भाकृअनुप–सीआईएफए, भुवनेश्वर ने 39वां वार्षिक दिवस का किया आयोजन

भाकृअनुप–सीआईएफए, भुवनेश्वर ने 39वां वार्षिक दिवस का किया आयोजन

1 अप्रैल, 2026, भुवनेश्वर

भाकृअनुप-केन्द्रीय मीठा जल जलीय कृषि संस्थान, भुवनेश्वर, ओडिशा, ने आज अपने कौशल्य गंगा परिसर में 39वां वार्षिक दिवस मनाया। वर्ष 1987 भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में के अंतर्गत स्थापित यह संस्थान देश में मीठे पानी की जलीय कृषि अनुसंधान का एक प्रमुख केंद्र है, जो वैज्ञानिक नवाचारों को जमीनी स्तर तक पहुँचाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को निरंतर सुदृढ़ कर रहा है।

मुख्य अतिथि के रूप में ए. पी. दाश,, पूर्व कुलपति, तमिलनाडु केन्द्रीय विश्वविद्यालय ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। उन्होंने संस्थान को 39 वर्षों की उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए बधाई दी और जलीय कृषि क्षेत्र में इसके महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अनुसंधान, प्रकाशनों और पेटेंट्स के साथ-साथ संस्थान ने तकनीकों का प्रभावी प्रसार समाज तक सुनिश्चित किया है। उन्होंने विशेष रूप से वंचित समुदायों के क्षमता निर्माण, उद्यमिता संवर्धन और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने की पहल की प्रशंसा की।

ICAR-CIFA, Bhubaneswar Celebrates 39th Annual Day

डॉ. जे.के. जेना, उप-महानिदेशक (मत्स्य विज्ञान एवं कृषि शिक्षा), भाकृअनुप ने क्षेत्रीय विकास के लिए सामूहिक आत्ममंथन और योगदान की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने 2047 तक 34 मिलियन टन मछली उत्पादन के राष्ट्रीय लक्ष्य, जिसमें 25 मिलियन टन मीठे पानी की जलीय कृषि से अपेक्षित है, का उल्लेख करते हुए सभी हितधारकों से चुनौतियों को अवसर में बदलने और एक सशक्त एवं भविष्य के लिए तैयार भाकृअनुप–सीआईएफए के निर्माण का आह्वान किया।

प्रदीप कुमार राउत, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, ओडिशा कंप्यूटर एप्लीकेशन सेंटर, ओडिशा सरकार, ने कहा कि वार्षिक दिवस पूर्व कर्मचारियों के योगदान को सम्मानित करने का एक मंच भी है। उन्होंने भाकृअनुप–सीआईएफए और ओसीएसी के बीच सहयोग से विकसित “सॉवरेन एआई फ्रेमवर्क” का उल्लेख किया, जो किसानों के लिए आवश्यकता-आधारित परामर्श सेवाएं, रोग पूर्वानुमान और जल गुणवत्ता निगरानी प्रदान करने हेतु विकसित किया जा रहा है।

ICAR-CIFA, Bhubaneswar Celebrates 39th Annual Day

कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. पी.के. साहू, निदेशक, भाकृअनुप–सीआईएफए ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा वर्ष 2025–26 की प्रमुख उपलब्धियों को प्रस्तुत किया। इनमें उन्नत मछली प्रजातियों जैसे AhR जयन्ती, अमृत कतला और भाकृअनुप-सीआईएफए जीआई स्कैम्पी का प्रसार; जलवायु-सहिष्णु जलीय कृषि तकनीकों जैसे बायोफ्लॉक, रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) और एक्वापोनिक्स में प्रगति; उच्च मूल्य प्रजातियों की विविधता; तथा संकटग्रस्त मछलियों के संरक्षण हेतु नदी पुनर्स्थापन (रिवर रैंचिंग) जैसी पहलें शामिल हैं। उन्होंने नवाचार, नई तकनीकों, पेटेंट, बाह्य वित्तपोषित परियोजनाओं, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों और आजीविका समर्थन पहलों में हुई प्रगति को भी रेखांकित किया।

इस अवसर पर गणमान्य अतिथियों ने आठ प्रकाशनों और दो प्रोटोटाइप—तालाबों के लिए “कैस्केड एरेटर” तथा तालाब-आधारित एक्वापोनिक्स के लिए “फ्लोटिंग राफ्ट सिस्टम”—का विमोचन किया। कार्यक्रम में आईसीएआर के प्रमुख संस्थानों, राज्य एजेंसियों, शैक्षणिक संस्थानों और आईसीएआर–सीआईएफए के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय मीठे पानी की जलीय कृषि संस्थान, भुवनेश्वर, ओडिशा)

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