20–21 मार्च, 2026, नागालैंड
भाकृअनुप–कृषि विज्ञान केन्द्र, लोंगलेन्ग, नागालैंड, में 20–21 मार्च, 2026 को ‘भूमि सुपोषण कार्यक्रम’, कृषि मेला तथा अनुप्रयुक्त कृषि प्रौद्योगिकी पर क्षेत्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भाकृअनुप-केन्द्रीय चावल अनुसंधान संस्थान, कटक, के सहयोग से एनईएच गतिविधियों के अंतर्गत आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम में श्री ए पोंगशी, विधायक (50 ए/सी, लोंगलेन्ग, नागालैंड), मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। साथ ही इस आयोजन में डॉ. होमेश्वर कलिता एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य को बढ़ावा देना, वैज्ञानिक खेती पद्धतियों का प्रसार करना तथा किसान–वैज्ञानिक संवाद को मजबूत बनाकर उत्पादकता एवं आजीविका में सुधार लाना था। कार्यक्रम में प्रतिदिन लगभग 1,000 किसानों के साथ-साथ कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के अधिकारी, वैज्ञानिक तथा अन्य हितधारकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
पहले दिन का मुख्य फोकस मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, संरक्षण पद्धतियों तथा उन्नत कृषि तकनीकों के प्रदर्शन पर रहा। ‘भूमि सुपोषण’ पर विशेष जोर देते हुए टिकाऊ कृषि में मृदा की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया तथा मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन और जैविक इनपुट्स के उपयोग को प्रोत्साहित किया गया। कृषि मेले में नवाचार तकनीकों, इनपुट्स और सफल किसान-आधारित प्रथाओं का प्रदर्शन किया गया।
दूसरे दिन उन्नत तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिसमें जलवायु-सहिष्णु तकनीक, एनईएच क्षेत्र के लिए उन्नत धान-आधारित प्रणालियाँ, किसानों की आय बढ़ाने के लिए सामाजिक-आर्थिक रणनीतियाँ तथा उद्यमिता विकास (मूल्य संवर्द्धन और विपणन सहित) पर चर्चा की गई। एक विशेष किसान–वैज्ञानिक संवाद सत्र के माध्यम से किसानों ने अपनी समस्याएँ साझा कीं और उन्हें स्थानीय स्तर पर व्यावहारिक समाधान प्राप्त हुए।

कार्यक्रम में क्षमता निर्माण, फसल विविधीकरण तथा संस्थागत समन्वय को सुदृढ़ करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया, ताकि दीर्घकालीन कृषि स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में जीवंतता का संचार किया और क्षेत्र की समृद्ध परंपराओं को दर्शाया।
समग्र रूप से यह कार्यक्रम लोंगलेन्ग जिले में ज्ञान आदान-प्रदान, कौशल विकास तथा जलवायु-सहिष्णु, टिकाऊ और बाजार-उन्मुख कृषि को बढ़ावा देने के लिए एक प्रभावी मंच साबित हुआ।
(स्रोत: भाकृअनुप–कृषि विज्ञान केन्द्र, लोंगलेन्ग, नागालैंड)







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