22-23 मार्च, 2026, बैरकपुर
भाकृअनुप–केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीआईएफआऱआई) की अनुसंधान सलाहकार समिति (आरएसी) की बैठक आज भाकृअनुप– शीत जल मत्स्य अनुसंधान निदेशालय (डीसीएफआर), भीमताल, के सहयोग से आयोजित की गई।
इस बैठक में कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिनमें डॉ. अतुल कुमार सिंह, पूर्व निदेशक, भाकृअनुप-डीसीएफआर, भीमताल; डॉ. कृष्णा श्रीनाथ, पूर्व निदेशक, भाकृअनुप-सीआईडब्ल्यूए, भुवनेश्वर; तथा डॉ. देविका पिल्लई, सहायक महानिदेशक (इनलैंड फिशरीज), भाकृअनुप शामिल थीं, जिन्होंने वर्चुअल माध्यम से बैठक में भाग लिया।

डॉ. प्रदीप डे, निदेशक (अतिरिक्त प्रभार), भाकृअनुप-सिफरी ने पिछली आरएसी बैठक के बाद की प्रमुख उपलब्धियों को प्रस्तुत किया। उन्होंने खुले जल की मत्स्य पालन प्रणाली में प्रगति, नदी और जलाशय प्रबंधन को सुदृढ़ करने, स्टॉक आकलन में सुधार, जैव विविधता संरक्षण तथा हितधारकों के सशक्तिकरण पर प्रकाश डाला। उन्होंने ड्रोन और सेंसर आधारित प्रणालियों जैसी जलवायु-सहिष्णु तकनीकों के उपयोग के माध्यम से संस्थान की अग्रणी भूमिका को रेखांकित किया, जो ब्लू इकोनॉमी और वन हेल्थ ढांचे के अनुरूप है तथा सतत विकास लक्ष्यों—जैसे पारिस्थितिक स्थिरता, पोषण सुरक्षा, लैंगिक समानता और आजीविका संवर्धन—में योगदान देता है।
डॉ. अरुण पंडित, सदस्य सचिव, आरएसी ने पिछली बैठक की सिफारिशों पर की गई कार्यवाही की रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत की। विभिन्न प्रभागों और क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्रों के प्रमुखों ने भी अंतर्देशीय मत्स्य संसाधन, पारिस्थितिकी तंत्र निगरानी तथा मछुआरों की आजीविका उन्नयन से संबंधित प्रमुख उपलब्धियों, चल रहे अनुसंधान कार्यक्रमों और विकसित तकनीकों को साझा किया।
आरएसी बैठक के साथ-साथ विश्व जल दिवस 2026 का भी आयोजन किया गया, जिसमें ‘जल और लैंगिक समानता के बीच सेतु निर्माण’ पर विशेष ध्यान दिया गया। इस अवसर पर भाकृअनुप-शिफरी द्वारा महिलाओं को केन्द्र में रखकर ब्लू इकोनॉमी और विकसित भारत @2047 के लिए किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित किया गया, जिसमें अध्यक्ष और सदस्यों की भागीदारी रही।

बैठक के दौरान ड्रोन, जिसमें एक अंडरवाटर ड्रोन भी शामिल था, का प्रदर्शन किया गया। आरएसी टीम ने वैज्ञानिकों के साथ बातचीत करते हुए इन तकनीकों के अंतर्देशीय मत्स्य पालन में उपयोग और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की।
आरएसी के अध्यक्ष और सदस्यों ने संस्थान की अनुसंधान प्राथमिकताओं को और सुदृढ़ करने के लिए रणनीतिक सुझाव दिए, विशेष रूप से जलवायु-सहिष्णु मत्स्य पालन, जैव विविधता संरक्षण और साक्ष्य-आधारित नीति समर्थन के क्षेत्रों में। समिति ने अनुसंधान कार्यक्रमों के प्रभाव आकलन के महत्व पर भी जोर दिया और सतत अंतर्देशीय मत्स्य विकास के लिए सहयोगात्मक एवं अंतःविषयक अनुसंधान दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
(स्रोत: भाकृअनुप–केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर)







फेसबुक पर लाइक करें
यूट्यूब पर सदस्यता लें
X पर फॉलो करना X
इंस्टाग्राम पर लाइक करें