भाकृअनुप संस्थानों द्वारा पूरे देश में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 का किया गया आयोजन

भाकृअनुप संस्थानों द्वारा पूरे देश में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 का किया गया आयोजन

8 मार्च, 2026

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस प्रत्येक वर्ष 8 मार्च को विश्व भर में महिलाओं की उपलब्धियों को सम्मानित करने और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मनाया जाता है। वर्ष 2026 की थीम, “लैंगिक समानता के लिए कार्रवाई में तेजी” रही, जो महिलाओं के सशक्तिकरण तथा विभिन्न क्षेत्रों में समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए अधिक सशक्त एवं गहन प्रयासों की आवश्यकता को दर्शाती है। महिलाएं कृषि तथा कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण आजीविका तथा सतत विकास में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इस अवसर को चिह्नित करते हुए, देशभर के भाकृअनुप संस्थानों ने अपने-अपने परिसरों में सेमिनार, कार्यशालाओं और संवादात्मक कार्यक्रमों का आयोजन कर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 मनाया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से महिला वैज्ञानिकों, किसानों, उद्यमियों और पेशेवरों के योगदान को रेखांकित किया गया, जो कृषि अनुसंधान और नवाचार को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

भाकृअनुप-राष्ट्रीय मांस अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस भाकृअनुप–राष्ट्रीय मांस अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-एनएमआरआई), हैदराबाद, में डॉ. एम.एल. जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (भाकृअनुप), की उपस्थिति में मनाया गया। कार्यक्रम में कृषि, विज्ञान और उद्यमिता के क्षेत्रों में महिलाओं के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया गया तथा कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखलाओं में महिलाओं के सशक्तिकरण की आवश्यकता पर बल दिया गया। इस अवसर पर यह भी बताया गया कि वर्ष 2026 को “अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है, जो कृषि-खाद्य प्रणालियों और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देता है।

ICAR-National Meat Research Institute, Hyderabad  International Women’s Day was celebrated at ICAR–National Meat Research Institute, Hyderabad, in the presence of Dr M.L. Jat, Secretary, DARE & Director General, ICAR. The programme highlighted the significant contributions of women in agriculture, science, and entrepreneurship, and emphasized the need for empowering women across agri-food value chains. The event also noted that 2026 is being observed as the International Year of the Woman Farmer, recognizing the crucial role of women in strengthening agrifood systems and rural livelihoods.  On the occasion, women entrepreneurs and incubatees associated with the Agri-Business Incubator (ABI) of ICAR-NMRI were felicitated for their innovative initiatives in livestock product processing and value addition. Addressing the gathering, Dr Jat highlighted the growing role of women-led start-ups and enterprises supported through ICAR’s Agri-Business Incubation ecosystem in transforming agri-based businesses, and encouraged women incubatees to utilize ICAR’s research and incubation support to develop scalable, market-oriented technologies.  During the programme, the Director General also released two institute publications: the Final Project Report of the contract research project with Frigorifico Allana Private Limited and “ICAR-NMRI at a Glance,” showcasing the institute’s mandate, achievements, and research initiatives.  ICAR–Indian Institute of Millets Research, Hyderabad  International Women’s Day 2026 was celebrated at ICAR–Indian Institute of Millets Research, Hyderabad, today, highlighting that 2026 has been declared as the UN Year for Women Farmers and recognizing the important role of women in agriculture, research, and food and nutritional security.  The programme was graced by Dr Geetha Nagasree, a renowned oncologist from Hyderabad, as the Chief Guest, who emphasized the importance of women’s health, early detection of diseases such as breast and cervical cancer, and the role of HPV vaccination and regular health check-ups.  Dr C. Tara Satyavathi, Director, ICAR–IIMR, highlighted the contributions of women in millet cultivation, processing, and value chains, and outlined the institute’s initiatives in capacity building, entrepreneurship promotion, and millet-based value addition to support women farmers, SHGs, and FPOs. On the occasion, Certificates of Appreciation were presented to women employees in recognition of their contributions to the institute’s research and outreach activities.  (Source: Respective ICAR Institutes)

इस अवसर पर भाकृअनुप-एनएमआरआई के एग्री-बिजनेस इनक्यूबेटर (एबीआई) से जुड़ी महिला उद्यमियों एवं इनक्यूबीटीज़ को पशुधन उत्पाद प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन में उनके नवाचारी प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया। सभा को संबोधित करते हुए डॉ. जाट ने भाकृअनुप के एग्री-बिजनेस इनक्यूबेशन तंत्र के माध्यम से समर्थित महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स और उद्यमों की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला, जो कृषि-आधारित व्यवसायों को परिवर्तित करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने महिला इनक्यूबीटीज़ को भाकृअनुप की अनुसंधान एवं इनक्यूबेशन सुविधाओं का उपयोग कर विस्तार योग्य (स्केलेबल) और बाजारोन्मुखी प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दौरान महानिदेशक ने संस्थान के दो प्रकाशनों का विमोचन भी किया—फ्रिगोरिफिको अलाना प्राइवेट लिमिटेड के साथ अनुबंध अनुसंधान परियोजना की अंतिम रिपोर्ट तथा “भाकृअनुप-एनएमआरआई एक नजर में”, जिसमें संस्थान के कार्यादेश, उपलब्धियों और अनुसंधान पहलों का विवरण प्रस्तुत किया गया है।

भाकृअनुप–भारतीय बाजरा अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 आज भाकृअनुप–भारतीय बाजरा अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-एनएमआरआई), हैदराबाद, में मनाया गया। इस अवसर पर यह रेखांकित किया गया कि वर्ष 2026 को संयुक्त राष्ट्र द्वारा “महिला किसान वर्ष” घोषित किया गया है, जो कृषि, अनुसंधान तथा खाद्य एवं पोषण सुरक्षा में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देता है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हैदराबाद की प्रसिद्ध कैंसर विशेषज्ञ डॉ. गीता नागश्री उपस्थित रहीं। उन्होंने महिलाओं के स्वास्थ्य के महत्व, स्तन एवं गर्भाशय ग्रीवा कैंसर जैसी बीमारियों की प्रारंभिक पहचान, एचपीवी टीकाकरण तथा नियमित स्वास्थ्य जांच की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।

डॉ. सी. तारा सत्यवती, निदेशक, भाकृअनुप-एनएमआरआई, ने बाजरा उत्पादन, प्रसंस्करण एवं मूल्य श्रृंखला में महिलाओं के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने महिला किसानों, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) तथा किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को समर्थन देने हेतु संस्थान द्वारा संचालित क्षमता निर्माण, उद्यमिता प्रोत्साहन तथा बाजरा आधारित मूल्य संवर्धन से संबंधित पहलों की जानकारी दी। इस अवसर पर संस्थान की अनुसंधान एवं प्रसार गतिविधियों में योगदान के लिए महिला कर्मचारियों को प्रशंसा प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।

भाकृअनुप–केन्द्रीय जूट एवं संबद्ध रेशा अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर

यह कार्यक्रम “देने से प्राप्त होता है” थीम के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसमें उत्तर 24 परगना जिले के हरुआ गांव की 15 महिलाओं ने भाग लिया।

ICAR Institutes Pan-India Celebrates International Women’s Day 2026

डॉ. गौरांग कर, निदेशक, भाकृअनुप–क्रीजाफ, ने महिला दिवस मनाने के महत्व पर प्रकाश डाला और कृषि, समाज एवं संस्कृति में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने महिलाओं को समान अवसर प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया तथा कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा, पोषण और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में महिला किसानों के महत्वपूर्ण योगदान को सराहा। उन्होंने गृहिणियों और कार्यरत माताओं द्वारा पेशेवर एवं पारिवारिक जिम्मेदारियों के संतुलन में आने वाली चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उनके धैर्य और समर्पण की प्रशंसा की। इसके साथ ही, उन्होंने कृषि में महिलाओं के कार्यभार को कम करने और कार्य परिस्थितियों में सुधार हेतु महिला-अनुकूल कृषि उपकरणों के महत्व पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि भाकृअनुप–क्रीजाफ ने जूट के मूल्य संवर्धित विविध उत्पादों के क्षेत्र में महिला किसानों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया है, जिसके अंतर्गत पिछले पाँच वर्षों में लगभग 1,000 महिलाओं को जूट बैग निर्माण एवं संबंधित उत्पादों का प्रशिक्षण दिया गया है।

यह कार्यक्रम केवीके, उत्तर 24 परगना (अतिरिक्त) के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में भाग लेने वाली महिला किसानों ने तकनीकी एवं सामाजिक सशक्तिकरण से जुड़े अपने अनुभव साझा किए और अपने कृषि परिवारों के समर्थन हेतु आय सृजन के महत्व पर बल दिया।

भाकृअनुप–केन्द्रीय मीठाजल जलजीव पालन अनुसंधान संस्थान, भुवनेश्वर

भाकृअनुप–केन्द्रीय मीठे पानी की जलीय कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-सिफा), भुवनेश्वर, तथा कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), खुर्दा, द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के उपलक्ष्य में “महिला अनुकूल जलीय कृषि तकनीकों के माध्यम से अनुसूचित जाति की महिला किसानों का सशक्तिकरण” विषय पर संयुक्त रूप से एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सुश्री प्रज्ञा परंगमा, उप जिलाधिकारी, खुर्दा ने भाकृअनुप-सिफा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस समारोह में भाग लेने पर प्रसन्नता व्यक्त की तथा जलीय कृषि और ग्रामीण विकास में महिलाओं के योगदान को पहचानने और बढ़ावा देने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मत्स्य पालन क्षेत्र में ज्ञान, उद्यमिता और अवसरों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाकर आजीविका को सुदृढ़ किया जा सकता है तथा समावेशी और सतत विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है।

डॉ. पी.के. साहू, निदेशक, भाकृअनुप-सिफा, ने जलीय कृषि और मत्स्य पालन में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए संस्थान की पहलों को रेखांकित किया तथा महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक विकास को समर्थन देने वाली विभिन्न सरकारी योजनाओं का भी उल्लेख किया, जो उन्हें विकासात्मक गतिविधियों में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करती हैं।

ICAR Institutes Pan-India Celebrates International Women’s Day 2026

डॉ. के.डी. महापात्र, पूर्व प्रधान वैज्ञानिक, भाकृअनुप-सिफा एवं विशिष्ट अतिथि तथा डॉ. बिंदु आर. पिल्लई ने “देने से प्राप्त होता है” थीम के अनुरूप महिलाओं की आजीविका और सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ाने में जलीय कृषि उद्यमिता की संभावनाओं पर जोर दिया।

भुवनेश्वर स्थित एसएआरए की जीबी सदस्य तथा भाकृअनुप-सिफा की आंतरिक समिति (आईसी) की बाह्य सदस्य सुश्री कांता मोहंती ने भी सभा को संबोधित किया और लैंगिक समानता एवं ज्ञान साझाकरण के महत्व पर बल दिया।

इस कार्यशाला में खुर्दा जिले के बालिपटना ब्लॉक की कुल 100 महिला किसानों ने भाग लिया।

भाकृअनुप–भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर

भाकृअनुप–भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर द्वारा आज कानपुर देहात के कोरऊवा गांव की महिला किसानों के साथ विश्व महिला दिवस तथा संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित “महिला किसान वर्ष” मनाया गया।

ICAR-Indian Institute of Pulses Research, Kanpur  ICAR-Indian Institute of Pulses Research celebrated World Women’s Day and UN Year for Women Farmers today with women farmers of Korauwa Village of Kanpur Dehat.  More than 50 women farmers participated in the celebration. During the programme, the importance of pulse crops for human nutrition and soil health was highlighted, emphasizing their role as nutrient-rich, high-protein food sources and natural soil enhancers through atmospheric nitrogen fixation, which reduces dependence on synthetic fertilizers. Pulse cultivation was also discussed as a means to promote biodiversity and climate resilience. Considering the upcoming harvest of mustard and wheat in the region, farmers were advised to cultivate short-duration spring mungbean and urdbean (60–70 days) between February and May to utilize the period between the rabi and kharif seasons. These crops require 2–3 irrigations, perform well under warm conditions, and can provide good yields with proper management.

इस कार्यक्रम में 50 से अधिक महिला किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान मानव पोषण और मृदा स्वास्थ्य के लिए दलहनी फसलों के महत्व को रेखांकित किया गया। यह बताया गया कि दलहन पोषक तत्वों से भरपूर एवं उच्च प्रोटीन युक्त खाद्य स्रोत हैं, साथ ही वायुमंडलीय नाइट्रोजन स्थिरीकरण के माध्यम से मृदा की उर्वरता बढ़ाते हैं, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है। दलहन की खेती को जैव विविधता बढ़ाने और जलवायु सहनशीलता को मजबूत करने का एक प्रभावी माध्यम भी बताया गया। क्षेत्र में सरसों और गेहूं की आगामी कटाई को ध्यान में रखते हुए किसानों को फरवरी से मई के बीच रबी और खरीफ फसलों के मध्य की अवधि का उपयोग करते हुए कम अवधि वाली ग्रीष्मकालीन मूंग एवं उड़द (60–70 दिन) की खेती करने की सलाह दी गई। इन फसलों के लिए 2–3 सिंचाई की आवश्यकता होती है, ये गर्म परिस्थितियों में अच्छी तरह विकसित होती हैं और उचित प्रबंधन के साथ अच्छी उपज प्रदान करती हैं।

भाकृअनुप–केन्द्रीय चावल अनुसंधान संस्थान, कटक

भाकृअनुप–केन्द्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-सीआरआरआई), कटक, में आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन, डॉ. जी. ए. के. कुमार, निदेशक, भाकृअनुप-सीआरआरआई, की अध्यक्षता में किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. मयाबिनी जेना, पूर्व प्रमुख, फसल संरक्षण प्रभाग एवं एमेरिटस वैज्ञानिक, भाकृअनुप-सीआरआरआई उपस्थित रहीं।

अपने संबोधन में डॉ. जेना ने महिला सशक्तिकरण के महत्व पर जोर दिया और लैंगिक समानता की प्राप्ति में आने वाली चुनौतियों को रेखांकित किया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2026 को संयुक्त राष्ट्र द्वारा “महिला किसान वर्ष” घोषित किया गया है, जो कृषि, खाद्य सुरक्षा और सतत विकास में महिला किसानों के महत्वपूर्ण योगदान को मान्यता देता है।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. जी. ए. के. कुमार ने जीवन के सभी क्षेत्रों में लैंगिक समानता सुनिश्चित करने हेतु अधिक प्रयास करने का आह्वान किया।

भाकृअनुप–पोल्ट्री अनुसंधान निदेशालय, हैदराबाद

भाकृअनुप–पोल्ट्री अनुसंधान निदेशालय (भाकृअनुप-डीपीआर), हैदराबाद में आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 मनाया गया, जिसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा “महिला किसान वर्ष” के रूप में भी घोषित किया गया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. एस. एस. पॉल, प्रमुख, पीएनपीएच तथा डॉ. यू. राजकुमार, प्रमुख, एजी एवं बी ने की। कार्यक्रम की थीम “सभी महिलाओं और बालिकाओं के लिए अधिकार, न्याय और कार्रवाई” रही, जिसमें संस्थागत जवाबदेही और यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया कि कानूनी सुरक्षा उपाय समाज में ठोस प्रगति में परिवर्तित हों।

डॉ. आर. एन. चटर्जी, निदेशक, भाकृअनुप-डीपीआर, के प्रोत्साहन से आंतरिक समिति द्वारा कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम (पीओएसएच) से संबंधित पोस्टर तैयार किए गए, जिनका कार्यक्रम के दौरान विमोचन किया गया और संस्थान के विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु कृषि क्षेत्र में चल रही विभिन्न पहलों को भी रेखांकित किया गया।

अपने संदेश में डॉ. चटर्जी ने महिला शोधकर्ताओं को किसान समुदाय के हित में पोल्ट्री विज्ञान में उन्नत अनुसंधान करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान में महिलाओं की अधिक भागीदारी और नेतृत्व की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार किया जा सके।

भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि कीट संसाधन ब्यूरो, बेंगलुरु

भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि कीट संसाधन ब्यूरो (भाकृअनुप–एनबीएआईआर), बेंगलुरु, में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। इस अवसर पर कर्नाटक स्टेट अक्कमहादेवी महिला विश्वविद्यालय, विजयपुरा की पूर्व कुलपति प्रो. गीता बाली मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. एस. एन. सुशील, निदेशक, भाकृअनुप–एनबीएआईआर, ने की।

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. कोल्ला श्रीदेवी, प्रभारी अधिकारी, संस्थान महिला प्रकोष्ठ एवं आंतरिक समिति द्वारा स्वागत भाषण से हुई, जिसके बाद दीप प्रज्वलन किया गया। अपने संबोधन में डॉ. एस. एन. सुशील ने कृषि क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण के महत्व पर प्रकाश डाला, कार्यस्थलों पर लैंगिक समानता पर जोर दिया तथा संस्थान में महिला कर्मचारियों के समर्पण और योगदान की सराहना की।

ICAR–National Bureau of Agricultural Insect Resources, Bengaluru  International Women’s Day was celebrated at ICAR–National Bureau of Agricultural Insect Resources, Bengaluru, with Prof. Geetha Bali, Former Vice-Chancellor, Karnataka State Akkamahadevi Women’s University, Vijayapura, as the Chief Guest and Dr S. N. Sushil, Director, ICAR–NBAIR, presiding over the function.  The programme began with a welcome address by Dr Kolla Sreedevi, Officer In-Charge, Institute Women’s Cell and Internal Committee, followed by the ceremonial lighting of the lamp. In his remarks, Dr S. N. Sushil highlighted the importance of women’s empowerment in agriculture, emphasizing gender equity in workplaces and acknowledging the dedication and contributions of women staff to the institute.  In her address, Prof. Geetha Bali highlighted the crucial role of women in agriculture and encouraged them to confidently address personal and professional challenges. Referring to the theme “Give to Gain,” she urged all staff to strive for excellence for the benefit of the organisation and the nation.  During the programme, women farmers were felicitated for their contributions. The event witnessed the participation of 68 members, including scientists, students, administrative and supporting staff, along with five women farmers, of which 44 participants were women.

अपने वक्तव्य में प्रो. गीता बाली ने कृषि में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया और उन्हें व्यक्तिगत एवं पेशेवर चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना करने के लिए प्रेरित किया। “देने से प्राप्त होता है”  थीम का उल्लेख करते हुए उन्होंने सभी कर्मचारियों से संगठन और राष्ट्र के हित में उत्कृष्टता प्राप्त करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान महिला किसानों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इस आयोजन में वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों, प्रशासनिक एवं सहायक कर्मचारियों सहित कुल 68 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें 5 महिला किसान शामिल थीं और कुल 44 प्रतिभागी महिलाएं थीं।

भाकृअनुप–केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोवा

मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि महिलाएं शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य सेवा, उद्यमिता और नेतृत्व जैसे विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं।

प्रतिभागियों को अपनी क्षमता को पहचानने, शिक्षा और कौशल विकास को अपनाने तथा निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया गया, ताकि एक प्रगतिशील और समावेशी समाज के निर्माण में योगदान दिया जा सके।

स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि ने भी सभा को संबोधित करते हुए सामुदायिक विकास और सामाजिक कल्याण गतिविधियों में महिलाओं के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। ग्रामीण महिलाओं को शिक्षा, जागरूकता और आजीविका गतिविधियों में भागीदारी के माध्यम से सशक्त बनाने के महत्व पर बल दिया गया, साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और गांवों में सामाजिक समरसता बनाए रखने में उनकी अहम भूमिका को स्वीकार किया गया।

ICAR-Central Coastal Agricultural Research Institute, Goa  The distinguished chief guest, highlighted the vital role of women in the development of families, society, and the nation. In the address, it was noted that women are increasingly excelling across diverse fields such as education, agriculture, healthcare, entrepreneurship, and leadership.   Participants were encouraged to recognise their potential, pursue education and skill development, and actively engage in decision-making processes to contribute to a progressive and inclusive society.  The local Panchayat representative also addressed the gathering and appreciated the significant contributions of women in community development and social welfare initiatives. Emphasis was placed on the importance of empowering rural women through education, awareness, and participation in livelihood activities, recognising their crucial role in strengthening rural economies and maintaining social harmony in villages.  As part of the programme, several cultural and participatory activities were organised, including a cooking competition and a traditional hair garland–making competition, encouraging active involvement and community engagement among women. Additionally, frontline healthcare professionals from the local community were felicitated in recognition of their dedicated service in safeguarding public health and providing compassionate care.  A total of 86 women from the village and nearby areas participated in the event, making the celebration meaningful, engaging, and inspiring.

कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न सांस्कृतिक एवं सहभागिता आधारित गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिनमें पाक प्रतियोगिता तथा पारंपरिक फूलों की वेणी (हेयर गारलैंड) बनाने की प्रतियोगिता शामिल थीं, जिससे महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और सामुदायिक जुड़ाव को बढ़ावा मिला। इसके अतिरिक्त, स्थानीय समुदाय की अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों को जन स्वास्थ्य की रक्षा और संवेदनशील सेवा प्रदान करने में उनके समर्पित योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

इस कार्यक्रम में गांव तथा आसपास के क्षेत्रों से कुल 86 महिलाओं ने भाग लिया, जिससे यह आयोजन सार्थक, प्रेरणादायक और सहभागितापूर्ण बना।

(स्रोत: विभिन्न भाकृअनुप संस्थान)

×