30 जून, 2026, हैदराबाद, तेलंगाना
भारत सरकार एवं भाकृअनुप द्वारा शुरू किए गए देशव्यापी खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत भाकृअनुप–केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-क्रिडा), हैदराबाद, ने आज तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले के याचाराम मंडल के कोथापल्ले गांव में संतुलित उर्वरक उपयोग एवं मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों के बीच सतत पोषक तत्व प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था, ताकि कृषि लागत में कमी लाते हुए उत्पादकता में सुधार किया जा सके।
तकनीकी सत्रों के दौरान किसानों को यूरिया एवं डीएपी के अत्यधिक उपयोग से बचने की सलाह दी गई तथा मृदा स्वास्थ्य, फसल उत्पादकता एवं दीर्घकालिक कृषि स्थिरता पर इनके प्रतिकूल प्रभावों के बारे में जानकारी दी गई। पोषक तत्वों के कुशल प्रबंधन तथा मृदा उर्वरता बनाए रखने के लिए मृदा परीक्षण आधारित संतुलित उर्वरीकरण अपनाने पर विशेष जोर दिया गया।
जैव उर्वरकों के साथ बीज उपचार का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया तथा किसानों को पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने, मृदा में सूक्ष्मजीवी गतिविधियों में सुधार करने तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए उपयुक्त जैव उर्वरकों के साथ बीज उपचार अथवा मृदा में उनके प्रयोग को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान फसल विविधीकरण, हरित खाद, मृदा एवं जल संरक्षण उपायों, जिनमें मेड़ एवं नाली (रिज एंड फरो) पद्धति से बुवाई शामिल है, तथा पर्यावरण-अनुकूल फसल उत्पादन के लिए रासायनिक कीटनाशकों के प्राकृतिक विकल्पों के उपयोग जैसी सतत कृषि पद्धतियों को भी बढ़ावा दिया गया। किसानों को अनुशंसित कृषि आदानों की उपलब्धता, मूल्य तथा उनके वैज्ञानिक उपयोग की विधियों की जानकारी भी प्रदान की गई, ताकि वे उन्हें खेतों में प्रभावी ढंग से अपना सकें।
खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत इस प्रकार की पहलों के माध्यम से भाकृअनुप-क्रिडा शुष्कभूमि क्षेत्रों में मृदा स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने तथा सतत कृषि विकास सुनिश्चित करने के लिए विज्ञान-आधारित, संसाधन-कुशल एवं जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को निरंतर बढ़ावा दे रहा है।
जागरूकता कार्यक्रम में कुल 35 किसानों ने भाग लिया तथा संतुलित उर्वरीकरण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन एवं सतत कृषि पद्धतियों से संबंधित विषयों पर विशेषज्ञों के साथ सक्रिय संवाद किया।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)







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