भाकृअनुप-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल द्वारा श्रीअन्न के कुशल प्रसंस्करण हेतु मशीनरी आधारित उत्कृष्टता केन्द्र का विकास

भाकृअनुप-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल द्वारा श्रीअन्न के कुशल प्रसंस्करण हेतु मशीनरी आधारित उत्कृष्टता केन्द्र का विकास

श्रीअन्न को उनके उच्च पोषण मूल्य, जलवायु अनुकूलता और सतत कृषि के लिए उपयुक्तता के कारण भविष्य के स्मार्ट फूड के रूप में तेजी से मान्यता मिल रही है। उपभोक्ताओं में बढ़ती जागरूकता और स्वस्थ श्रीअन्न-आधारित उत्पादों की बढ़ती मांग के साथ, कच्चे श्रीअन्न अनाज को बाजार में बिकने योग्य उत्पादों में बदलने के लिए कुशल और किफायती प्रसंस्करण तकनीकों की आवश्यकता बढ़ गई है।

हालांकि, श्रीअन्न के व्यवसायीकरण के विस्तार में एक प्रमुख बाधा छोटे उद्यमियों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), स्वयं सहायता समूहों (एसएछजी) तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एणएसएमई) के लिए उपयुक्त प्रसंस्करण उपकरणों की कमी रही है। इस चुनौती को दूर करने के लिए भाकृअनुप–केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल, ने 50–60 किलोग्राम प्रति घंटा क्षमता वाली कुशल श्रीअन्न प्रसंस्करण मशीनरी के लिए एक उत्कृष्टता केन्द्र विकसित किया है, जो क्षमता निर्माण, मूल्य संवर्धन तथा उद्यमिता विकास में सहायक होगा।

ICAR-CIAE, Bhopal Develop a Centre of Excellence on Efficient Millet Processing Machinery for Capacity Building and Entrepreneurship Development

विकसित मशीनरी में उपकरणों की एक पूर्ण श्रृंखला शामिल है, जिसमें प्राथमिक (सफाई, ग्रेडिंग, डी-स्टोनिंग), द्वितीयक (डी-हुलिंग, पॉलिशिंग, ग्रिट निर्माण, आटा मिलिंग, आईआर आधारित प्री-ट्रीटमेंट प्रणाली) तथा तृतीयक (फर्मेंटेशन, रोस्टिंग और पफिंग) स्तर की मशीनें शामिल हैं। श्रीअन्न क्लीनर कम ग्रेडर सभी प्रकार के मिलेट की सफाई एवं ग्रेडिंग के लिए उपयुक्त है, जिसकी सफाई दक्षता 90–95% है। इसे स्क्रीन असेंबली और एस्पिरेशन चैंबर में विशेष सुधारों के साथ डिज़ाइन किया गया है, जिससे श्रीअन्न की प्रभावी सफाई तथा ग्रेडिंग सुनिश्चित होती है। श्रीअन्न डी-स्टोनर 90–92% दक्षता के साथ पत्थरों और भारी अशुद्धियों को प्रभावी ढंग से अलग करता है। फिंगर मिलेट तथा फॉक्सटेल मिलेट जैसे छोटे श्रीअन्न की डी-हुलिंग के लिए एक मल्टी-मिलेट डी-हस्कर विकसित किया गया है, जिसकी डी-हुलिंग दक्षता 80–85% है।

आगे मूल्य संवर्धन के लिए श्रीअन्न पॉलिशर जैसी मशीनें विकसित की गई हैं, जो चोकर (bran) और जर्म को हटाकर मिलेट के दानों की दिखावट, स्वीकार्यता एवं भंडारण अवधि में सुधार करती हैं, जिसकी पॉलिशिंग दक्षता 82–85% है। श्रीअन्न फ्लोर मिल सभी प्रकार के श्रीअन्न से आटा तैयार करने के लिए उपयुक्त है, जिससे यह घरेलू उपयोग, बेकरी एवं खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए उपयोगी बनती है। मिलेट ग्रिट मेकिंग मशीन अनाज को 1–4 मिमी आकार के विभिन्न ग्रिट्स में परिवर्तित करती है, जिनका उपयोग मिलेट दलिया, हेल्थ मिक्स और बेकरी उत्पादों में किया जाता है। इसकी ग्रिट बनाने की दक्षता 95–97% है। ये तकनीकें उद्यमियों को उत्पादों में विविधता लाने और बदलती उपभोक्ता मांगों को पूरा करने में सक्षम बनाती हैं।

रेडी-टू-ईट (तत्काल उपभोग योग्य) और फंक्शनल फूड्स के बढ़ते बाजार को समर्थन देने के लिए रोस्टिंग, फर्मेंटेशन और पफिंग हेतु विशेष मशीनें भी विकसित की गई हैं। श्रीअन्न रोस्टर 95% रोस्टिंग दक्षता के साथ भुने हुए अनाज और विभिन्न मूल्य संवर्धित खाद्य उत्पादों के लिए सामग्री तैयार करने में उपयोगी है। मल्टी-मिलेट फर्मेंटर, जिसमें 25 से 100°C तक तापमान समायोजित किया जा सकता है, का उपयोग पेय पदार्थ, बैटर (घोल) और प्रोबायोटिक खाद्य जैसे किण्वित श्रीअन्न उत्पादों को तैयार करने में किया जा सकता है। वहीं, संवहन (convective) तथा संचरण (conductive) हीटिंग पर आधारित श्रीअन्न पफिंग मशीन 85–90% पॉपिंग दक्षता के साथ फुले हुए श्रीअन्न स्नैक्स तैयार करती है। ये नवाचार मिलेट उद्यमियों को तेजी से बढ़ते हेल्दी स्नैक और सुविधा खाद्य बाजार में अवसर प्रदान कर रहे हैं।

ICAR-CIAE, Bhopal Develop a Centre of Excellence on Efficient Millet Processing Machinery for Capacity Building and Entrepreneurship Development

ग्लोबल उत्कृष्टता केन्द्र के अंतर्गत विकसित इन मशीनों का प्रदर्शन उन्नत कृषि महोत्सव 2026 (10–13 अप्रैल, 2026, रायसेन) के दौरान केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के समक्ष किया गया। इस कृषि महोत्सव में 1000 से अधिक हितधारकों—जैसे प्रतिनिधि, एफपीओ, किसान, स्वयं सहायता समूह आदि—ने स्टॉल का दौरा किया, मशीनों का प्रदर्शन देखा और विकसित श्रीअन्न प्रसंस्करण मशीनरी के माध्यम से उद्यम विकास में रुचि दिखाई। इन विकसित तकनीकों को मंत्रालय के अधिकारियों, भाकृअनुप के गणमान्य व्यक्तियों तथा अन्य प्रमुख हितधारकों के बीच भी व्यापक रूप से प्रोत्साहित किया गया।

इन तकनीकों का प्रभाव लघु और मध्यम उद्यमों के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उत्पादन क्षेत्रों के निकट विकेन्द्रीकृत प्रसंस्करण को संभव बनाकर ये परिवहन लागत को कम करती हैं, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को घटाती हैं और स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाती हैं। विकसित मशीनों का कॉम्पैक्ट डिज़ाइन, मध्यम लागत तथा आसान संचालन इन्हें स्टार्ट अप्स, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) तथा ग्रामीण युवाओं के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाता है। कई महिला समूह भी इन मशीनों को अपनाकर कुटीर स्तर के प्रसंस्करण उद्यमों के माध्यम से आय अर्जित कर सकते हैं। प्रसंस्करण, पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण एवं विपणन में रोजगार सृजन के साथ-साथ ये तकनीक बाजार में श्रीअन्न आटा, ग्रिट्स, भुने अनाज, पफ्ड स्नैक्स और किण्वित उत्पादों की उपलब्धता बढ़ाकर पोषण सुरक्षा में भी योगदान देते हैं।

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यह पहल आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, एग्री-स्टार्ट अप्स को बढ़ावा देने तथा श्रीअन्न वैल्यू चेन को सशक्त बनाने जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है। स्वस्थ एवं सतत खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग के बीच, भाकृअनुप-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान द्वारा विकसित ये कुशल श्रीअन्न प्रसंस्करण मशीनें पारंपरिक अनाज को लाभकारी व्यावसायिक उत्पादों में बदलने का एक व्यावहारिक मार्ग प्रदान करती हैं।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल)

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