार्म्स निदेशालय ने भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता, के सहयोग से पश्चिम बंगाल के नौ कृषि विज्ञान केन्द्रों (सभी केवीके) के प्रमुखों, विषय वस्तु विशेषज्ञों (एसएमएस), फार्म प्रबंधकों, लैब तकनीशियनों के लिए "निर्वाह से स्थिरता तक: छोटे किसानों की आय बढ़ाने हेतु वैज्ञानिक पशुपालन एवं जलीय कृषि" पर एक 3-दिवसीय मानव संसाधन विकास कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया।

डॉ. टी.के. दत्ता, कुलपति, डब्ल्यूबीयूएएफएस, ने अपने उद्घाटन संबोधन में पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ छोटे पैमाने की खेती के माध्यम से कृषि आय बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक पशुपालन तथा मत्स्य पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था के मुख्य स्तंभ हैं और आधुनिक तकनीकों, बेहतर प्रबंधन तथा कुशल मानव संसाधनों के साथ, छोटे एवं सीमांत किसानों की आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं।

HRD programme on Scientific Animal Husbandry and Aqua-cultural Practices to Augment the Income from Small Farming Organised

डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-अटारी, कोलकाता, ने टिकाऊ प्रथाओं के साथ क्षमता निर्माण की परिवर्तनकारी शक्ति पर जोर दिया, उन्हें ऐसे दो स्तंभों के रूप में चित्रित किया जो न केवल कृषि उत्पादकता को बढ़ाते हैं बल्कि हमारे प्रयासों को पर्यावरण के साथ भी सामंजस्य बिठाते हैं। डॉ. डे ने केवीके कर्मियों से छोटे किसानों के लिए एक लचीला तथा समृद्ध भविष्य बनाने के लिए वैज्ञानिक नवाचारों को पारंपरिक ज्ञान के साथ मिलाने का आग्रह किया।

प्रशिक्षण सत्रों में पशुपालन एवं मत्स्य पालन में आधुनिक तकनीकों, रोग नियंत्रण, उत्पादन लागत में कमी, पोषण प्रबंधन एवं बाजार संपर्क सहित व्यावहारिक प्रशिक्षण पर विस्तृत चर्चा शामिल थी।

कार्यक्रम में जोन-V के सभी केवीके के कुल 36 प्रतिभागियों ने इंटरैक्टिव सत्र में सक्रिय रूप से भाग लिया; साथ ही विशेषज्ञों ने पशुपालन एवं जलीय कृषि के माध्यम से छोटे किसानों की आय बढ़ाने पर व्यावहारिक सलाह दी।

(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता)

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