21–27 अप्रैल, 2026, बैरकपुर
ग्रामीण परिवर्तन को विज्ञान-आधारित जलीय कृषि के माध्यम से तेज करने के उद्देश्य से आईसीएआर–केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीआईएफआरआई), बैरकपुर, ने नवादा जिले के किसानों के लिए अंतर्देशीय मत्स्य प्रबंधन पर एक प्रभावी क्षमता संवर्धन कार्यक्रम आयोजित किया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम (21–27 अप्रैल 2026) डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएफआरआई, एवं विभिन्न प्रभागों के प्रमुखों की उपस्थिति में प्रारंभ हुआ। अपने संबोधन में डॉ. डे ने अंतर्देशीय मत्स्य पालन की परिवर्तनकारी भूमिका को रेखांकित करते हुए इसे पोषण सुरक्षा, आजीविका विविधीकरण और रोजगार सृजन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि मत्स्य क्षेत्र का विकास किसानों की आय दोगुनी करने, प्रोटीन की उपलब्धता बढ़ाने और सतत एवं जलवायु-सहिष्णु संसाधन उपयोग को बढ़ावा देने जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति में अहम है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि क्षमता निर्माण किसानों को पारंपरिक जीविकोपार्जन आधारित पद्धतियों से बाजारोन्मुख, उद्यम-आधारित जलीय कृषि की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कार्यक्रम को परिणामोन्मुख दृष्टिकोण के साथ तैयार किया गया, जिसमें वैज्ञानिक प्रशिक्षण को क्षेत्रीय अनुभव (फील्ड एक्सपोजर) के साथ जोड़ा गया। प्रतिभागियों को तालाब-आधारित जलीय कृषि प्रणालियों, आहार एवं जल गुणवत्ता प्रबंधन, रोग जोखिम नियंत्रण, समेकित मत्स्य पालन (कंपोजिट फिश कल्चर), तथा वैज्ञानिक प्रजनन एवं बीज उत्पादन जैसे विषयों पर व्यापक प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही, जलवायु-सहिष्णु जलीय कृषि पद्धतियों, जल संसाधनों के कुशल उपयोग तथा उन्नत और विस्तार योग्य तकनीकों को अपनाने पर भी जोर दिया गया, जिससे उत्पादकता और लाभप्रदता में वृद्धि हो सके।
कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता फील्ड विजिट रही, जिसमें प्रतिभागियों को भाकृअनुप-सीआईएफए रहारा फार्म तथा विश्व प्रसिद्ध ईस्ट कोलकाता वेटलैंड्स में उन्नत जलीय कृषि प्रणालियों का अवलोकन कराया गया। इन दौरों ने एकीकृत एवं संसाधन-कुशल मत्स्य पालन के सफल मॉडलों की जानकारी दी, जिन्हें बिहार की कृषि-जलवायु परिस्थितियों में अपनाया जा सकता है।
इंटरैक्टिव सत्रों के माध्यम से वैज्ञानिकों और किसानों के बीच सीधा संवाद स्थापित हुआ, जिससे समस्याओं के समाधान और तकनीकों के स्थानीय अनुकूलन में सहायता मिली। प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया से कार्यक्रम की उपयोगिता और इसकी तत्काल उपयोगिता का संकेत मिला।
इस कार्यक्रम से नवादा जिले में मत्स्य उत्पादन बढ़ने, किसानों की आय में सुधार तथा आजीविका की स्थिरता मजबूत होने की अपेक्षा है, जिससे पूर्वी भारत में ब्लू इकोनॉमी के विकास को बढ़ावा मिलेगा।
यह पहल भाकृअनुप-सीआईएफआरआई की बहु-विषयक टीम के तकनीकी सहयोग से संचालित की गई, जो क्षमता निर्माण और प्रौद्योगिकी प्रसार के प्रति संस्थान की सुदृढ़ संस्थागत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
इस कार्यक्रम में 29 प्रगतिशील किसानों एवं ग्रामीण युवाओं ने भाग लिया, जिन्हें बिहार के मत्स्य क्षेत्र में परिवर्तन के अग्रदूत के रूप में तैयार किया गया।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर)







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