13 अक्टूबर, 2026, तिरुवनंतपुरम
भाकृअनुप-केन्द्रीय कंद फसल अनुसंधान संस्थान, तिरुवनंतपुरम के फसल उपयोग अनुभाग की प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अलुम्मोट्टिल एन. ज्योति को प्रतिष्ठित स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय–एल्सेवियर वैश्विक रैंकिंग में खाद्य विज्ञान के क्षेत्र में विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल किया गया है। उन्होंने 2024 से 2026 तक लगातार तीन वर्षों तक करियर-दीर्घ वैज्ञानिक प्रभाव सूची में स्थान हासिल किया है, जो वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचार में उनके निरंतर योगदान को दर्शाता है।
मानकीकृत उद्धरण संकेतकों और वैज्ञानिक प्रभाव पर आधारित यह रैंकिंग उन शोधकर्ताओं को मान्यता देती है, जिन्होंने अपने-अपने विषयों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। डॉ. ज्योति को कृषि, मत्स्य पालन और वानिकी के व्यापक विषय के अंतर्गत खाद्य विज्ञान उप-क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर 1,811वां स्थान मिला है।
27 वर्षों से अधिक के अनुसंधान अनुभव के साथ डॉ. ज्योति ने कटाई-उपरांत प्रौद्योगिकी, फसल उपयोग और उष्णकटिबंधीय कंद फसलों के मूल्य संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्रों में कसावा स्टार्च रसायन एवं संशोधन, फंक्शनल और रेजिस्टेंट स्टार्च, हाइड्रोजेल, सुपरएब्जॉर्बेंट पॉलिमर, बायोएक्टिव यौगिक तथा औद्योगिक और जैव-चिकित्सकीय अनुप्रयोगों के लिए स्टार्च-आधारित सामग्रियों का विकास शामिल है। उनके अनुसंधान ने उष्णकटिबंधीय कंद फसलों के सतत उपयोग और उच्च-मूल्य वाले उत्पादों के उत्पादन के लिए नवोन्मेषी प्रौद्योगिकियों के विकास में योगदान दिया है।

डॉ. ज्योति ने 1995 में महात्मा गांधी विश्वविद्यालय से अनुप्रयुक्त रसायन विज्ञान में एम.एससी. और 2006 में केरल विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने 175 से अधिक वैज्ञानिक प्रकाशन लिखे हैं, जिनमें 65 समकक्ष-समीक्षित शोध पत्र और आठ पुस्तक अध्याय शामिल हैं। उनके शोध प्रकाशनों को 2,700 से अधिक उद्धरण प्राप्त हुए हैं तथा उनका गूगल स्कॉलर एच-इंडेक्स 30 और आई10-इंडेक्स 45 है। उन्होंने छह पीएच.डी. शोधार्थियों का मार्गदर्शन भी किया है और कई संस्थागत तथा बाह्य वित्तपोषित अनुसंधान परियोजनाओं में योगदान दिया है।
उनके वैज्ञानिक योगदान की मान्यता में डॉ. ज्योति को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए हैं, जिनमें कसावा और शकरकंद से रासायनिक रूप से संशोधित रेजिस्टेंट स्टार्च से संबंधित प्रौद्योगिकियों के लिए आईसीएआर टीम रिसर्च अवार्ड (2014) और भाकृअनुप टेक्नोलॉजी सर्टिफिकेट (2024) शामिल हैं। उनकी अन्य विशिष्ट उपलब्धियों में डॉ. जी. रंगास्वामी मेमोरियल यंग साइंटिस्ट अवार्ड (2011), एमएस ल्यूसिड कोलॉइड्स लिमिटेड अवार्ड (2009) और अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण के लिए एनएआईपी फेलोशिप (2012) शामिल हैं। वर्ष 2025 में उन्हें इंडियन सोसाइटी फॉर रूट क्रॉप्स (आईएसआरसी) का फेलो भी चुना गया।
अपनी अनुसंधान उपलब्धियों के अलावा, डॉ. ज्योति ने वैज्ञानिक प्रकाशन और व्यावसायिक गतिविधियों में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने 2023–2026 के दौरान जर्नल ऑफ रूट क्रॉप्स की मुख्य संपादक के रूप में कार्य किया है और उष्णकटिबंधीय जड़ एवं कंद फसल अनुसंधान में वैज्ञानिक ज्ञान के प्रसार में योगदान दिया है।
लगातार तीन वर्षों तक विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की सूची में उनका शामिल होना उनकी निरंतर वैज्ञानिक उत्कृष्टता की महत्वपूर्ण मान्यता है और यह उष्णकटिबंधीय कंद फसलों में अनुसंधान, नवाचार और मूल्य संवर्धन को आगे बढ़ाने में भाकृअनुप-सीटीसीआरआई के योगदान को भी रेखांकित करता है। यह उपलब्धि सतत कृषि, पोषण सुरक्षा और नवोन्मेषी फसल-आधारित प्रौद्योगिकियों के विकास को बढ़ावा देने के लिए संस्थान के निरंतर प्रयासों को मान्यता दिलाती है।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय कंद फसल अनुसंधान संस्थान, तिरुवनंतपुरम)







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