10 फरवरी– 2 मार्च, 2026, भोपाल
भाकृअनुप-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान ने 10 फरवरी से 2 मार्च, 2026 तक “पूर्व एवं पश्च-उत्पादन कृषि-खाद्य प्रणालियों में स्वचालन हेतु एआई-आधारित स्पेक्ट्रोस्कोपिक एवं विज़न-आधारित दृष्टिकोण” विषय पर 21-दिवसीय भाकृअनुप प्रायोजित शीतकालीन विद्यालय का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं एवं प्रसार विशेषज्ञों की उन्नत सेंसिंग प्रौद्योगिकियों, स्पेक्ट्रोस्कोपी तथा एआई-आधारित उपकरणों में दक्षता को सुदृढ़ करना था। इस पाठ्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग तथा एमएटीएलएबी एवं पीवाईटीएचओएन के उपयोग से स्पेक्ट्रल एवं इमेज विश्लेषण हेतु एल्गोरिद्म विकास पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रतिभागियों को पूर्व एवं पश्च-उत्पादन कृषि में एआई के अनुप्रयोगों जैसे स्मार्ट सिंचाई प्रणाली, पोषक तत्व प्रबंधन, फसल तनाव पहचान तथा स्वचालित ग्रेडिंग प्रणालियों का प्रशिक्षण दिया गया। इन अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के एकीकरण से पारंपरिक कृषि पद्धतियों में दक्षता, सटीकता और स्थिरता बढ़ाते हुए परिवर्तन आने की अपेक्षा है।

उद्घाटन सत्र 10 फरवरी, 2026 को आयोजित किया गया, जिसमें डॉ. ए.के. सिंह, पूर्व उप-महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) एवं पूर्व कुलपति, आरवीएसकेवीवी, ग्वालियर, की उपस्थिति रही। अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय कृषि में स्पेक्ट्रोस्कोपी एवं प्रिसिजन फार्मिंग के उभरते महत्व पर प्रकाश डाला, जिससे इनपुट के सटीक एवं कुशल उपयोग को सुनिश्चित किया जा सके।
पूरे शीतकालीन विद्यालय के दौरान विशेषज्ञ सत्रों में स्पेक्ट्रोस्कोपी, प्रिसिजन कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा मशीन लर्निंग जैसे विषयों को शामिल किया गया। प्रतिभागियों ने माइक्रोकंट्रोलर के साथ सेंसर एकीकरण एवं एमएटीएलएबी तथा पीवाईटीएचओएन के माध्यम से प्रोग्रामिंग पर व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। व्यावहारिक अनुभव हेतु केन्द्रीय कृषि उपकरण प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान, बुधनी, का संस्थागत भ्रमण भी आयोजित किया गया।
समापन समारोह 2 मार्च, 2026 को आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता, डॉ. मोनोरंजन मोहंती, निदेशक, भाकृअनुप-भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल, ने की। उन्होंने कहा कि स्पेक्ट्रोस्कोपी एवं विज़न-आधारित प्रिसिजन प्रौद्योगिकियां भारतीय कृषि प्रणाली के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान को व्यवहार में लाने तथा प्रिसिजन कृषि में अपनी विशेषज्ञता को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया, जिससे भारतीय किसानों की लागत कम करने में योगदान दिया जा सके।

भाकृअनुप प्रायोजित शीतकालीन विद्यालय ‘पूर्व एवं पश्च-उत्पादन कृषि-खाद्य प्रणालियों में स्वचालन हेतु एआई-आधारित स्पेक्ट्रोस्कोपिक एवं विज़न-आधारित दृष्टिकोण’ का भाकृअनुप-सीआईएई, भोपाल, में समापन
डॉ. सी.आर. मेहता, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएई, ने उत्पादन एवं पश्च-उत्पादन प्रणालियों में स्पेक्ट्रोस्कोपी एवं प्रिसिजन कृषि के महत्व को रेखांकित किया, जिससे उन्नत उपकरणों एवं प्रौद्योगिकियों के माध्यम से इनपुट का सटीक प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।
प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया साझा की, जिसके पश्चात समापन सत्र में प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
इस शीतकालीन विद्यालय में 10 राज्यों एवं 12 विभिन्न विश्वविद्यालयों/संस्थानों से कुल 19 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल)







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