भाकृअनुप ने जमीनी नवाचार, उत्कृष्ट पारंपरिक ज्ञान और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए जीआईएएन और अर्पण सेवा संस्थान के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए

भाकृअनुप ने जमीनी नवाचार, उत्कृष्ट पारंपरिक ज्ञान और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए जीआईएएन और अर्पण सेवा संस्थान के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए

15 सितंबर 2026, नई दिल्ली

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) ने जमीनी नवाचार, पारंपरिक ज्ञान, प्रौद्योगिकी प्रसार और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए ग्रासरूट्स इनोवेशन ऑगमेंटेशन नेटवर्क (जीआईएएन) और अर्पण सेवा संस्थान, उदयपुर, राजस्थान के साथ दो समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया।

भाकृअनुप और जीआईएएन के बीच समझौता ज्ञापन पर डॉ. एम.एल. जाट, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप; डॉ. राजबीर सिंह, उप-महानिदेशक (कृषि विस्तार), भाकृअनुप; प्रो. अनिल के. गुप्ता (पूर्व प्रोफेसर, भाकृअनुप अहमदाबाद; उपाध्यक्ष, जीआईएएन; संस्थापक, एनआईएफ); डॉ. रंजय के. सिंह, एडीजी (विस्तार), भाकृअनुप; डॉ. आर. आर. बर्मन, सहायक महानिदेशक (विस्तार), भाकृअनुप; और डॉ. अनिल कुमार, एडीजी (तकनीकी समन्वय), भाकृअनुप की उपस्थिति में हस्ताक्षर किया गया।

ICAR Inks MoUs with GIAN & Arpan Seva Sansthan to Promote Grassroots Innovation, Outstanding Traditional Knowledge and Sustainable Agriculture

भाकृअनुप और जीआईएएन के बीच पांच वर्षीय सहयोग भाकृअनुप-कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) नेटवर्क के माध्यम से किसानों, ग्रामीण महिलाओं, ग्रामीण युवाओं, कारीगरों और अन्य ज्ञान धारकों के जमीनी नवाचारों और पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान की पहचान, दस्तावेजीकरण, सत्यापन और मुख्यधारा में लाने के लिए एक संरचित ढांचा प्रदान करेगा।

प्रमुख गतिविधियों में जलवायु अनुकूलता के लिए किसानों के नवाचारों पर एक राष्ट्रीय पहल; आरएडब्ल्यूई-आधारित मिनी-शोध/प्रयोग यात्राएं; सेंटिनल गांवों और ग्राम ज्ञान रजिस्टरों का विकास; कृषि शिक्षा में सह-सृजित ज्ञान का एकीकरण; कृषि-जैव विविधता का संरक्षण और समावेशी मूल्य श्रृंखलाओं का विकास शामिल होगा।

यह साझेदारी “अपूर्ण और अनभूति आवश्यकताओं की पूर्ति: जमीनी स्तर के लिए और जमीनी स्तर से नवाचारों के माध्यम से समावेशी विकास” विषय पर एक नए पीएच.डी. कार्यक्रम और जमीनी नवाचारों एवं कार्यात्मक पारंपरिक ज्ञान पर एक ग्लोबल एकेडमी की स्थापना की संभावनाओं का भी पता लगाएगी।

दूसरे समझौता ज्ञापन पर आईसीएआर और अर्पण सेवा संस्थान, उदयपुर के बीच हस्ताक्षर किए गए, जिसका उद्देश्य कृषि उत्पादकता और स्थिरता बढ़ाने के लिए प्रमाणित कृषि प्रौद्योगिकियों, उन्नत फसल किस्मों और विस्तार सहायता का प्रसार करना है।

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यह सहयोग विशेष रूप से जलवायु-अनुकूल कृषि, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, जलग्रहण क्षेत्र विकास, एकीकृत कृषि प्रणालियों और संबद्ध क्षेत्रों में क्षमता निर्माण और कौशल विकास को बढ़ावा देगा। यह किसान–वैज्ञानिक संवाद, प्रौद्योगिकी प्रदर्शन तथा सर्वोत्तम प्रथाओं और सफलता की कहानियों के दस्तावेजीकरण एवं प्रसार की सुविधा भी प्रदान करेगा, जिससे कृषि प्रौद्योगिकियों की अंतिम छोर तक पहुंच में सुधार होगा।

दोनों सहयोग भाकृअनुप के व्यापक अनुसंधान एवं विस्तार नेटवर्क और संबद्ध केवीके का लाभ उठाते हुए नवाचारों, पारंपरिक ज्ञान और प्रमाणित प्रौद्योगिकियों को स्थानीय रूप से प्रासंगिक समाधानों में परिवर्तित करेंगे। सामूहिक रूप से, ये पहल अधिक सहभागी, समावेशी, टिकाऊ और लचीले कृषि विकास में योगदान देंगी।

(स्रोत: कृषि विस्तार प्रभाग, भाकृअनुप)

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