भाकृअनुप-सीआईबीए, चेन्नई में ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत सतत उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए वैज्ञानिकों तथा किसानों को एक मंच पर लाया गया

भाकृअनुप-सीआईबीए, चेन्नई में ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत सतत उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए वैज्ञानिकों तथा किसानों को एक मंच पर लाया गया

27 जून, 2026, चेन्नई

भाकृअनुप-केन्द्रीय खारे पानी की जलीय कृषि संस्थान (भाकृअनुप-सीबा), चेन्नई, के काकद्वीप अनुसंधान केन्द्र (केआरसी) ने आज पश्चिम बंगाल के काकद्वीप में किसानों को “उर्वरकों के संतुलित उपयोग (खेत बचाओ अभियान)” के प्रति जागरूक करने के लिए किसान संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय तथा भाकृअनुप द्वारा शुरू की गई राष्ट्रव्यापी पहल के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य की रक्षा करना, वैज्ञानिक कृषि को बढ़ावा देना तथा रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग को कम करना है। कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य किसानों को भाकृअनुप-सीबा द्वारा विकसित नवीनतम तकनीकों जैसे प्लैंकटन प्लस और हॉर्टी प्लस के बारे में जागरूक करना था, जिन्हें रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में जैव उर्वरक के रूप में उपयोग किया जा सकता है। इस कार्यक्रम ने वैज्ञानिकों और किसानों के बीच संवाद का भी अवसर प्रदान किया, ताकि खेत स्तर की चुनौतियों का समाधान किया जा सके तथा उन्नत जलीय कृषि तकनीकों को अपनाने को बढ़ावा दिया जा सके।

पश्चिम बंगाल सरकार के सुंदरबन मामलों, भूमि एवं भूमि सुधार तथा शरणार्थी राहत एवं पुनर्वास राज्य मंत्री श्री दीपांकर जाना ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। मंत्री ने किसान हितैषी तकनीकों के विकास के लिए भाकृअनुप-सीबा के प्रयासों की सराहना की तथा विश्वास व्यक्त किया कि स्थानीय उद्यम के माध्यम से चिंगुड़ी प्लस के व्यावसायीकरण से किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण झींगा आहार की अधिक उपलब्धता सुनिश्चित होगी, ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा तथा पश्चिम बंगाल के तटीय क्षेत्रों में झींगा पालन की स्थिरता मजबूत होगी।

Khet Bachao Abhiyan Brings Scientists and Farmers Together for Sustainable Fertilizer Practices at ICAR-CIBA, Chennai

मंत्री ने केआरसी-सीबा परिसर में हिल्सा (टेनुअलोसा इलिशा) के केज प्रजनन के लिए अत्याधुनिक लवणता प्रवणता पुनर्चक्रण जलीय कृषि प्रणाली (आरएएस) का उद्घाटन किया। यह सुविधा भारत की आर्थिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मछली प्रजातियों में से एक हिल्सा के बंदी प्रजनन की तकनीक विकसित करने के उद्देश्य से एक अग्रणी अनुसंधान पहल के रूप में स्थापित की गई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सुविधा भविष्य में हिल्सा प्रजनन तकनीक में महत्वपूर्ण उपलब्धियों का मार्ग प्रशस्त करेगी, जिससे संरक्षण प्रयासों को समर्थन मिलेगा, मत्स्य उत्पादन में वृद्धि होगी तथा मत्स्य किसानों के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित होंगे।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने “प्लैंकटन प्लस एंड हॉर्टी प्लस - कृषि के लिए मछली अपशिष्ट आधारित जैव उर्वरक” शीर्षक से एक बंगाली प्रकाशन का विमोचन किया, जिसमें रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में मछली प्रसंस्करण अपशिष्ट के अभिनव उपयोग को प्रदर्शित किया गया है, जो पौधों एवं मृदा स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है।

मंत्री ने अनुसूचित जाति उप-योजना (एससीएसपी) एवं जनजातीय उप-योजना (टीएसपी) कार्यक्रमों के अंतर्गत आईसीएआर-सीआईबीए द्वारा चिंगुड़ी प्लस एवं प्लैंकटन प्लस के उपयोग से सतत झींगा पालन तथा प्लैंकटन प्लस के उपयोग से कम लवणता वाले कार्प पालन के सफल प्रदर्शनों के माध्यम से लाभार्थियों द्वारा अर्जित राजस्व हिस्सेदारी का भी विमोचन किया।

Khet Bachao Abhiyan Brings Scientists and Farmers Together for Sustainable Fertilizer Practices at ICAR-CIBA, Chennai

भाकृअनुप-सीबा तथा एम/एस टी.के. एंटरप्राइज, काकद्वीप, पश्चिम बंगाल के बीच चिंगुड़ी प्लस के व्यावसायिक उत्पादन एवं प्रसार के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। चिंगुड़ी प्लस स्थानीय रूप से उपलब्ध आहार सामग्री का उपयोग कर भाकृअनुप-सीबा द्वारा विकसित एक किफायती झींगा आहार तकनीक है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के अंतर्गत यह साझेदारी झींगा किसानों के बीच किफायती आहार तकनीकों को व्यापक रूप से अपनाने में सहायक होगी तथा क्षेत्र में ग्रामीण उद्यमिता को भी बढ़ावा देगी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए के डॉ. कुलदीप के. लाल, निदेशक, आईसीएआर-सीबा, ने तटीय पारिस्थितिक तंत्रों में सतत एवं जलवायु-सहिष्णु जलीय कृषि विकास के लिए संस्थान की पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने देश की कृषि उत्पादकता बनाए रखने के लिए मृदा स्वास्थ्य के संरक्षण के महत्व पर बल दिया तथा किसानों को भाकृअनुप-सीबा द्वारा विकसित जैव उर्वरकों के उपयोग के प्रति भी जागरूक किया।

कार्यक्रम में किसानों, मत्स्य पालकों, उद्यमियों, वैज्ञानिकों, लाइन विभागों के अधिकारियों, स्वयं सहायता समूहों के प्रतिनिधियों तथा जिले के विभिन्न भागों से आए अन्य हितधारकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय खारे पानी की जलीय कृषि संस्थान, चेन्नई)

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