28 अप्रैल, 2026, हैदराबाद
भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान के तत्वावधान में दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों में उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने हेतु एक गहन अभियान सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस पहल का उद्देश्य किसानों को सतत कृषि के लिए विज्ञान-आधारित पोषक तत्व एवं अन्य इनपुट प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना था।

आंध्र प्रदेश में यह अभियान डीएपी की अधिक खपत वाले आठ जिलों पर केन्द्रित रहा। इसके अंतर्गत कुल नौ जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनसे सीधे 455 किसान लाभान्वित हुए। पलनाडु और गुंटूर जैसे जिलों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। इसके अतिरिक्त पाँच प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिनसे 305 किसानों को वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन संबंधी जानकारी प्रदान की गई।
अभियान में क्षेत्रीय स्तर की गतिविधियों के साथ-साथ डिजिटल माध्यमों का भी प्रभावी उपयोग किया गया। हरी खाद, जैव उर्वरकों और अन्य सतत कृषि पद्धतियों पर प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिनके माध्यम से 846 किसानों के साथ प्रत्यक्ष संवाद स्थापित किया गया। सोशल मीडिया अभियान ने इस पहल की पहुँच को और अधिक बढ़ाते हुए 4,01,134 से अधिक किसानों तक संदेश पहुँचाया।

आंध्र प्रदेश से आगे बढ़ते हुए यह अभियान तेलंगाना, तमिलनाडु और पुदुचेरी सहित कुल 72 कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) तक विस्तारित किया गया। सामूहिक रूप से इन प्रयासों के माध्यम से 3,158 किसानों तक प्रत्यक्ष पहुँच बनाई गई, जबकि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लगभग 5,51,116 किसानों तक अभियान का विस्तार हुआ, जिसमें आंध्र प्रदेश का योगदान सबसे अधिक रहा।
समग्र रूप से यह अभियान क्षमता निर्माण, विस्तार प्रदर्शनों और डिजिटल प्रसार के प्रभावी समन्वय का उदाहरण बना, जिसने संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व को सुदृढ़ किया तथा क्षेत्र में सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान)







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