12 मई, 2026, कोयंबटूर
भाकृअनुप-गन्ना प्रजनन संस्थान ने अन्नामलाई टाइगर रिजर्व के सहयोग से अनुसूचित जनजाति घटक विकास कार्य योजना (डीएपीएसटीसी) परियोजना के अंतर्गत तमिलनाडु के तिरुप्पुर जिले में जनजातीय समुदायों के लिए स्वास्थ्य एवं पोषण जागरूकता अभियान आयोजित किया।
यह अभियान करट्टुपथी और थिप्पिप्पाराई बस्तियों में रहने वाले जनजातीय समुदायों के बीच स्वास्थ्य, पोषण और निवारक स्वास्थ्य देखभाल के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर केन्द्रित था। यह पहल तमिलनाडु और केरल में जनजातीय आबादी के समग्र विकास हेतु संस्थान द्वारा आवश्यकतानुसार किए जा रहे निरंतर प्रयासों का हिस्सा है।
कार्यक्रम के दौरान जनजातीय समुदायों में प्रचलित प्रमुख स्वास्थ्य समस्याओं जैसे एनीमिया, कुपोषण और सिकल-सेल एनीमिया पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रतिभागियों को घरेलू पोषण सुरक्षा में सुधार के लिए स्थानीय स्तर पर अपनाए जा सकने वाले पोषण हस्तक्षेपों जैसे किचन गार्डन में सब्जियों की खेती, मोटे अनाज (श्रीअन्न) को बढ़ावा देने तथा पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य उत्पादों के उपयोग की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में हाल ही में प्रारंभ किए गए राष्ट्रीय मिशन “सेहत” (सेहत - कृषि परिवर्तन के माध्यम से स्वास्थ्य के लिए विज्ञान उत्कृष्टता) के बारे में भी जानकारी दी गई। यह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद तथा भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की संयुक्त पहल है, जिसका उद्देश्य कृषि विज्ञान और स्वास्थ्य अनुसंधान के बीच समन्वय को मजबूत कर कुपोषण और पोषण असुरक्षा जैसी चुनौतियों का समाधान करना है।

अभियान के अंतर्गत निवारक स्वास्थ्य देखभाल, संतुलित पोषण तथा जनजातीय आबादी को प्रभावित करने वाली सामान्य बीमारियों के प्रबंधन पर संवादात्मक सत्र आयोजित किए गए। साथ ही पोषक तत्वों से भरपूर मिलेट आधारित व्यंजनों की तैयारी पर विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से जनजातीय महिलाओं को मूल्य संवर्धन एवं उद्यमिता के अवसरों के लिए भी प्रोत्साहित किया गया। सामुदायिक प्रतिनिधियों ने परियोजना के अंतर्गत नियमित अनुवर्ती कार्यक्रमों तथा आवश्यक आजीविका एवं घरेलू सहायता सामग्री के वितरण के माध्यम से प्रदान किए जा रहे निरंतर सहयोग की सराहना की।
इस अभियान में भाग लेने वाली बस्तियों से 200 से अधिक जनजातीय पुरुषों और महिलाओं ने भाग लिया तथा कुपोषण के खिलाफ शपथ लेते हुए अपने समुदायों में महिलाओं और बच्चों के पोषण स्तर में सुधार के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की।
(स्रोत: भाकृअनुप-गन्ना प्रजनन संस्थान, कोयंबटूर)







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