भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा संतुलित उर्वरक उपयोग को सतत मृदा स्वास्थ्य एवं फसल उत्पादकता हेतु आवश्यक बताया गया

भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा संतुलित उर्वरक उपयोग को सतत मृदा स्वास्थ्य एवं फसल उत्पादकता हेतु आवश्यक बताया गया

12 मई, 2026, हैदराबाद

भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद, ने आज नलगोंडा जिले के चिट्याला गांव में संतुलित उर्वरक उपयोग एवं मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन पर किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया।

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने तथा फसल उत्पादकता बढ़ाने में संतुलित उर्वरक उपयोग की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने चेतावनी दी कि रासायनिक उर्वरकों के लगातार तथा अंधाधुंध उपयोग से मृदा क्षरण, पोषक तत्वों का असंतुलन एवं पर्यावरण प्रदूषण जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।

Balanced Fertilizer Use Essential for Sustainable Soil Health and Crop Productivity Organised by ICAR-CRIDA, Hyderabad

वैज्ञानिकों ने बताया कि संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन से फसलों की वृद्धि और उत्पादन में सुधार होता है, साथ ही मृदा के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणों का संरक्षण भी होता है। उन्होंने मृदा उर्वरता बढ़ाने, पर्यावरण प्रदूषण कम करने तथा दीर्घकालिक कृषि स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए जैविक खाद, हरी खाद, जैव उर्वरक, वर्मी कम्पोस्ट, कम्पोस्ट और तरल उर्वरकों जैसे पर्यावरण-अनुकूल पोषक स्रोतों को अपनाने पर जोर दिया।

विशेषज्ञों ने कहा कि विभिन्न फसलों के लिए अनुशंसित उर्वरक मात्रा (आरएफडी) का पालन करना मृदा उर्वरता बनाए रखने तथा फसल की उपज और गुणवत्ता सुधारने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के साथ गोबर की खाद (एफवाईएम), कम्पोस्ट एवं हरी खाद जैसे जैविक स्रोतों के समन्वित उपयोग की सलाह दी, जिससे मृदा संरचना तथा पोषक तत्वों की उपलब्धता में सुधार होता है। पोषक तत्व उपयोग दक्षता बढ़ाने के लिए समय पर उर्वरक प्रयोग तथा नाइट्रोजन का विभाजित मात्रा में उपयोग करने की भी सिफारिश की गई।

Balanced Fertilizer Use Essential for Sustainable Soil Health and Crop Productivity Organised by ICAR-CRIDA, Hyderabad

वैज्ञानिकों ने आगे बताया कि कृषि भूमि में जिंक और बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी तेजी से देखी जा रही है, जिसे संतुलित मृदा उर्वरता और सतत फसल उत्पादन बनाए रखने के लिए दूर करना आवश्यक है।

गांव भ्रमण के दौरान वैज्ञानिकों ने प्रगतिशील किसान कोथम रेड्डी से बातचीत की, जिन्होंने पोल्ट्री खाद सहित जैविक आदानों का उपयोग करते हुए पांच एकड़ में तरबूज की खेती की है। वैज्ञानिकों ने मृदा स्वास्थ्य सुधारने एवं उत्पादकता बनाए रखने के लिए जैविक खादों के व्यापक उपयोग को प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम में कुल 19 किसानों (10 पुरुष और 9 महिलइ) ने सक्रिय रूप से भागीदारी की।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान)

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