24 मार्च, 2026, नागालैंड
भाकृअनुप–कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), फेक (भाकृअनुप–राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केन्द्र, मेदज़ीफेमा, नागालैंड) द्वारा भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, ज़ोन VII, उमियम, के अंतर्गत, आज फेक जिले के फुसाचोडू गांव में “सतत कृषि और ग्रामीण विकास” विषय पर किसान मेला-सह-किसान गोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भाकृअनुप–विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा, के सहयोग से आयोजित किया गया।
मुख्य अतिथि श्री कुडेचो खामो, सलाहकार (सीएडब्ल्यूडी एवं टैक्सेस), नागालैंड सरकार, ने खाद्य सुरक्षा एवं ग्रामीण समृद्धि के लिए सतत कृषि के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने उन्नत तकनीकों को अपनाने, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और पशुपालन के एकीकरण को प्रोत्साहित किया। उन्होंने एमएसएमई के क्षेत्र में अवसरों तथा कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित किया और किसानों को सशक्त बनाने में आईसीएआर-केवीके फेक के प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम में केवीके की जलवायु-सहिष्णु कृषि को बढ़ावा देने में भूमिका पर प्रकाश डाला गया, साथ ही बागवानी फसलों के मूल्य संवर्धन, कटाई उपरांत प्रसंस्करण और पैकेजिंग को प्रोत्साहित करने के प्रयासों को भी रेखांकित किया गया। किसानों को पादप किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (पीपीवी एवं एफआरए) के महत्व के प्रति भी जागरूक किया गया, जो किसानों के अधिकारों की रक्षा और देशी बीज विविधता के संरक्षण में सहायक है।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण विभिन्न गांवों—फुसाचोडू, के. बासा, किक्रुमा, थिपुजु, फुत्सेरोमी और पोर्बा—के किसानों द्वारा अनुभव साझा सत्र रहा। प्रतिनिधियों ने अपनी चुनौतियों, नवाचारों और सफलता की कहानियों को साझा किया, जिससे आपसी सीख को बढ़ावा मिला और अन्य किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरणा मिली। तकनीकी सत्र के दौरान भाकृअनुप-आईवीआरआई अनुसंधान केंद्न्, बेंगलुरु, केवीके फेक और भाकृअनुप-राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केन्द्र, पोर्बा, के विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिया।
इंटरएक्टिव सत्र में किसानों को वैज्ञानिकों से सीधे संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान करने का अवसर मिला। केवीके द्वारा विकसित सब्जी बीज किट भी किसानों को वितरित किया गया, ताकि उन्नत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा मिल सके। यह पहल फेक जिले में सतत कृषि विकास और किसानों की आजीविका में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देने की अपेक्षा रखती है।
(स्रोत: भाकृअनुप–कृषि विज्ञान केन्द्र, फेक - भाकृअनुप–राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केन्द्र, मेदज़ीफेमा, नागालैंड)







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