5 जून, 2026
विश्व पर्यावरण दिवस, जो प्रतिवर्ष 5 जून को मनाया जाता है, पर्यावरण जागरूकता और कार्रवाई के लिए दुनिया का सबसे बड़ा वैश्विक मंच है। यह प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा, जैव विविधता के संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में सामूहिक जिम्मेदारी को प्रोत्साहित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। विश्व पर्यावरण दिवस 2026 की थीम, "Inspired by Nature. For Climate. For Our Future." ने क्षतिग्रस्त पारिस्थितिक तंत्रों के पुनर्स्थापन, जलवायु सहनशीलता को सुदृढ़ करने तथा भूमि एवं जल संसाधनों के सतत प्रबंधन को बढ़ावा देने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित किया। यह थीम विशेष रूप से कृषि के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र और प्राकृतिक संसाधन खाद्य सुरक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता तथा ग्रामीण आजीविकाओं की सहनशीलता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं।
इस अवसर को चिह्नित करने के लिए, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) के देशभर के संस्थानों ने पर्यावरण संरक्षण और सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न प्रकार की गतिविधियों का आयोजन किया। वैज्ञानिकों, किसानों, विद्यार्थियों, महिला समूहों और ग्रामीण युवाओं ने वृक्षारोपण अभियानों, जागरूकता कार्यक्रमों, स्वच्छता अभियानों, तकनीकी व्याख्यानों, किसान-वैज्ञानिक संवादों तथा पर्यावरण-अनुकूल प्रौद्योगिकियों के प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से भाग लिया। इन राष्ट्रव्यापी आयोजनों के माध्यम से, भाकृअनुप ने सतत कृषि, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और जलवायु-सहनशील विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया, साथ ही पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिक पुनर्स्थापन में अधिक से अधिक जनभागीदारी को प्रोत्साहित किया।
भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद
विश्व पर्यावरण दिवस 2026 समारोह के अंतर्गत, भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-सीआरआईडीए), हैदराबाद, ने अन्य भाकृअनुप संस्थानों, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (एसएयू) तथा कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) के सहयोग से आज "वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण और उसका दक्षतापूर्ण उपयोग" विषय पर एक ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का उद्देश्य वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण तथा जल संसाधनों के दक्षतापूर्ण उपयोग के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था, जिसे जलवायु कार्रवाई के एक महत्वपूर्ण उपाय के रूप में देखा जाता है।

डॉ. वी.के. सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-सीआरआईडीए, ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए स्वच्छ वायु, स्वच्छ जल और स्वस्थ मृदा बनाए रखने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने जलवायु संबंधी चुनौतियों का सामना करने और पारिस्थितिक संतुलन सुनिश्चित करने में प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने, हरित आवरण में वृद्धि करने तथा कर्मचारियों और समुदाय के बीच सतत जीवनशैली को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया गया। डॉ. सिंह ने कर्मचारियों के साथ मिलकर ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधारोपण किया और पर्यावरण संरक्षण के प्रति व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर बल दिया।

कार्यक्रम ने पर्यावरण के प्रति जागरूक व्यवहार और सतत प्रथाओं को बढ़ावा देकर मिशन LiFE के उद्देश्यों को भी सुदृढ़ किया। कार्यक्रम का समापन वृक्षारोपण और संरक्षण गतिविधियों को निरंतर जारी रखने की सामूहिक प्रतिज्ञा के साथ हुआ।
कार्यक्रम में कुल 100 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
भाकृअनुप-राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केन्द्र, मेदजीफेमा, नागालैंड
भाकृअनुप-राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केन्द्र ने मिरेम गांव के मिथुन पालकों की सक्रिय भागीदारी के साथ विश्व पर्यावरण दिवस 2026 मनाया।
कार्यक्रम के दौरान, विशेषज्ञों ने पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और वन पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण में मिथुन-आधारित कृषि प्रणालियों की भूमिका पर प्रकाश डाला। जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन के संबंध में भी जागरूकता उत्पन्न की गई।

पारिस्थितिक पुनर्स्थापन और सतत मिथुन पालन को समर्थन देने के उद्देश्य से, सहभागी किसानों के बीच चारा पौधों के पौधे वितरित किए गए, ताकि चारा उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके और प्राकृतिक वनों पर दबाव कम किया जा सके। कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों द्वारा पर्यावरण संरक्षण और सतत संसाधन प्रबंधन के प्रति सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
कार्यक्रम में कुल 28 किसानों ने भाग लिया, जिसका केंद्रबिंदु पर्यावरण संरक्षण और सतत पशुधन पालन रहा।
भाकृअनुप-केन्द्रीय द्वीप कृषि अनुसंधान संस्थान, श्री विजय पुरम, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह
विश्व पर्यावरण दिवस 2026 समारोह के अंतर्गत, भाकृअनुप-सीआईएआरआई ने संस्थान परिसर में एक वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया, जिसके दौरान पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने और हरित आवरण बढ़ाने के उद्देश्य से नींबू तथा अन्य वृक्ष प्रजातियों के 50 पौधे लगाए गए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पं. दीन दयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, मथुरा के पूर्व कुलपति प्रो. ए. सी. वार्ष्णेय ने मुख्य अतिथि के रूप में की। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने, पर्यावरणीय गुणवत्ता में सुधार लाने तथा सतत आजीविकाओं को समर्थन देने में वृक्षारोपण और जैव विविधता संरक्षण के महत्व पर बल दिया।

डॉ. जय सुंदर, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएआरआई, ने अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के संवेदनशील द्वीपीय पारिस्थितिकी तंत्र में सतत कृषि, जलवायु सहनशीलता और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने जैव विविधता संरक्षण, पारिस्थितिक संतुलन और जलवायु परिवर्तन शमन में वृक्षारोपण की भूमिका को रेखांकित करते हुए कर्मचारियों और हितधारकों को दैनिक जीवन में पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी व्यवहार अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
यह आयोजन सार्थक जमीनी पहलों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और जलवायु कार्रवाई के प्रति भाकृअनुप-सीआईएआरआई की निरंतर प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करता है।
भाकृअनुप–भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, अनुसंधान केन्द्र, उदगमंडलम
भाकृअनुप–भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, अनुसंधान केन्द्र, उदगमंडलम ने आज "Inspired by Nature, for Climate, for our Future" विषय के अंतर्गत गुरुकुलम स्कूल, अगलार, ऊटी में विश्व पर्यावरण दिवस जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों के बीच पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और सतत जीवनशैली के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था।
सत्र के दौरान जलवायु परिवर्तन के कारणों और उसके प्रभावों, नीलगिरि क्षेत्र के पारिस्थितिक महत्व तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया। विद्यार्थियों को प्लास्टिक के उपयोग में कमी लाने, जल और ऊर्जा का संरक्षण करने, वृक्षारोपण करने तथा स्वच्छता बनाए रखने जैसी पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी आदतों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने में युवाओं की भूमिका पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम में 154 विद्यार्थियों (66 बालक और 88 बालिकाएँ) तथा शिक्षकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। दो विद्यार्थियों ने भी इस विषय पर अपने विचार साझा किए। इस आयोजन ने पर्यावरणीय मुद्दों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और विद्यार्थियों को अपने दैनिक जीवन में सतत प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रेरित करने में सफलता प्राप्त की।
भाकृअनुप पूर्वी क्षेत्र अनुसंधान परिसर, पटना
भाकृअनुप पूर्वी क्षेत्र अनुसंधान परिसर, पटना ने आज "जलवायु कार्रवाई" विषय तथा "स्वस्थ भविष्य के लिए सतत कृषि" उप-विषय के अंतर्गत विश्व पर्यावरण दिवस 2026 मनाया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के उद्देश्य से बच्चों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता के आयोजन के साथ हुआ। विभिन्न प्रभागों के अध्यक्षों और कार्यक्रम समन्वयकों ने दीर्घकालिक खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्यावरण संरक्षण, जलवायु-सहनशील कृषि, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा सतत कृषि पद्धतियों के महत्व पर प्रकाश डाला।

डॉ. अनुप दास, निदेशक, भाकृअनुप-आरसीईआर, पटना, ने सतत कृषि विकास को बढ़ावा देने तथा अधिक स्वस्थ और सहनशील भविष्य के निर्माण के लिए वर्तमान और भावी पीढ़ियों की सामूहिक भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया।
समारोह के अंतर्गत एक वृक्षारोपण अभियान का भी आयोजन किया गया। विद्यार्थियों और बच्चों को "खेत बचाओ अभियान" के बारे में जागरूक किया गया, जो बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच मृदा, जल, जैव विविधता तथा उत्पादक कृषि भूमि के संरक्षण को बढ़ावा देता है।
भाकृअनुप-केवीके, नदिया-II, पूर्वी क्षेत्रीय स्टेशन, राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, कल्याणी, पश्चिम बंगाल
भाकृअनुप-कृषि विज्ञान केंद्र, नदिया (अतिरिक्त) ने भाकृअनुप-सीआईएफए फील्ड स्टेशन, कल्याणी के सहयोग से शांतिपुर प्रखंड के छोटोकुलिया गांव में किसानों, कृषक महिलाओं और विद्यार्थियों की भागीदारी के साथ विश्व पर्यावरण दिवस 2026 मनाया। कार्यक्रम का उद्देश्य "Inspired by Nature. For Climate. For Our Future." विषय के अंतर्गत प्रधानमंत्री की हरित पहलों और जलवायु कार्रवाई के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को बढ़ावा देना था।
पर्यावरण संरक्षण और सतत जीवनशैली के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के लिए स्कूली विद्यार्थियों के लिए एक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता तथा "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान के अंतर्गत एक वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया गया।

मेरा गांव मेरा गौरव कार्यक्रम के अंतर्गत "विज्ञान-आधारित पोषक तत्व एवं अन्य आदानों के प्रबंधन को अपनाना" विषय पर एक जागरूकता अभियान आयोजित किया गया, जिसमें मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, हरी खाद के उपयोग, जल के दक्षतापूर्ण उपयोग तथा समेकित पोषक तत्व प्रबंधन के महत्व को सतत कृषि के लिए रेखांकित किया गया। प्रतिभागियों को जल संरक्षण और उचित अपशिष्ट निपटान की प्रथाओं को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम में छोटोकुलिया, बड़ोकुलिया और हिजुली गांवों के लगभग 150 किसानों, कृषक महिलाओं और विद्यार्थियों ने भाग लिया।
भाकृअनुप पूर्वोत्तर पर्वतीय क्षेत्र अनुसंधान परिसर, उमियाम, मेघालय
भाकृअनुप उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र अनुसंधान परिसर (भाकृअनुप आरसी एनईएच), उमियाम ने "Inspired by Nature. For Climate. For Our Future" विषय के अंतर्गत पर्यावरणीय संरक्षण, जलवायु कार्रवाई और सतत जीवनशैली पर केंद्रित पूरे दिन चलने वाले कार्यक्रम के साथ विश्व पर्यावरण दिवस 2026 मनाया।
कार्यक्रम में वर्ष 2026 के पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित एवं प्रख्यात पर्यावरणविद् श्री हेली वार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला और विद्यार्थियों तथा युवाओं से प्लास्टिक के उपयोग में कमी लाकर तथा जैव-अपघटनीय विकल्पों को अपनाकर पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने का आग्रह किया।
डॉ. एस. अशुतोष, आईएफएस (सेवानिवृत्त), सह-अध्यक्ष एवं निदेशक, उत्कृष्टता केन्द्र (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन एवं सतत आजीविका), मेघालय बेसिन प्रबंधन एजेंसी (एमबीएमए), मेघालय सरकार ने प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा तथा मेघालय की समृद्ध जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी पर बल दिया।

भाकृअनुप आरसी एनईएच, उमियाम के निदेशक डॉ. जी. कादिरवेल ने पर्यावरण संरक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए औपचारिक एवं अनौपचारिक शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी आदतों का विकास करने का आह्वान किया। समारोह का शुभारंभ वृक्षारोपण अभियान के साथ हुआ, जिसके पश्चात विद्यालयी विद्यार्थियों में पर्यावरणीय चेतना और जलवायु कार्रवाई को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विशेषज्ञ व्याख्यान, नारा लेखन प्रतियोगिताएं, तात्कालिक भाषण प्रतियोगिताएं तथा अन्य जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया।
भाकृअनुप-केन्द्रीय द्वीप कृषि अनुसंधान संस्थान, श्री विजय पुरम, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह
विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में, भारतीय मत्स्य सर्वेक्षण (एफएसआई) ने भाकृअनुप-केन्द्रीय द्वीप कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-सीआईएआरआई), राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईओटी), गैर-सरकारी संगठनों, मछुआरों, विद्यार्थियों और समुदाय के सदस्यों के सहयोग से श्री विजय पुरम, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में जलवायु परिवर्तन और समुद्री मत्स्य पालन विषय पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।
कार्यक्रम में महासागरों और मत्स्य क्षेत्र पर जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों पर प्रकाश डाला गया, जिनमें समुद्री तापमान में वृद्धि, समुद्र-स्तर में वृद्धि, महासागरीय अम्लीकरण, परिसंचरण प्रतिरूपों में परिवर्तन तथा अत्यधिक मौसमीय घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति शामिल हैं। इन परिवर्तनों के संदर्भ में मछलियों की वृद्धि, प्रजनन, प्रवासन, जैव विविधता, मत्स्य उत्पादकता तथा मत्स्य समुदायों की आजीविका पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा की गई।
प्रवाल भित्तियों, समुद्री घास के मैदानों, मैंग्रोव तथा अन्य तटीय पारिस्थितिकी तंत्रों की संवेदनशीलता पर विशेष बल दिया गया, जो समुद्री जीवों के लिए महत्वपूर्ण प्रजनन और शिशु पालन आवास के रूप में कार्य करते हैं। मत्स्य संसाधनों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए इन पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित किया गया।

चर्चा के दौरान मत्स्य समुदायों द्वारा अनुभव किए जा रहे मछलियों की उपलब्धता और मत्स्य भंडार संरचना में उभरते परिवर्तनों को भी उजागर किया गया तथा बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुरूप विज्ञान-आधारित मत्स्य प्रबंधन और अनुकूलन रणनीतियों के महत्व पर बल दिया गया। प्रतिभागियों को सतत प्रथाओं को अपनाने तथा समुद्री संसाधनों और तटीय आजीविकाओं की सुरक्षा के लिए जलवायु-सहनशील दृष्टिकोणों का समर्थन करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों, मछुआरों, गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों तथा अन्य हितधारकों सहित लगभग 40 प्रतिभागियों ने भाग लिया। एक संवादात्मक सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण तथा बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों में मत्स्य क्षेत्र के भविष्य पर विचार-विमर्श किया।
भाकृअनुप-केन्द्रीय जूट एवं संबद्ध रेशा अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर, कोलकाता
भाकृअनुप-केन्द्रीय जूट एवं संबद्ध रेशा अनुसंधान संस्थान ने आज विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर पर्यावरणीय स्थिरता और जलवायु-सहनशील कृषि को बढ़ावा देने वाली जागरूकता एवं रचनात्मक गतिविधियों की एक श्रृंखला का आयोजन किया।
कार्यक्रम के दौरान "वनाग्नि और फसल अवशेष दहन (सीआरबी): पर्यावरणीय व्यवधानों के प्रेरक कारक" विषय पर एक तकनीकी संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में वनाग्नि और फसल अवशेष दहन के पर्यावरणीय प्रभावों पर प्रकाश डाला गया तथा सतत कृषि पद्धतियों की आवश्यकता पर बल दिया गया।

संस्थान के कर्मचारियों, विद्यार्थियों और परियोजना कर्मचारियों के लिए "Inspired by Nature, For Climate, For Our Future" तथा "खेत बचाओ अभियान" विषयों पर एक सिट एंड ड्रॉ प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया।
इन पहलों के माध्यम से, आईसीएआर-क्रिजाफ ने पर्यावरण संरक्षण, सतत कृषि तथा हरित और स्वस्थ भविष्य के लिए जागरूकता सृजन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।
भाकृअनुप-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, कृषि विज्ञान केन्द्र, मालदा
कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), मालदा ने पर्यावरण संरक्षण और सतत कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 4 जून 2026 को सरकारी अधिकारियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, किसानों और हितधारकों की सक्रिय भागीदारी के साथ विश्व पर्यावरण दिवस 2026 मनाया।
कार्यक्रम के अंतर्गत जलवायु-सहनशील और पर्यावरण-अनुकूल कृषि प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया गया, जिनमें स्टिकी ट्रैप, सौर प्रकाश ट्रैप, फेरोमोन ट्रैप, फल बैगिंग प्रौद्योगिकी, न्यूट्री-गार्डन मॉडल, प्राकृतिक खेती की पद्धतियाँ तथा खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ शामिल थीं। सतत कृषि, समेकित कीट प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण और पोषण सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए भ्रमण कार्यक्रमों तथा संवादात्मक सत्रों का आयोजन किया गया।

गरिमामयी अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों की सहभागिता के साथ एक वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया गया, जिसने पारिस्थितिक पुनर्स्थापन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। स्थानीय बागवानी विविधता और स्वस्थ आहार संबंधी आदतों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विद्यालयी बच्चों के बीच आम की विभिन्न किस्मों का भी वितरण किया गया।
कार्यक्रम ने सतत कृषि और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता को सफलतापूर्वक सुदृढ़ किया तथा हरित और स्वस्थ भविष्य के लिए विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के संदेश को पुनः स्थापित किया।
भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान, प्रयागराज
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-सीआईएफआरआई), प्रयागराज के क्षेत्रीय केन्द्र ने संगम, प्रयागराज में ‘खेत बचाओ अभियान’ का आयोजन किया, जिसमें सतत कृषि, स्वस्थ नदी पारिस्थितिकी तंत्र और अंतर्देशीय मत्स्य संरक्षण के मध्य अंतर्संबंधों को रेखांकित किया गया।
डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएफआरआई, बैरकपुर, के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, सतत कृषि और उत्तरदायी मत्स्य प्रबंधन पर बल दिया गया।

डॉ. बी.आर. चव्हाण, प्रमुख, भाकृअनुप-सीआईएफआरआई क्षेत्रीय केन्द्र, प्रयागराज, ने मृदा स्वास्थ्य में सुधार और जलीय जैव विविधता के संरक्षण के लिए प्राकृतिक खेती की पद्धतियों, रासायनिक उपयोग में कमी तथा नदी पुनर्भरण (रिवर रैंचिंग) के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों तथा पर्यावरणीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। छह महिलाओं सहित कुल 50 हितधारकों की सहभागिता रही। वक्ताओं ने सामूहिक रूप से नदी प्रदूषण को कम करने, मृदा उर्वरता में सुधार करने और पारिस्थितिक स्थिरता को समर्थन देने के लिए पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों की वकालत की।
भाकृअनुप-राष्ट्रीय प्राकृतिक रेशा अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, कोलकाता
भाकृअनुप-राष्ट्रीय प्राकृतिक रेशा अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, कोलकाता ने पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति गहन उत्साह और प्रतिबद्धता के साथ विश्व पर्यावरण दिवस 2026 मनाया।

वैश्विक अभियान की थीम "Inspired by Nature. For Climate. For Our Future." के अनुरूप आयोजित इस कार्यक्रम में जागरूकता और जनसंपर्क गतिविधियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, जलवायु सहनशीलता और सतत विकास के महत्व पर बल दिया गया।
(स्रोत: संबंधित भाकृअनुप संस्थान)







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