28 अप्रैल, 2026, हैदराबाद
भाकृअनुप–केन्द्रीय बारानी कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-क्रिडा), हैदराबाद, द्वारा आज तेलंगाना के महबूबनगर जिले के जदचेरला मंडल के खिस्तामपल्ली गांव में “मेरा गांव मेरा गौरव” (MGMG) कार्यक्रम के अंतर्गत संतुलित उर्वरीकरण पर एक व्यापक अभियान आयोजित किया गया। यह पहल भाकृअनुप, नई दिल्ली द्वारा शुरू किए गए संतुलित उर्वरक उपयोग के गहन अभियान के तहत आयोजित की गई।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सतत पोषक तत्व प्रबंधन पद्धतियों को बढ़ावा देना था। किसानों को मृदा परीक्षण आधारित संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में जागरूक किया गया तथा उन्हें केवल यूरिया पर निर्भर न रहने की सलाह दी गई, क्योंकि अत्यधिक यूरिया का उपयोग मृदा स्वास्थ्य और फसल उत्पादकता को प्रभावित करता है तथा लागत बढ़ाता है। चूंकि कई किसानों ने मृदा परीक्षण नहीं कराया था, इसलिए मृदा परीक्षण के महत्व और इसकी प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया।
कार्यक्रम में फसल विविधीकरण के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया, जिसमें लगातार धान की खेती से बचने तथा इसके स्थान पर दलहनी फसलें, हरी खाद वाली फसलें एवं अन्य उपयुक्त विकल्पों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया, जिससे मृदा उर्वरता में सुधार हो सके। इसके साथ ही, जैविक खाद, हरी खाद, कम्पोस्टिंग तथा जैव उर्वरकों के उपयोग के माध्यम से समेकित पोषक तत्व प्रबंधन के महत्व पर चर्चा की गई।

अतिरिक्त रूप से, जैव उर्वरकों के उपयोग से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने तथा दीर्घकालीन मृदा स्वास्थ्य सुधारने के लाभों को भी विस्तार से बताया गया। जैव उर्वरकों द्वारा बीज उपचार की तकनीकों का प्रदर्शन किया गया तथा उर्वरकों के सही उपयोग की विधि पर भी मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
इस कार्यक्रम में खिस्तामपल्ली गांव के कुल 41 किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय बारानी कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)







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