15 जुलाई, 2026, बेंगलुरु
भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि कीट संसाधन ब्यूरो (भाकृअनुप-एनबीएआईआर), बेंगलुरु, ने सेंटर फॉर इंटरनेशनल रिसर्च, एजुकेशन एंड डेवलपमेंट (सीआआरईडी), वर्जीनिया टेक, अमेरिका, के सहयोग से आज भाकृअनुप-एनबीएआईआर, बेंगलुरु में “खरबूजा मक्खी का क्षेत्रव्यापी प्रबंधन: अनुसंधान से खेत स्तर तक अनुप्रयोग” विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन हाइब्रिड मोड में किया। यह कार्यशाला वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, उद्योग प्रतिनिधियों, विस्तार कर्मियों तथा अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के लिए खरबूजा मक्खी के सतत प्रबंधन की रणनीतियों पर विचार-विमर्श करने और सहयोगात्मक अनुसंधान प्रयासों को सुदृढ़ करने का एक मंच बनी।
कार्यशाला में जलवायु परिवर्तन, कुकुर्बिट फसलों के बढ़ते क्षेत्रफल तथा कृषि वस्तुओं के बढ़ते वैश्विक आवागमन के परिप्रेक्ष्य में कुकुर्बिट फसलों के सबसे विनाशकारी कीटों में से एक खरबूजा मक्खी (Zeugodacus cucurbitae) के लिए एकीकृत एवं पर्यावरणीय रूप से सतत प्रबंधन रणनीतियों की बढ़ती आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया। चर्चाओं में क्षेत्रव्यापी एकीकृत कीट प्रबंधन (AW-IPM), सेमियोकेमिकल-आधारित उपायों, जैविक नियंत्रण, बंध्य कीट तकनीक (Sterile Insect Technique) तथा डिजिटल निगरानी को पारंपरिक कीटनाशक-निर्भर प्रबंधन के प्रभावी विकल्पों के रूप में रेखांकित किया गया।
उद्घाटन सत्र में डॉ. पूनम जसरोतिया, सहायक महानिदेशक (पादप संरक्षण एवं जैव सुरक्षा), भाकृअनुप, ने अपने उद्घाटन वक्तव्य में खरबूजा मक्खी के लिए सतत और आर्थिक रूप से व्यवहार्य प्रबंधन रणनीतियों के विकास में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर बल दिया।
डॉ. टी. वेंकटेशन, कार्यवाहक निदेशक, भाकृअनुप-एनबीएआईआर, ने आक्रामक कीट प्रजातियों के विरुद्ध प्रभावी एवं सतत प्रबंधन रणनीतियों के विकास हेतु अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने के महत्व को रेखांकित किया।
डॉ. आर. मुनिअप्पन, निदेशक, सीआईआरईडी, वर्जीनिया टेक, अमेरिका, ने क्षेत्रव्यापी प्रबंधन कार्यक्रमों के लिए अनुसंधान निष्कर्षों को व्यावहारिक खेत-स्तरीय अनुप्रयोगों में परिवर्तित करने हेतु वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
तकनीकी सत्रों में भारत में टेफ्रिटिड फल मक्खियों की स्थिति एवं वितरण, खरबूजा मक्खी की जैव-भौगोलिकता, स्वच्छता उपाय, प्राकृतिक शत्रुओं का संरक्षण एवं उपयोग, सेमियोकेमिकल-आधारित प्रबंधन, द्विलिंगी आकर्षक (Bisexual Attractants), कीट पहचान के लिए बायोसेंसर प्रौद्योगिकियाँ, खरबूजा मक्खी प्रबंधन के लिए जीनोमिक उपकरण, प्रबंधन प्रौद्योगिकियों का प्रभाव आकलन, कृषि निर्यात से संबंधित स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता (Sanitary and Phytosanitary) मुद्दे तथा प्रभावी प्रबंधन कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में हितधारकों की भूमिका जैसे विविध विषयों को शामिल किया गया। इन प्रस्तुतियों में अनुसंधान की नवीनतम प्रगति को प्रदर्शित किया गया तथा वैज्ञानिक नवाचारों को खेत-स्तर पर लागू करने की व्यावहारिक रणनीतियों पर प्रकाश डाला गया।
कार्यशाला में भाकृअनुप संस्थानों, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, राज्य विभागों, कृषि विज्ञान केन्द्रों, उद्योग तथा निर्यात संगठनों के वैज्ञानिकों की भागीदारी के साथ एक संवादात्मक विचार-मंथन सत्र भी आयोजित किया गया।
प्रतिभागियों ने भारत में क्षेत्रव्यापी खरबूजा मक्खी प्रबंधन कार्यक्रमों के कार्यान्वयन हेतु भविष्य की अनुसंधान प्राथमिकताओं, प्रौद्योगिकी प्रसार, नीतिगत समर्थन तथा संस्थागत साझेदारियों पर चर्चा की।
कार्यशाला का समापन राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने तथा समन्वित क्षेत्रव्यापी प्रबंधन कार्यक्रमों एवं बाह्य वित्तपोषित अनुसंधान पहलों के विकास पर केंद्रित नेटवर्किंग सत्र के साथ हुआ। विचार-विमर्श में खरबूजा मक्खी के सतत प्रबंधन तथा कुकुर्बिट खेती की उत्पादकता और लाभप्रदता बढ़ाने के लिए एकीकृत निगरानी, नवीन कीट प्रबंधन प्रौद्योगिकियों को अपनाने, जैविक नियंत्रण तथा बहुविषयक सहयोग के महत्व को रेखांकित किया गया।
(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि कीट संसाधन ब्यूरो, बेंगलुरु)







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