भाकृअनुप–केवीके, सीसीएआरआई उत्तर गोवा ने जैव-सुदृढ़ीकृत फिंगर मिलेट को बढ़ावा दिया

भाकृअनुप–केवीके, सीसीएआरआई उत्तर गोवा ने जैव-सुदृढ़ीकृत फिंगर मिलेट को बढ़ावा दिया

5 अगस्त, 2026, गोवा

भाकृअनुप–कृषि विज्ञान केन्द्र, उत्तर गोवा ने भाकृअनुप–केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, ओल्ड गोवा के अंतर्गत आज उत्तर गोवा के पेरनेम स्थित उगावेम पंचायत में “स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए जैव-सुदृढ़ीकृत फिंगर मिलेट के साथ पोषण-स्मार्ट कृषि को बढ़ावा देना” विषय पर एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य फिंगर मिलेट की खेती में वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन के बारे में किसानों के ज्ञान को बढ़ाना तथा पोषण सुरक्षा, जलवायु लचीलापन और कृषि लाभप्रदता में सुधार के लिए जैव-सुदृढ़ीकृत फिंगर मिलेट की किस्म ‘इंद्रावती’ की खेती को बढ़ावा देना था।

मुख्य अतिथि सुश्री सिया सुनील धुरी, उप सरपंच, उगावेम-तांबोक्सेम, मोपा, उत्तर गोवा, ने किसान-केन्द्रित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने में भाकृअनुप–केवीके, सीसीएआरआई, उत्तर गोवा, के प्रयासों की सराहना की और किसानों को पोषण सुरक्षा में सुधार, बेहतर स्वास्थ्य को बढ़ावा देने तथा कृषि आय बढ़ाने के लिए जैव-सुदृढ़ीकृत फिंगर मिलेट (इंद्रावती) की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के महत्व पर भी जोर दिया और किसानों से भाकृअनुप–केवीके द्वारा आयोजित भविष्य के विस्तार कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया।

ICAR–KVK, CCARI North Goa Promotes Biofortified Finger Millet

पोषण सुरक्षा में सुधार और किसानों की आय बढ़ाने में जैव-सुदृढ़ीकृत फिंगर मिलेट की किस्म ‘इंद्रावती’ के महत्व पर प्रकाश डाला गया। इसके पोषण और स्वास्थ्य संबंधी लाभों के बारे में बताया गया तथा किसानों को इस जलवायु-लचीली फसल को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। फिंगर मिलेट में आटा, लड्डू, माल्ट, बिस्कुट और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों जैसे उत्पाद तैयार करके मूल्य संवर्धन की संभावनाओं के बारे में भी जागरूकता पैदा की गई, जिससे कृषक परिवारों को अतिरिक्त आय प्राप्त हो सकती है।

फिंगर मिलेट की खेती के लिए कृषि पद्धतियों के पैकेज पर भी चर्चा की गई, जिसमें भूमि की तैयारी, बीज उपचार, बुवाई, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, खरपतवार प्रबंधन और फसल सुरक्षा शामिल हैं। इस बात पर जोर दिया गया कि फिंगर मिलेट की खेती खुले खेत की परिस्थितियों में तथा अंतरफसल के रूप में भी की जा सकती है, जिससे किसान भूमि संसाधनों का अधिक कुशलता से उपयोग कर सकते हैं, फसल प्रणालियों में विविधता ला सकते हैं तथा कृषि उत्पादकता और आय में सुधार कर सकते हैं।

कुल 31 किसानों ने कार्यक्रम में भाग लिया, जिनमें 22 पुरुष और 09 महिला प्रतिभागी शामिल थे। कार्यक्रम के समापन पर पोषक तत्वों से भरपूर मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देने और क्षेत्र में पोषण सुरक्षा बढ़ाने के लिए सभी प्रतिभागियों को जैव-सुदृढ़ीकृत फिंगर मिलेट (इंद्रावती) के बीज वितरित किए गए।

(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोवा)

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