8 जून, 2026, मऊ, उत्तर प्रदेश
राष्ट्रव्यापी “खेत बचाओ अभियान 2026” के अंतर्गत, भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि महत्त्व के सूक्ष्मजीव ब्यूरो (भाकृअनुप–एनबीएआईएम), मऊ, उत्तर प्रदेश ने सतत एवं विज्ञान-आधारित कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए 6–8 जून, 2026 के दौरान उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद के विभिन्न गांवों में किसान जागरूकता एवं प्रसार कार्यक्रमों की एक श्रृंखला का आयोजन किया।
6 जून, 2026 को, भाकृअनुप-एनबीएआईएम की टीम ने कोपागंज विकासखंड के धवरियासाथ गांव में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें 40 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 18 पुरुष और 22 महिलाएं शामिल थीं। किसानों को मृदा स्वास्थ्य, पोषक तत्वों की उपलब्धता, फसल उत्पादकता तथा पर्यावरणीय स्थिरता में लाभकारी सूक्ष्मजीवों के महत्व के प्रति जागरूक किया गया।
इसके उपरांत, 8 जून, 2026 को कोपागंज विकासखंड के अब्बूपुर और भावरकोल गांवों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। वैज्ञानिकों एवं तकनीकी कर्मियों ने मृदा उर्वरता, पोषक तत्व उपयोग दक्षता तथा सतत फसल उत्पादन को बढ़ाने में लाभकारी मृदा सूक्ष्मजीवों की भूमिका पर प्रकाश डाला। संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा परीक्षण, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन तथा पर्यावरण-अनुकूल फसल प्रबंधन पद्धतियों पर भी विशेष बल दिया गया।

किसान–वैज्ञानिक संवाद के माध्यम से प्रतिभागियों को जैविक एवं अजैविक तनावों के विरुद्ध लचीलापन बढ़ाने तथा दीर्घकालिक मृदा एवं फसल स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए पर्यावरणीय रूप से उत्तरदायी कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। प्रसार गतिविधि के अंतर्गत, फॉस्फोरस के घुलनीकरण को बढ़ावा देने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से आईसीएआर-एनबीएआईएम द्वारा विकसित सूक्ष्मजीवी जैव-फॉर्मूलेशन ‘बायो-फॉस’ किसानों के बीच वितरित किया गया।
कार्यक्रम में अब्बूपुर गांव में 66 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 30 पुरुष और 36 महिलाएं शामिल थीं, जबकि भावरकोल गांव में आयोजित कार्यक्रम में 60 किसानों ने भागीदारी की, जिनमें 35 पुरुष और 25 महिलाएं शामिल थीं।
(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि महत्त्व के सूक्ष्मजीव ब्यूरो, मऊ, उत्तर प्रदेश)







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