भाकृअनुप-क्रिडा, हैदराबाद ने तेलंगाना में सेव द फील्ड अभियान 2026 (खेत_बचाओ_अभियान) का किया आयोजन

भाकृअनुप-क्रिडा, हैदराबाद ने तेलंगाना में सेव द फील्ड अभियान 2026 (खेत_बचाओ_अभियान) का किया आयोजन

19 जून, 2026, हैदराबाद

भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद, किसानों के बीच संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के आह्वान के प्रत्युत्तर में सेव द फील्ड अभियान 2026 (खेत_बचाओ_अभियान) का आयोजन कर रहा है।

इस कार्यक्रम के तहत भाकृअनुप-क्रिडा, हैदराबाद, ने आज तेलंगाना के यादाद्री भुवनगिरि जिले के पोचमपल्ली मंडल के भीमनपल्ले गांव में संतुलित उर्वरक उपयोग तथा मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन पर एक जागरूकता अभियान आयोजित किया।

कार्यक्रम में पोषक तत्व उपयोग दक्षता में सुधार, आदान लागत को कम करने तथा मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए मृदा परीक्षण आधारित अनुशंसाओं के अनुसार संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।

ICAR-CRIDA, Hyderabad Organizes Save the Field Campaign 2026 (खेत_बचाओ_अभियान) in Telangana

किसानों को कृषि आय बढ़ाने, उत्पादन जोखिम कम करने एवं मृदा उर्वरता में सुधार के लिए फसल विविधीकरण और वैकल्पिक फसलों, विशेष रूप से दलहन और तिलहन फसलों की खेती के लाभों के प्रति भी जागरूक किया गया। जलवायु परिवर्तनशीलता और बाजार में उतार-चढ़ाव के विरुद्ध लचीलापन विकसित करने में विविधीकृत फसल प्रणालियों की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया।

मृदा के कार्बनिक पदार्थ में सुधार, पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने और मृदा उत्पादकता को बनाए रखने के लिए सनई और ढैंचा जैसी हरी खाद फसलों की खेती पर विशेष बल दिया गया। किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और मृदा स्वास्थ्य में सुधार के लिए अपनी फसल प्रणालियों में हरी खाद फसलों को शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

संवादात्मक सत्र ने किसानों को अपनी खेत-स्तरीय चुनौतियों पर चर्चा करने और वैज्ञानिक अनुशंसाएं प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया। इस कार्यक्रम ने उत्पादकता, लाभप्रदता और दीर्घकालिक कृषि स्थिरता में सुधार के उद्देश्य से सतत कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूकता पैदा की।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)

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