6 जून, 2026, बैरकपुर
भाकृअनुप-केन्द्रीय जूट एवं संबद्ध रेशा अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर, ने आज अपने परिसर में कृषक सम्मेलन का आयोजन किया, जिसमें जूट क्षेत्र से जुड़े किसानों, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की महिला सदस्यों, वैज्ञानिकों, प्रसार कार्मिकों तथा अन्य हितधारकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में श्री दिलीप घोष, कृषि विपणन, ग्रामीण विकास एवं पंचायत तथा पशु संसाधन मंत्री, पश्चिम बंगाल सरकार, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सभा को संबोधित करते हुए मंत्री ने किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण आजीविका में सुधार के लिए वैज्ञानिक कृषि, मूल्य संवर्धन, बाजार संपर्क तथा उद्यमिता के महत्व पर बल दिया।

उन्होंने पुनः दोहराया कि किसानों को भाकृअनुप-क्रिजाफ द्वारा विकसित नवीन जारी किस्मों और कृषि प्रौद्योगिकियों का पूरा लाभ उठाना चाहिए। श्री घोष ने विविधीकृत जूट-आधारित उत्पादों के निर्माण और विपणन में संलग्न महिला स्वयं सहायता समूहों के प्रयासों की सराहना की तथा उन्हें नवाचार, कौशल विकास और सामूहिक विपणन पहलों के माध्यम से अपने उद्यमों का और विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित किया। मंत्री ने मजबूत बाजार समर्थन प्रणालियाँ विकसित करने के लिए नीति-निर्माताओं, विपणन एजेंसियों, अनुसंधान संस्थानों और किसान संगठनों के बीच समन्वित प्रयासों का आह्वान किया।
श्री कौस्तव बागची, विधायक, बैरकपुर, सम्मानित अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित रहे। उन्होंने जूट क्षेत्र में हुए तकनीकी विकास की सराहना करते हुए कहा कि इस राज्य में जूट का विशेष महत्व है। किसानों और अन्य हितधारकों के लाभ के लिए स्वर्ण रेशा की गौरवशाली पहचान को पुनः स्थापित करने हेतु इन प्रौद्योगिकियों को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता है।
सम्मानित अतिथि के रूप में श्रीमती शिल्पा गौरिसारिया, आईएएस, जिलाधिकारी, उत्तर 24 परगना, ने भी कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई और किसानों को संबोधित किया।
श्री प्रलय राय चौधुरी, अतिरिक्त जिलाधिकारी, उत्तर 24 परगना, भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे और उन्होंने किसानों को संबोधित किया।
अपने स्वागत उद्बोधन में डॉ. गौरांग कर, निदेशक, भाकृअनुप-क्रिजाफ, ने जूट और संबद्ध रेशा फसलों के लिए किसान-अनुकूल प्रौद्योगिकियों के विकास में संस्थान के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला, जिनमें उन्नत किस्में, समेकित फसल प्रबंधन पद्धतियाँ, गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन प्रौद्योगिकियाँ, यंत्रीकरण, रेटिंग प्रौद्योगिकियाँ तथा मूल्य संवर्धित उत्पाद शामिल हैं।

डॉ. कर ने जूट उत्पादकों के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को पुनर्परिभाषित करते हुए जूट क्षेत्र के समग्र तकनीकी और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए प्रौद्योगिकियों के सफल विस्तार की जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि संस्थान के कौशल विकास केंद्र में प्रशिक्षित कुछ महिला स्वयं सहायता समूह सदस्यों ने ‘लखपति दीदी’ का दर्जा प्राप्त किया है। यह समाज के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए प्रौद्योगिकियों को जोड़ने के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करता है। निदेशक ने किसानों के हितों की रक्षा करने और सतत कृषि उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए जूट तथा अन्य कृषि जिंसों हेतु स्थिर और लाभकारी बाजारों की स्थापना के महत्व पर भी बल दिया।
कार्यक्रम के दौरान गणमान्य अतिथियों ने जूट संग्रहालय, जूट विविधीकृत उत्पादों (जेडीपी) की प्रदर्शनी स्टॉलों, क्षेत्रीय प्रयोगों तथा सटीक कीटनाशी छिड़काव में ड्रोन के उपयोग के प्रदर्शन का अवलोकन किया। मंत्री ने किसानों के बीच धान और हरित खाद फसलों की उच्च उत्पादक किस्मों के गुणवत्तायुक्त बीजों का वितरण किया। उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि उपकरण तथा स्प्रेयर भी वितरित किए गए।
कार्यक्रम का समापन एक संवादात्मक सत्र के साथ हुआ, जिसमें किसानों और स्वयं सहायता समूह के सदस्यों ने अपने अनुभव साझा किए तथा कृषि से संबंधित विभिन्न चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा की। इस कार्यक्रम में 250 से अधिक किसानों, कृषक महिलाओं, स्वयं सहायता समूह के सदस्यों, वैज्ञानिकों, राज्य सरकार के अधिकारियों, मीडिया प्रतिनिधियों तथा अन्य हितधारकों ने भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय जूट एवं संबद्ध रेशा अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर)







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