भाकृअनुप संस्थानों ने पूरे देश में विश्व जल दिवस 2026 के आयोजन के अवसर पर जल संरक्षण, लैंगिक समावेशन एवं सतत कृषि विकास को बल दिया

भाकृअनुप संस्थानों ने पूरे देश में विश्व जल दिवस 2026 के आयोजन के अवसर पर जल संरक्षण, लैंगिक समावेशन एवं सतत कृषि विकास को बल दिया

22 मार्च, 2026

प्रतिवर्ष 22 मार्च को मनाया जाने वाला विश्व जल दिवस संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्थापित किया गया है, जिसका उद्देश्य मीठे पानी के महत्व को उजागर करना तथा जल के सतत प्रबंधन को बढ़ावा देना है।

जल कृषि, खाद्य सुरक्षा एवं आजीविका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए जलवायु परिवर्तन और बढ़ती मांग जैसी चुनौतियों के बीच इसका संरक्षण अनिवार्य हो गया है। विश्व जल दिवस 2026 का विषय “जल और लैंगिक समानता” है, जो सहयोग एवं सतत विकास को बढ़ावा देने में जल की भूमिका पर बल देता है।

इस अवसर को चिह्नित करते हुए, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) के देशभर के संस्थानों ने विभिन्न कार्यक्रमों और जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया, जिनमें कृषि में जल के कुशल उपयोग और संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया गया।

भाकृअनुप–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली

डॉ. एस.के. अंबास्ट, सदस्य (एनआरएम), एएसआरबी ने समाज के सभी क्षेत्रों में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया तथा विशेष रूप से लवणीय तथा जल-अभाव वाले क्षेत्रों में जल तक पहुंच से संबंधित उनकी चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने सतत जल संसाधन प्रबंधन पद्धतियों की आवश्यकता, महिला किसानों की सक्रिय भागीदारी तथा भूजल के अत्यधिक दोहन की समस्या से निपटने के लिए रिचार्ज रणनीतियों को सुदृढ़ करने पर जोर दिया।

“जल साक्षरता और शासन के माध्यम से महिला किसानों को सशक्त बनाना” विषय पर एक त्वरित मंथन सत्र, धन फाउंडेशन, मदुरै के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें छह राज्यों से आए 17 किसानों (जिनमें 8 महिलाएं शामिल थीं) ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने जल के कुशल उपयोग तथा टैंक प्रबंधन से संबंधित अपने जमीनी अनुभव साझा किए।

ICAR Institutes Nationwide Observe World Water Day 2026, Emphasizing Water Conservation, Gender Inclusion, and Sustainable Agriculture

विशिष्ट अतिथियों, जिनमें डॉ. अनुपमा सिंह, डॉ. सी. विश्वनाथन और डॉ. आर.एन. पडारिया शामिल थे, ने पारंपरिक जल संचयन प्रणालियों, स्वचालित सिंचाई, जलवायु-सहिष्णु पद्धतियों तथा ‘जल सहेलियों’ जैसी महिला-नेतृत्व वाली पहलों के महत्व पर प्रकाश डाला, जो जल शासन को सुदृढ़ करने में सहायक हैं।

इससे पूर्व, डॉ. पी.एस. ब्रह्मानंद, परियोजना निदेशक, डब्ल्यूटीसी, भाकृअनुपृ-आईएआरआई, ने “जल एवं लैंगिक समानता” विषय पर पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हुए सतत जल प्रबंधन में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित किया। कार्यक्रम के दौरान डब्ल्यूटीसी, भाकृअनुप-आईएआरआई के प्रकाशनों का भी विमोचन किया गया।

इस कार्यक्रम में लगभग 140 हितधारकों ने भाग लिया, जिसमें किसान, वैज्ञानिक, शिक्षाविद् तथा प्रमुख संस्थानों एवं संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे।

भाकृअनुप–केन्द्रीय वर्षा आधारित कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद

विश्व जल दिवस के अवसर पर, भाकृअनुप–सीआरआईडीए, हैदराबाद, ने वॉटरशेड संगठन (डब्ल्यूओटीआर), भारतीय वर्षा आधारित कृषि सोसायटी (आईएसडीए) तथा भारतीय कृषि अभियंता सोसायटी (आईएसएई–तेलंगाना चैप्टर) के सहयोग से कृषि में जल संरक्षण और कुशल जल प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु एक किसान रैली का आयोजन किया। इस रैली में किसानों, महिला किसानों, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और छात्रों ने सक्रिय भागीदारी की।

श्री एम. कोदंडा रेड्डी, अध्यक्ष, तेलंगाना कृषि किसान कल्याण आयोग ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई, जबकि डॉ. अरुण तिवारी, सेवानिवृत्त वैज्ञानिक, डीआरडीओ, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

विशेषज्ञों ने जल प्रबंधन के प्रमुख पहलुओं जैसे जल-संरक्षण तकनीक, जल बजटिंग, भूजल पुनर्भरण तथा जलवायु-सहिष्णु पद्धतियों पर विचार-विमर्श किया। जल उपयोग दक्षता बढ़ाने के लिए फार्म पोंड, माइक्रो-इरिगेशन, सौर ऊर्जा, वाटरशेड विकास और संसाधन मानचित्रण को अपनाने पर जोर दिया गया। साथ ही, स्थान-विशिष्ट तकनीकों और परामर्श के प्रसार में भाकृअनुप–सीआरआईडीए की भूमिका की सराहना की गई।

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मुख्य अतिथि ने वर्षा आधारित कृषि में जल के विवेकपूर्ण उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की भूमिका की सराहना की तथा जल उपयोग दक्षता बढ़ाने में महिला किसानों के योगदान को भी मान्यता दी।

उत्सव के अंतर्गत, जल संरक्षण और जागरूकता में योगदान के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले गांवों, प्रगतिशील किसानों और छात्रों को पुरस्कार वितरित किए गए। इस कार्यक्रम में लगभग 300 किसानों ने भाग लिया।

भाकृअनुप–केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर, कोलकाता

मुख्य वक्तव्य में डॉ. के.के. वास, अध्यक्ष, अनुसंधान सलाहकार समिति (आरएसी) ने जल प्रबंधन में लैंगिक दृष्टिकोण को एकीकृत करने के महत्व पर जोर दिया तथा कृषि जल स्थिरता से जुड़ी उभरती चुनौतियों के समाधान हेतु नवाचार आधारित अनुसंधान, शिक्षा और क्षमता निर्माण की आवश्यकता बताई।

डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप–सीआईएफआरआई ने जल, मत्स्य पालन और महिला सशक्तिकरण के बीच मजबूत अंतर्संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत के मत्स्य क्षेत्र के कार्यबल में लगभग 40% महिलाएं शामिल हैं। उन्होंने उनकी भागीदारी बढ़ाने तथा संसाधनों तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि आजीविका में सुधार हो सके और “विकसित भारत @2047” के अनुरूप सतत ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा मिल सके।

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तकनीकी प्रस्तुतियों में सतत जल प्रबंधन और अंतर्देशीय मत्स्य पालन में महिलाओं की भूमिका पर महत्वपूर्ण जानकारी दी गई, जिसमें आजीविका सुरक्षा और संसाधनों की स्थिरता में उनके योगदान को रेखांकित किया गया।

इस कार्यक्रम में लगभग 124 हितधारकों ने भाग लिया, जो लैंगिक समावेशी और जल-स्मार्ट मत्स्य विकास के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस आयोजन ने “जहां जल बहता है, वहां समानता बढ़ती है” संदेश के अनुरूप, समतामूलक और सतत मत्स्य अनुसंधान को बढ़ावा देने में भाकृअनुप–सीआईएफआरआई की भूमिका को और सुदृढ़ किया।

भाकृअनुप–भारतीय जल प्रबंधन संस्थान, भुवनेश्वर, ओडिशा

नहर स्वचालन प्रणाली का उद्घाटन ओडिशा विधानसभा की अध्यक्ष श्रीमती सुरमा पाधी द्वारा किया गया। उन्होंने जल उपयोग दक्षता में सुधार, जल के समान वितरण को सुनिश्चित करने, फसल सघनता बढ़ाने तथा विवेकपूर्ण जल प्रबंधन के माध्यम से रबी फसलों के विस्तार में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

श्रीमती मधुमिता रथ, कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट, नयागढ़ ने विश्व जल दिवस के महत्व पर बल देते हुए “जल और लैंगिक समानता” थीम तथा “जहां जल बहता है, वहां समानता बढ़ती है” के नारे को रेखांकित किया। उन्होंने आईओटी (IoT) आधारित सिंचाई प्रणालियों को अपनाने पर जोर दिया।

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डॉ. ए. सारंगी, निदेशक, भाकृअनुप–आईआईडब्ल्यूएम ने नहर स्वचालन परियोजना को एक सफल सहयोगात्मक प्रयास बताया, जिसमें भाकृअनुप–आईआईडब्ल्यूएम, ओडिशा सरकार का जल संसाधन विभाग, जल उपयोगकर्ता संघ और औद्योगिक साझेदार शामिल हैं। उन्होंने इसकी क्षमता पर प्रकाश डाला कि यह मांग-आधारित सिंचाई सुनिश्चित करने, जल उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधीकरण को समर्थन देने और किसानों की आय में वृद्धि करने में सहायक है। कार्यक्रम के दौरान आठ प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया। इस आयोजन में लगभग 700 हितधारकों ने भाग लिया और अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

इसके अतिरिक्त, विश्व जल दिवस 2026 को आरकेवीवाई परियोजना के अंतर्गत जलवायु-सहिष्णु गांवों में भी मनाया गया। कटक जिले के नारनपुर गांव में लगभग 180 महिला किसानों ने जल प्रबंधन में अपनी भूमिका पर चर्चा की, जबकि हरिथा-मानपुर गांव में 150 से अधिक किसानों ने सब्जी उत्पादन में जल के कुशल उपयोग से संबंधित अपने अनुभव साझा किए।

भाकृअनुप–पूर्वी क्षेत्र अनुसंधान परिसर, पटना

डॉ. अनुप दास, निदेशक, भाकृअनुप–आरसीईआर, की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में जलवायु-सहिष्णु कृषि के लिए सतत जल प्रबंधन पर जोर दिया गया। इसमें माइक्रो-इरिगेशन, उठी हुई क्यारियों (रेज्ड बेड) पर खेती, फसल विविधीकरण (मोटे अनाज एवं दलहन) तथा उन्नत एवं पारंपरिक पद्धतियों के समन्वय को प्रमुखता से रेखांकित किया गया।

डॉ. गोपाल कुमार, इंटरनेशनल वाटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट (आईडब्ल्यूएमआई) ने समान जल उपयोग सुनिश्चित करने के लिए सामुदायिक-आधारित समाधान एवं संस्थागत सहयोग के महत्व पर बल दिया।

विशेषज्ञों ने कुशल जल प्रबंधन, एकीकृत कृषि प्रणाली, सतत जलीय कृषि (एक्वाकल्चर) तथा संसाधन-कुशल तकनीकों पर प्रकाश डाला।

तकनीकी सत्रों में सौर ऊर्जा संचालित जल प्रबंधन, धान परती (राइस फेलो) में जल उपयोग तथा सेंसर आधारित सिंचाई पर चर्चा की गई। किसान–वैज्ञानिक संवाद, इनपुट्स (जल पंप, स्वर्णा मिश्रण, दूध के कैन, सूखा-सहिष्णु किस्में) का वितरण तथा एकीकृत एवं सौर आधारित प्रणालियों का फील्ड प्रदर्शन, सीखने की प्रक्रिया को समृद्ध बनाने में सहायक रहा।

यह कार्यक्रम भैंस सुधार एवं पशु आनुवंशिक संसाधनों से संबंधित एससीएसपी नेटवर्क परियोजनाओं के अंतर्गत भी समर्थित था। इस अवसर पर आईडब्ल्यूएमआई द्वारा वाटर इनोवेशन हैकाथॉन 2026 के फ्लायर का भी विमोचन किया गया।

इस कार्यक्रम में कुल 140 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें गया और अररिया से लगभग 80 किसान शामिल थे। यह जानकारी उमेश कुमार मिश्रा द्वारा दी गई।

(स्रोत: संबंधित भाकृअनुप संस्थान)

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