28-29 मई, 2026, हैदराबाद
भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-क्रिडा), हैदराबाद, की XXXIV अनुसंधान सलाहकार समिति (आरएसी) बैठक 28–29 मई, 2026 को संस्थान में हाइब्रिड मोड में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता आरवीएसकेवीवी, ग्वालियर के कुलपति डॉ. अरविंद कुमार शुक्ल ने की।
बैठक में आरएसी सदस्यों के रूप में डॉ. जगदीश राणे, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएएच, बीकानेर; डॉ. एम.ए. शंकर, पूर्व अनुसंधान निदेशक, यूएएस, बेंगलुरु; डॉ. सी.आर. मेहता, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएई, भोपाल; डॉ. यादविंदर सिंह, पूर्व विभागाध्यक्ष, मृदा विभाग, पीएयू, लुधियाना; डॉ. शालंदर कुमार, उप वैश्विक अनुसंधान कार्यक्रम निदेशक, भाकृअनु; तथा डॉ. ए. वेलमुरुगन, सहायक महानिदेशक (एस एंड डब्ल्यूएम), भाकृअनुप सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

अध्यक्ष एवं आरएसी सदस्यों का स्वागत करते हुए डॉ. वी.के. सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-सीआरआईडीए, ने संस्थान की प्रमुख अनुसंधान उपलब्धियों तथा यहां चल रही पहलों तथा देश के शुष्कभूमि क्षेत्रों में लघुधारक किसानों की आजीविका सुधारने में संस्थान के योगदान का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया।
डॉ. के.ए. गोपीनाथ, सदस्य सचिव, ने पिछली XXXIII आरएसी बैठक की अनुशंसाओं पर की गई कार्रवाई प्रतिवेदन (एटाआर) प्रस्तुत किया, जिसे समिति द्वारा अनुमोदित किया गया।
विचार-विमर्श के दौरान अध्यक्ष ने वर्षा आधारित कृषि अनुसंधान में भाकृअनुप-क्रिडा, एआईसीआरपीडीए तथा एआईसीआरपीएएम के योगदान की सराहना की और कहा कि जलवायु, मौसम तथा जल शुष्कभूमि कृषि की प्रमुख चुनौतियाँ हैं, जिनके समाधान हेतु केन्द्रित एवं प्राथमिकता आधारित अनुसंधान हस्तक्षेपों की आवश्यकता है। उन्होंने रासायनिक आदानों के अत्यधिक उपयोग को कम करने की आवश्यकता पर भी बल दिया तथा भाकृअनुप तथा आईसीएमआर द्वारा संयुक्त रूप से प्रारंभ की गई ‘सेहत (SEHAT - Science Excellence for Health through Agricultural Transformation)’ पहल के महत्व को रेखांकित किया।
आरएसी सदस्यों ने भविष्य के अनुसंधान कार्यक्रमों को सुदृढ़ बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। डॉ. एम.ए. शंकर ने जलवायु अनुकूल प्रौद्योगिकियों, कृषि वानिकी प्रणालियों तथा प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन रणनीतियों के विकास के लिए एआईसीआरपीडीए और एआईसीआरपीएएम के बीच बेहतर सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।

डॉ. शालंदर कुमार ने भाकृअनुप-आईआईएफएसआर, मोदीपुरम के सहयोग से एकीकृत कृषि प्रणालियों के विकास और विस्तार के लिए लैंडस्केप दृष्टिकोण अपनाने का सुझाव दिया।
डॉ. सी.आर. मेहता ने इंजीनियरिंग हस्तक्षेपों के माध्यम से संसाधन उपयोग दक्षता बढ़ाने के महत्व पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ. यादविंदर सिंह ने संस्थान द्वारा विकसित प्रमुख प्रौद्योगिकियों के लाभ-लागत अनुपात का मूल्यांकन करने की अनुशंसा की।
डॉ. जगदीश राणे ने फसल सुधार कार्यक्रमों को प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन पहलों के साथ एकीकृत करने का सुझाव दिया, जबकि डॉ. ए. वेलमुरुगन ने उपयुक्त कृत्रिम मेधा (AI) और मशीन लर्निंग मॉडल विकसित करने के लिए सीआरआईडीए, एआईसीआरपीडीए, एआईसीआरपीएएम तथा निकरा (निक्रा) कार्यक्रमों से व्यापक डाटाबेस तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया।
आरएसी सदस्यों ने संस्थान के अनुसंधान फार्मों का भी दौरा किया तथा वैज्ञानिकों के साथ संवाद कर चल रही अनुसंधान गतिविधियों और क्षेत्र स्तर के नवाचारों की समीक्षा की।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)







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