11 मई, 2026, हावड़ा
संतुलित उर्वरक उपयोग पर मंथन-सह-समन्वय संवाद का सफल आयोजन आज कृषि विज्ञान केन्द्र (बीसीकेवी), हावड़ा द्वारा भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता के सहयोग से किया गया।
इस कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, प्रसार अधिकारियों, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों, प्रगतिशील किसानों, कृषि आदान विक्रेताओं तथा मीडिया प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य वैज्ञानिक एवं संतुलित उर्वरक उपयोग पर चल रहे राष्ट्रीय अभियान के अंतर्गत सतत पोषक तत्व प्रबंधन और मृदा स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर विचार-विमर्श करना था।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ अशोक कुमार पात्रा, कुलपति, बीसीकेवी ने मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और संसाधनों के कुशल उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) की सक्रिय भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्थान-विशिष्ट परामर्श, सटीक पोषक तत्व प्रबंधन, जैविक संसाधनों के समेकन तथा कृषि अवशेषों के पुनर्चक्रण के महत्व को रेखांकित किया।
डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान ने कहा कि मृदा परीक्षण और फसल की आवश्यकता के आधार पर उर्वरकों का उपयोग मृदा स्वास्थ्य और फसल उत्पादकता बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि हरी खाद, जैव उर्वरकों और जैविक आदानों के समेकित उपयोग से पोषक तत्व उपयोग दक्षता बढ़ाई जा सकती है, मृदा की जैविक सक्रियता में सुधार हो सकता है तथा रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता को कम किया जा सकता है। जनभागीदारी पर बल देते हुए उन्होंने किसानों, संस्थानों और विभागों के बीच समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि समेकित पोषक तत्व प्रबंधन और लचीली एवं सतत कृषि को बढ़ावा दिया जा सके।

अन्य प्रमुख प्रतिभागियों में प्रो. मनबेंद्र रॉय, डॉ. अशोक सिट, डॉ. संतोष कुमार जाना सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, प्रगतिशील किसान, कृषि आदान विक्रेता तथा आकाशवाणी के प्रतिनिधि शामिल थे।
संवाद का समापन विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करने, मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व परामर्श सेवाओं के विस्तार, हरी खाद के बीज उत्पादन, फसल विविधीकरण तथा किसानों के जागरूकता कार्यक्रमों को और अधिक सशक्त बनाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ, ताकि जिले में समेकित पोषक तत्व प्रबंधन और सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दिया जा सके।
(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता)







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