4-8 मई, 2026, भुवनेश्वर
भाकृअनुप-केन्द्रीय कृषि महिला संस्थान, भुवनेश्वर ने 4 से 8 मई, 2026 तक “सतत कृषि-खाद्य प्रणालियों के लिए लैंगिक दृष्टिकोण के साथ कृषि अनुसंधान को सुदृढ़ बनाना” विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम कृषि में जेंडर रिसर्च के नोडल एवं सह-नोडल अधिकारियों के लिए आयोजित किया गया था।
प्रतिभागियों को लैंगिक उत्तरदायी कृषि अनुसंधान एवं विस्तार दृष्टिकोण, कृषि में महिलाओं हेतु राष्ट्रीय सूचना प्रणाली, जलवायु-स्मार्ट कृषि में लैंगिक दृष्टिकोण के समावेशन तथा जेंडर-संवेदनशील विस्तार मॉडलों आदि विषयों पर व्याख्यान, प्रायोगिक सत्र, समूह गतिविधियों तथा संवाद के माध्यम से लाभान्वित किया गया। विभिन्न सत्रों में महिलाओं की कृषि में भागीदारी और नेतृत्व को बढ़ाने के लिए सामाजिक मानदंडों तथा संस्थागत प्रक्रियाओं पर विशेष बल देते हुए जेंडर समावेशी अनुसंधान पद्धतियों पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता अनुभवात्मक शिक्षण पर विशेष जोर रहा, जिसमें कृषि प्रौद्योगिकियों की जेंडर उत्तरदायित्व एवं महिला-अनुकूलता का आकलन करने के व्यावहारिक अभ्यास तथा जेंडर उत्तरदायी अनुसंधान एवं विस्तार प्रस्तावों के विकास पर समूह कार्य शामिल थे।
कार्यक्रम की सीखने की प्रक्रिया को सफल महिला उद्यमियों के अनुभव-साझाकरण सत्रों ने और अधिक समृद्ध बनाया। इसमें महिला किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) की नेताओं ने कृषि व्यवसायों के विस्तार एवं सामुदायिक नेतृत्व वाले मॉडलों पर संस्थानों के बीच ज्ञान आदान-प्रदान को प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम का समापन पश्च-मूल्यांकन सत्रों के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने-अपने संस्थानों में लैंगिक दृष्टिकोण को मुख्यधारा में शामिल करने हेतु कार्य योजनाएँ साझा कीं। समग्र रूप से, इस प्रशिक्षण ने कृषि में जेंडर रिसर्च के नोडल एवं सह-नोडल अधिकारियों (NO-GRA) के ज्ञान, कौशल और आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि की, जिससे वे सतत, समावेशी एवं समानतापूर्ण कृषि-खाद्य प्रणालियों के लिए जेंडर उत्तरदायी एवं जेंडर परिवर्तनकारी कृषि अनुसंधान तथा विस्तार पहलों को प्रभावी ढंग से डिजाइन तथा लागू कर सके।
इस कार्यक्रम में देशभर के विभिन्न भाकृअनुप संस्थानों से 30 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य कृषि अनुसंधान, शिक्षा एवं विस्तार प्रणालियों में लैंगिक दृष्टिकोण को मुख्यधारा में शामिल करने की क्षमता को सुदृढ़ करना था।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय कृषि महिला संस्थान, भुवनेश्वर)







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