भाकृअनुप–केवीके कोडागु ने दिव्यांगजनों और देखभालकर्ताओं के लिए कृषि-आधारित प्रशिक्षण के माध्यम से समावेशी आजीविका को दिया बढ़ावा

भाकृअनुप–केवीके कोडागु ने दिव्यांगजनों और देखभालकर्ताओं के लिए कृषि-आधारित प्रशिक्षण के माध्यम से समावेशी आजीविका को दिया बढ़ावा

22 सितंबर, 2026, कोडागु

समावेशी कौशल विकास और आजीविका सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत, आज भाकृअनुप–कृषि विज्ञान केन्द्र, कोडागु में दिव्यांगजनों (PwDs) और देखभालकर्ताओं के लिए चार दिवसीय कृषि-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। यह कार्यक्रम एसबीआई फाउंडेशन और नायरा एनर्जी लिमिटेड द्वारा समर्थित सीएसआर पहल के तहत स्वामी विवेकानंद यूथ मूवमेंट (एसवीवाईएम), कोडागु और भाकृअनुप–केवीके कोडागु के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

ICAR–KVK Kodagu Promotes Inclusive Livelihoods through Agri-Based Training for PwDs and Caregivers

यह कार्यक्रम दिव्यांगजनों और उनके देखभालकर्ताओं को व्यावहारिक, कृषि-आधारित कौशल से लैस करने के लिए तैयार किया गया है, जो आय सृजन, आत्मनिर्भरता और सतत आजीविका में सहायता कर सकते हैं। प्रशिक्षण में वैज्ञानिक बकरी पालन, डेयरी फार्मिंग, सूअर पालन, वर्मी कम्पोस्टिंग, बैकयार्ड पोल्ट्री, मशरूम उत्पादन और मधुमक्खी पालन सहित विभिन्न उद्यमों का व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया जा रहा है, जिससे प्रतिभागियों को अपनी क्षमताओं और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल आजीविका गतिविधियों का चयन करने में मदद मिलेगी।

कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में एसवीवाईएम कोडागु की संचालन समिति के सदस्य डॉ. नरसिम्हा की उपस्थिति में किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने इस पहल की सराहना की और आत्मनिर्भरता तथा सतत आजीविका को बढ़ावा देने के लिए दिव्यांगजनों और देखभालकर्ताओं के व्यावहारिक कौशल विकास के महत्व पर जोर दिया।

ICAR–KVK Kodagu Promotes Inclusive Livelihoods through Agri-Based Training for PwDs and Caregivers

डॉ. संगप्पा, वरिष्ठ वैज्ञानिक-सह-प्रमुख, आईसीएआर-केवीके कोडागु ने समावेशी आजीविका के अवसर सृजित करने में कृषि-आधारित प्रशिक्षण और व्यावहारिक शिक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला तथा आईसीएआर–केवीके कोडागु की ओर से निरंतर तकनीकी सहायता का आश्वासन दिया।

प्रशिक्षण सत्र भाकृअनुप–केवीके कोडागु की टीम द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन के साथ आयोजित किए जा रहे हैं। मधुमक्खी पालन पर एक विशेष अनुभवात्मक भ्रमण के माध्यम से प्रतिभागियों को एक संबद्ध उद्यम और इसके व्यावहारिक पहलुओं से भी परिचित कराया जाएगा।

इस समन्वित प्रयास के माध्यम से प्रशिक्षण का उद्देश्य कृषि ज्ञान को व्यावहारिक आजीविका कौशल में बदलना है, जिससे दिव्यांगजन और देखभालकर्ता व्यवहार्य आय-सृजन गतिविधियों की पहचान कर सकें तथा अधिक आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का निर्माण कर सकें।

(स्रोत: भाकृअनुप–कृषि विज्ञान केन्द्र, कोडागु)

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