भाकृअनुप-सीआईबीए, चेन्नई ने तटीय कृषि समुदायों द्वारा खारे पानी की जलीय कृषि प्रौद्योगिकियों को अपनाने के अनुभव साझा करने पर कार्यशाला का किया आयोजन

भाकृअनुप-सीआईबीए, चेन्नई ने तटीय कृषि समुदायों द्वारा खारे पानी की जलीय कृषि प्रौद्योगिकियों को अपनाने के अनुभव साझा करने पर कार्यशाला का किया आयोजन

7 अगस्त, 2026, चेन्नई

भाकृअनुप–केन्द्रीय खारे पानी जलीय कृषि संस्थान (सीआईबीए), चेन्नई अनुसूचित जनजाति घटक (एसटीसी) और अनुसूचित जाति उप-योजना (एससीएसपी) जैसी योजनाओं का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन कर रहा है, जिनका उद्देश्य संसाधन-विहीन तटीय जलीय कृषकों और मत्स्य पालकों की आजीविका आय में सुधार करना है। इन योजनाओं के अंतर्गत आज “अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति लाभार्थियों द्वारा खारे पानी की जलीय कृषि प्रौद्योगिकियों को अपनाने के अनुभव साझा करना” विषय पर एक कार्यशाला आयोजित की गई।

डॉ. एम. कैलासम, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईबीए ने “तमिलनाडु में तटीय अनुसूचित जाति एवं जनजातीय परिवारों के सामाजिक विकास हेतु खारे पानी की जलीय कृषि प्रौद्योगिकियाँ” विषयक पुस्तक का विमोचन किया। उन्होंने तटीय समुदायों के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति किसानों की आजीविका आय में सुधार के लिए भाकृअनुप-सीआईबीए की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने एशियन सीबास (Lates calcarifer) की केज कल्चर, अन्य फिनफिश प्रजातियों जैसे पर्ल स्पॉट (Etroplus suratensis) और मिल्कफिश (Chanos chanos) का पालन, मड क्रैब (Scylla serrata) एवं सजावटी मछलियों की संस्कृति, तथा मछली अपशिष्ट से प्लैंकटनप्लस और हॉर्टीप्लस जैसे जैव-उत्पादों के उत्पादन जैसी प्रौद्योगिकियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये प्रौद्योगिकियाँ तकनीकी रूप से व्यवहार्य तथा लघु स्तर की खेती के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी हैं।

अनुभव-साझाकरण सत्रों के दौरान तिरुवल्लूर और चेंगलपट्टू जिलों के किसानों ने केकड़ा पालन, फिनफिश की केज कल्चर, खारे पानी की नहरों में सीबास नर्सरी पालन, सजावटी मछली पालन, मछली आहार प्रसंस्करण तथा तालाबों में मड क्रैब और ब्लू स्विमर क्रैब की संस्कृति से संबंधित अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने खारे पानी के जल निकायों में सीबास संस्कृति और केज पालन के अनुभव भी साझा किए। प्रतिभागियों ने भाकृअनुप-सीआईबीए प्रौद्योगिकियों को अपनाने से प्राप्त आर्थिक एवं अन्य लाभों के साथ-साथ इन प्रौद्योगिकियों के विस्तार में आने वाली बाधाओं पर भी चर्चा की।
 

एक केन्द्रित समूह चर्चा भी आयोजित की गई, जिसने वैज्ञानिकों और किसानों को परस्पर संवाद करने तथा सीआईबीए प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रीय प्रदर्शन पर चर्चा करने का अवसर प्रदान किया। इस दौरान विशेष रूप से उन बाधाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिनका सामना किसान इन प्रौद्योगिकियों को जारी रखने और उनके विस्तार में कर रहे हैं।

बाद में किसानों को “जलीय कृषि पर एल-नीनो का प्रभाव और सभी संबंधित पक्षों द्वारा अपनाए जाने वाले अनुकूलन उपाय” विषय पर जागरूक किया गया। इसमें जलीय कृषि पर एल-नीनो के संभावित प्रभावों तथा उससे जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक अनुकूलन उपायों पर प्रकाश डाला गया।

कार्यक्रम में तमिलनाडु के तिरुवल्लूर और चेंगलपट्टू जिलों के तटीय गांवों से कुल 40 अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अनुसूचित जाति (एससी) लाभार्थियों ने भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय खारे पानी जलीय कृषि संस्थान, चेन्नई)

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