20 मार्च, 2026, महाराष्ट्र
भाकृअनुप–केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-सीसीएआरआई), गोवा, ने आज महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले के मालवन स्थित किरलोस में ‘वैज्ञानिक बकरी पालन’ विषय पर एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया।
यह कार्यक्रम संस्थान की अनुसूचित जाति उप-योजना (एससीएसपी) के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य संसाधन-गरीब परिवारों के लिए उन्नत एवं वैज्ञानिक बकरी पालन पद्धतियों को अपनाकर आजीविका के अवसरों को बढ़ाना था। इस कार्यक्रम का आयोजन भाकृअनुप–कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), किरलोस, सिंधुदुर्ग जिला, महाराष्ट्र, के सहयोग से किया गया।

तकनीकी सत्रों के दौरान बकरी के बच्चों (किड्स), गर्भित एवं दुग्ध उत्पादन करने वाली बकरियों के वैज्ञानिक प्रबंधन पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसमें उचित आवास व्यवस्था, संतुलित आहार तथा नियमित वैज्ञानिक प्रबंधन पद्धतियों पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही, उत्पादकता तथा लाभप्रदता बढ़ाने के लिए रिकॉर्ड संधारण तथा जैव-सुरक्षा उपायों के महत्व को भी रेखांकित किया गया।
विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य प्रबंधन पर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी, जिसमें बकरियों में होने वाले सामान्य रोग, टीकाकरण कार्यक्रम, कृमिनाशक (डिवॉर्मिंग) तथा स्वच्छता संबंधी उपाय शामिल थे, जिनका उद्देश्य मृत्यु दर को कम करना एवं जीवित रहने की दर को बढ़ाना है। इसके अतिरिक्त, ‘कोंकण कन्याल’ बकरी नस्ल पर व्याख्यान दिया गया तथा चारा एवं आहार प्रबंधन से संबंधित जानकारी भी प्रदान की गई।
कार्यक्रम के अंतर्गत इनपुट सहायता पहल के तहत 29 लाभार्थी किसानों के बीच कुल 15 बकरियों का वितरण किया गया, ताकि वैज्ञानिक बकरी पालन को बढ़ावा दिया जा सके और गांव स्तर पर बकरी आधारित आजीविका प्रणाली को सुदृढ़ किया जा सके।

कार्यक्रम का समापन एक संवादात्मक चर्चा सत्र के साथ हुआ, जिसमें किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और बकरी प्रबंधन से संबंधित अपनी शंकाओं का समाधान किया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 29 अनुसूचित जाति किसानों, जिनमें 13 महिलाएं और 16 पुरुष शामिल थे, ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोवा)







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