12 मार्च, 2026, नई दिल्ली
लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी, से भारतीय प्रशासनिक सेवा प्रशिक्षु अधिकारियों के दो बैचों ने अपने विंटर स्टडी टूर के अंतर्गत भाकृअनुप–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली, का दौरा किया। इस अध्ययन भ्रमण का उद्देश्य कृषि एवं ग्रामीण विकास क्षेत्र में कार्यरत प्रमुख संस्थानों के बारे में जानकारी प्रदान करना है।
पहले बैच ने 9 मार्च, 2026 को तथा दूसरे बैच ने 12 मार्च, 2026 को संस्थान का भ्रमण किया।

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. आर.एन. पडारिया, संयुक्त निदेशक (प्रसार), भाकृअनुप-आईएआरआई के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने प्रशिक्षुओं को संस्थान के बारे में जानकारी दी, जिसे “हरित क्रांति का केन्द्र” कहा जाता है और जो सतत खाद्य सुरक्षा अनुसंधान का एक प्रमुख केन्द्र है। उन्होंने संस्थान की ऐतिहासिक विरासत पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भाकृअनुप-आईएआरआई ने निरंतर अनुसंधान, नवाचार और प्रसार गतिविधियों के माध्यम से देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसानों का समर्थन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
डॉ. चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव, निदेशक, भाकृअनुप-आईएआरआई ने संस्थान की उपलब्धियों और सतत कृषि-खाद्य प्रणाली के निर्माण हेतु चल रही रणनीतिक पहलों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि संस्थान के विभिन्न प्रभाग और विभाग मिलकर ऐसी तकनीकों का विकास करते हैं जो किसानों के लिए लाभकारी हों, कृषि नीतियों को समर्थन दें और गरीबी उन्मूलन में योगदान करें।
उन्होंने आगे बताया कि संस्थान के अनुसंधान परिणाम सीधे किसानों को लाभ पहुंचा रहे हैं, जिनमें उन्नत फसल किस्में, आधुनिक कृषि तकनीकें और प्रभावी प्रसार सेवाएं शामिल हैं। उन्होंने पूसा कृषि विज्ञान मेला जैसी प्रमुख आउटरीच पहलों का भी उल्लेख किया, जिसमें हर वर्ष देशभर से एक लाख से अधिक किसान, छात्र और हितधारक भाग लेते हैं।
इस भ्रमण के दौरान आईएएस प्रशिक्षुओं ने संस्थान की विभिन्न महत्वपूर्ण सुविधाओं और फील्ड इकाइयों का दौरा किया। इनमें इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम (आईएफएस) मॉडल, सुरक्षित खेती प्रौद्योगिकी केन्द्र, सरसों एवं गेहूं के प्रयोगात्मक प्लॉट, रोबोटिक्स प्रयोगशाला, जलवायु परिवर्तन सुविधा, पूसा अमृत सरोवर तथा नानाजी देशमुख प्लांट फिनोमिक्स केंद्र शामिल थे। यहां उन्होंने उन्नत अनुसंधान अवसंरचना और कृषि प्रौद्योगिकियों के फील्ड प्रदर्शन को प्रत्यक्ष रूप से देखा।

इस भ्रमण ने प्रशिक्षुओं को नवीन कृषि अनुसंधान और सतत कृषि पद्धतियों का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान किया।
इस कार्यक्रम में डॉ. सी. विश्वनाथन, संयुक्त निदेशक (अनुसंधान); डॉ. अनुपमा सिंह, डीन एवं संयुक्त निदेशक (शिक्षा); डॉ. पी.एस. ब्रह्मानंद, परियोजना निदेशक, वाटर टेक्नोलॉजी सेंटर (डब्ल्यूटीसी); तथा सुरेश कुमार, वरिष्ठ रजिस्ट्रार एवं संयुक्त निदेशक (प्रशासन) सहित अन्य वैज्ञानिक भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रशिक्षुओं ने वैज्ञानिकों के साथ कृषि विकास, अनुसंधान प्रसार और किसान पहुंच से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की।
इस भ्रमण से प्रशिक्षुओं को नवीन कृषि अनुसंधान और सतत कृषि पद्धतियों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ। साथ ही, उसने भारत के कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने और किसानों की आजीविका सुधारने में राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान संस्थानों की भूमिका को समझने में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान की।
(स्रोत: भाकृअनुप–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली)







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