भाकृअनुप-वीपीकेएएस, अल्मोड़ा और केवीके तवांग ने तवांग में फिंगर मिलेट फील्ड डे, किसान–वैज्ञानिक संवाद तथा मिलेट थ्रेशर प्रदर्शन का किया आयोजन

भाकृअनुप-वीपीकेएएस, अल्मोड़ा और केवीके तवांग ने तवांग में फिंगर मिलेट फील्ड डे, किसान–वैज्ञानिक संवाद तथा मिलेट थ्रेशर प्रदर्शन का किया आयोजन

26 अगस्त 2026, अल्मोड़ा

डॉ. लक्ष्मी कांत, निदेशक, भाकृअनुप–विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा, के मार्गदर्शन में, कृषि विज्ञान केन्द्र, तवांग के सहयोग से भाकृअनुप-वीपीकेएएस एनईएच कार्यक्रम के तहत 17 से 26 अगस्त 2026 तक तवांग जिले के विभिन्न गांवों में फिंगर मिलेट फील्ड डे, किसान–वैज्ञानिक संवाद और विवेक मिलेट थ्रेशर-कम-पर्लर के प्रदर्शनों की एक श्रृंखला आयोजित की गई।

कार्यक्रम के दौरान जिले के विभिन्न ब्लॉकों में किसान–वैज्ञानिक संवाद, फील्ड डे, फ्रंटलाइन प्रदर्शन और विवेक मिलेट थ्रेशर-कम-पर्लर के प्रदर्शन आयोजित किए गए। वैज्ञानिकों और केवीके कर्मियों ने किसानों के साथ उन्नत फिंगर मिलेट उत्पादन प्रौद्योगिकियों, किस्मों के प्रदर्शन, बीज उत्पादन और आदान-प्रदान, फसल प्रबंधन, कटाई तथा कटाई के बाद के प्रबंधन पर संवाद किया। खेती के दौरान अपनाने, सामने आने वाली चुनौतियों और किसानों द्वारा अपनी स्थानीय किस्मों की तुलना में वीएल मंडुआ 376 को प्राथमिकता देने पर भी चर्चा की गई।

कार्यक्रम की शुरुआत 17 अगस्त को कितपी में हुई, जहां 23 किसानों के साथ किसान–वैज्ञानिक संवाद आयोजित किया गया। 18 अगस्त को लुमला ब्लॉक के बाघर गांव में 39 किसानों की भागीदारी के साथ फिंगर मिलेट फील्ड डे आयोजित किया गया, जिसके बाद फोमेंग में विवेक मिलेट थ्रेशर-कम-पर्लर का प्रदर्शन किया गया, जिसमें 30 किसानों ने भाग लिया।

ICAR-VPKAS, Almora and KVK Tawang Organizes Finger Millet Field Days, Farmer–Scientist Interactions and Millet Thresher Demonstrations in Tawang

19 अगस्त को गतिविधियां जेमिथांग–दुदुंगघर ब्लॉक में आयोजित की गईं। नाम्त्सेरिंग में विवेक मिलेट थ्रेशर-कम-पर्लर के प्रदर्शन के साथ किसान–वैज्ञानिक संवाद आयोजित किया गया, जिसमें 34 किसान शामिल हुए। इसके बाद डोंगमारिंग (20 किसान) और ब्लेटिंग (48 किसान) में फील्ड डे आयोजित किए गए, जहां किसानों ने किसान–वैज्ञानिक संवाद में भी भाग लिया।

20 अगस्त को मुकतो–बोंगखार के गोंगखार में 16 किसानों के साथ फील्ड डे आयोजित किया गया, जबकि ग्यामटोंग में किसान–वैज्ञानिक संवाद आयोजित किया गया, जिसमें 50 किसान शामिल हुए। इसके बाद 21 अगस्त को ग्रेंगखार (12 किसान), 22 अगस्त को खेत (9 किसान), 23 अगस्त को बोमजा (16 किसान) और 24 अगस्त को बोंगलेन्ग (20 किसान) में किसान–वैज्ञानिक संवाद आयोजित किए गए।

कार्यक्रम 25 अगस्त को लुमला के शेरबांग में जारी रहा, जहां 23 किसानों ने किसान–वैज्ञानिक संवाद में भाग लिया। 26 अगस्त को कितपी के रुइखार में 12 किसानों के साथ किसान–वैज्ञानिक संवाद आयोजित किया गया तथा शेरनुब गांव में फिंगर मिलेट पर फ्रंटलाइन प्रदर्शन आयोजित किया गया।

विभिन्न स्थानों पर किसानों के खेतों की परिस्थितियों में वीएल मंडुआ 376 का प्रदर्शन आशाजनक रहा, जिसमें अच्छी फसल वृद्धि, अच्छी तरह भरी हुई बालियां, मोटे दाने और प्रभावी कल्ले निकलना देखा गया। इस किस्म का एक प्रमुख लाभ इसकी कम अवधि है, जो स्थानीय किस्मों की तुलना में लगभग 25–35 दिन पहले पकती है और इसके साथ ही अधिक अनाज उपज प्रदान करती है। जल्दी पकने से किसानों को अपने खेतों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए कम अवधि तक निगरानी करनी पड़ती है, जिससे काफी समय और श्रम की बचत होती है।

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खेत-स्तरीय संवादों ने किसानों को उन्नत प्रौद्योगिकियों के प्रदर्शन को प्रत्यक्ष रूप से देखने और वैज्ञानिकों के साथ अपने खेतों के अनुभव साझा करने में सक्षम बनाया। इससे वैज्ञानिकों को किसानों की उत्पादन संबंधी बाधाओं, अनुभवों और प्रौद्योगिकी आवश्यकताओं को समझने में भी मदद मिली।

किसानों ने वीएल मंडुआ 376 और विवेक मिलेट थ्रेशर-कम-पर्लर में विशेष रुचि दिखाई, विशेष रूप से उत्पादकता बढ़ाने और पारंपरिक मिलेट की मड़ाई तथा प्रसंस्करण से जुड़े श्रम और शारीरिक कठिनाई को कम करने के लिए।

ये गतिविधियां भाकृअनुप-वीपीकेएएस, अल्मोड़ा और केवीके तवांग द्वारा प्रौद्योगिकी प्रसार को सुदृढ़ करने तथा उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र में उन्नत फिंगर मिलेट प्रौद्योगिकियों को व्यापक रूप से अपनाने और उनके क्षैतिज प्रसार को बढ़ावा देने के प्रयासों का हिस्सा हैं।

(स्रोत: भाकृअनुप–विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा, उत्तराखंड)

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