20–21 मार्च, 2026, मुंबई
भाकृअनुप–केन्द्रीय मत्स्य शिक्षा संस्थान (भाकृअनुप-सिफे), मुंबई तथा भाकृअनुप–भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-आएएसआरआई), नई दिल्ली, द्वारा “किसान सारथी 2.0: संवर्धन, संचालन, रखरखाव एवं समर्थन” परियोजना के अंतर्गत किसान एवं मछुआरा मेला आयोजित किया गया। इस परियोजना को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप), इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) तथा डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन (डीआईसी), नई दिल्ली, द्वारा समर्थन एवं वित्तपोषण प्राप्त है।
यह दो दिवसीय कार्यक्रम भाकृअनुप–सिफे, मुंबई, में आयोजित किया गया, जिसमें 20 मार्च, 2026 को संस्थान के कर्मचारी एवं छात्र तथा 21 मार्च, 2026 को मछुआरे, मछुआरिनें, मछली विक्रेता, मत्स्य पालक और अन्य हितधारकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य संस्थागत सदस्यों तथा जमीनी स्तर के समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करते हुए ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना तथा अनुसंधान, प्रौद्योगिकी तथा क्षेत्रीय अनुप्रयोग के बीच संबंध को मजबूत करना था।

कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत संबोधन से हुई, जिसमें प्रतिभागियों का परिचय कराया गया एवं “किसान सारथी” पहल के महत्व पर प्रकाश डाला गया। इसके बाद “किसान सारथी 2.0” प्लेटफॉर्म के उद्देश्यों, विशेषताओं और लाभों पर विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही, डिजिटल पहलों की भूमिका पर जोर दिया गया, जो मछली पालकों और मछुआरों को वैज्ञानिक ज्ञान और तकनीक तक पहुंच प्रदान कर सशक्त बनाती हैं।
दो दिवसीय कार्यक्रम में कुल 500 प्रतिभागियों ने भाग लिया। पहले दिन लगभग 300 प्रतिभागियों, जिनमें कर्मचारी, छात्र, शोधकर्ता, शिक्षाविद तथा सहयोगी संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल थे, ने भौतिक एवं ऑनलाइन माध्यम से भाग लिया, जिससे व्यापक प्रतिनिधित्व और ज्ञान विनिमय सुनिश्चित हुआ।
दूसरे दिन महाराष्ट्र के विभिन्न तटीय जिलों से आए 125 मछुआरों, मछुआरिनों और मत्स्य पालकों ने भाग लिया, जो कैप्चर फिशरी, जलाशय मत्स्य पालन, सजावटी मछली पालन, मछली विक्रय एवं प्रसंस्करण से जुड़े थे। इसके अतिरिक्त, 75 अन्य प्रतिभागियों, जिन्हें संस्थागत प्रतिनिधि, शिक्षाविद् तथा परियोजना टीम के सदस्य शामिल थे, ने चर्चाओं में योगदान दिया।
किसान सारथी ऐप और पोर्टल से संबंधित जानकारीपूर्ण सामग्री अंग्रेजी, मराठी और हिंदी भाषाओं में वितरित की गई, जिससे शैक्षणिक और मत्स्य समुदाय के हितधारकों को प्लेटफॉर्म के लाभों को समझने और उपयोग करने में सुविधा मिली। इस पहल ने प्रौद्योगिकी को जमीनी स्तर के समुदायों से जोड़ने के महत्व को रेखांकित किया, जिससे ज्ञान साझा करने, समस्याओं के समाधान और आजीविका के अवसरों में वृद्धि हो सके।
मछुआरा प्रतिनिधियों ने समय पर जानकारी तक पहुंच, संस्थागत संपर्कों को मजबूत करने तथा सतत आजीविका को समर्थन देने में डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका पर प्रकाश डाला। साथ ही, मछुआरों द्वारा सामना की जाने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा की गई और विशेषज्ञों एवं मत्स्य समुदाय के बीच अंतर को पाटने हेतु समय पर सलाह और डिजिटल सहायता की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

दोनों दिनों के तकनीकी सत्रों में संवादात्मक चर्चाएं, विस्तृत प्रस्तुतियां तथा किसान सारथी पोर्टल एवं मोबाइल एप्लिकेशन के लाइव प्रदर्शन शामिल थे। प्रतिभागियों को ऐप डाउनलोड करने, पंजीकरण करने और प्रश्न पूछने की प्रक्रिया के बारे में मार्गदर्शन दिया गया तथा इसकी विशेषताओं का व्यावहारिक अनुभव भी कराया गया। मत्स्य क्षेत्र के लिए विकसित विशेष डोमेन प्रस्तुत किए गए और प्लेटफॉर्म को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रतिभागियों से सुझाव भी प्राप्त किए गए।
कार्यक्रम को बहुभाषी माध्यम में आयोजित किया गया, जिससे सभी प्रतिभागियों के लिए समावेशिता और बेहतर समझ सुनिश्चित हो सकी। आयोजन टीम के प्रभावी समन्वय, सक्रिय सहभागिता और सफल ज्ञान प्रसार के साथ कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय मत्स्य शिक्षा संस्थान, मुंबई)







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