भाकृअनुप-सीसीएआरआई के अन्तर्गत केवीके, नॉर्थ गोवा द्वारा सतत कृषि के लिए एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) पर कार्यक्रम का आयोजन

भाकृअनुप-सीसीएआरआई के अन्तर्गत केवीके, नॉर्थ गोवा द्वारा सतत कृषि के लिए एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) पर कार्यक्रम का आयोजन

27 अप्रैल, 2026, गोवा

भाकृअनुप–केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान के अंतर्गत भाकृअनुप–कृषि विज्ञान केन्द्र, नॉर्थ गोवा, ने आज तिसवाड़ी तालुका के तिवरेम गांव में “सतत कृषि के लिए एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन” विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर राष्ट्रीय जागरूकता अभियान के तहत आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों को जैविक और अजैविक पोषक तत्वों के संतुलित एवं कुशल उपयोग के महत्व के प्रति जागरूक करना था, ताकि मृदा उर्वरता बनाए रखी जा सके, फसल उत्पादकता बढ़ाई जा सके और सतत कृषि को बढ़ावा दिया जा सके।

किसानों को गोवा की लैटराइट मिट्टी, अम्लीय परिस्थितियों और भारी मानसूनी वर्षा के संदर्भ में वार्षिक एवं बहुवर्षीय फसलों की उत्पादकता बनाए रखने में एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि धान, सब्जियों, दलहनी फसलों, मक्का, फिंगर मिलेट तथा चारा फसलों में भारी वर्षा के कारण पोषक तत्वों का नुकसान होता है और उर्वरकों की दक्षता कम हो जाती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग के साथ-साथ गोबर खाद, कम्पोस्ट, वर्मी-कंपोस्ट, हरी खाद, फसल अवशेष पुनर्चक्रण तथा जैव उर्वरकों के उपयोग पर जोर दिया, जिससे मृदा स्वास्थ्य एवं फसल उत्पादन में सुधार होता है।

Integrated Nutrient Management for Sustainable Agriculture Organized by ICAR-CCARI, KVK North Goa

धान की खेती में सेसबेनिया हरी खाद, अजोला का समावेशन और उर्वरकों का विभाजित प्रयोग मृदा उर्वरता बढ़ाने और उर्वरक निर्भरता कम करने में सहायक होते हैं, जबकि सब्जियों और दलहनी फसलों में आईएनएम से फसल की गुणवत्ता एवं लाभप्रदता में वृद्धि होती है। नारियल, काजू तथा मसालों जैसी बहुवर्षीय फसलों में हरी पत्ती खाद, मल्चिंग और जैविक अवशेषों का पुनर्चक्रण वर्षा आधारित परिस्थितियों में मृदा नमी, सूक्ष्मजीव गतिविधि और पोषक तत्व उपलब्धता में सुधार करता है।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि आईएनएम जलवायु अनुकूलता को बढ़ाता है, पर्यावरण प्रदूषण को कम करता है और गोवा में दीर्घकालिक खाद्य एवं आजीविका सुरक्षा के लिए सतत कृषि को समर्थन देता है।

संवादात्मक सत्र के दौरान किसानों ने अपने खेत-स्तरीय समस्याओं पर चर्चा की तथा पोषक तत्व प्रबंधन एवं मृदा स्वास्थ्य सुधार के लिए विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया।

इस कार्यक्रम में कुल 16 प्रतिभागियों (5 पुरुष एवं 11 महिलाएं) ने भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोवा)

×