भाकृअनुप-राष्ट्रीय प्राकृतिक रेशा अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, कोलकाता ने “एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर जूट के पत्ते के निर्माण की प्रक्रिया, जो उपयोग के लिए तैयार जूट के पत्ते से बने पेय के लिए उपयुक्त है” नामक नवोन्मेषी प्रौद्योगिकी के लिए भारतीय पेटेंट संख्या 594436 प्राप्त करके बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह पेटेंट 06 जुलाई, 2026 को प्रदान किया गया।
“अमाता मोरोहेइया इन्फ्यूजन” के नाम से ब्रांडेड यह प्रौद्योगिकी कम उपयोग में आने वाली जूट की पत्तियों को मूल्यवर्धित, परिरक्षक-मुक्त हर्बल पेय में परिवर्तित करती है, जिससे पूरी फसल के उपयोग का एक नया मार्ग खुलता है। इस नवाचार को भाकृअनुप द्वारा प्रमाणित, ट्रेडमार्क-पंजीकृत और व्यावसायिक रूप से लाइसेंस प्राप्त भी किया गया है, जो वैज्ञानिक अनुसंधान को बाजार-उन्मुख उत्पाद में सफलतापूर्वक परिवर्तित करने को दर्शाता है।

भाकृअनुप-निनफेट के निदेशक ने इस उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए पूरी अनुसंधान टीम को बधाई दी और नवाचार, बौद्धिक संपदा सृजन तथा प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की।
यह प्रौद्योगिकी किसान उत्पादक कंपनियों के माध्यम से लगभग ₹350–₹400 प्रति किलोग्राम की दर से जूट की पत्तियों के लिए बाजार तैयार करके कृषक समुदाय में योगदान दे रही है, जिससे किसानों के लिए आय का एक अतिरिक्त स्रोत सृजित हो रहा है।
यह उपलब्धि “प्राकृतिक रेशे के अपशिष्ट से राष्ट्र की समृद्धि” के भाकृअनुप-निनफेट के संकल्प को प्रदर्शित करती है, जो वैज्ञानिक नवाचार को टिकाऊ ग्रामीण उद्यम और किसानों की समृद्धि में वृद्धि में परिवर्तित कर रहा है।
(स्रोत: भाकृअनुप-राष्ट्रीय प्राकृतिक रेशा अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, कोलकाता)







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