केन्द्रीय समिति ने तमिलनाडु के किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के साथ प्रदर्शन, स्थिरता और चुनौतियों पर की चर्चा
4 जुलाई, 2026, तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु
केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा गठित सात सदस्यीय समिति ने तमिलनाडु के किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के साथ उनके प्रदर्शन, स्थिरता, प्रमुख चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं का आकलन करने के लिए संवाद किया। यह पहल कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के उस परिपत्र के अनुरूप की गई, जिसके तहत राज्य में एफपीओ को प्रभावित करने वाले मुद्दों की जांच कर उपयुक्त सुधारात्मक उपायों की सिफारिश की जानी है।
इस पहल के अंतर्गत भाकृअनुप–राष्ट्रीय केला अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीबी), तिरुचिरापल्ली, ने आज “तमिलनाडु में किसान उत्पादक संगठन: प्रदर्शन, स्थिरता, चुनौतियाँ और भविष्य की संभावनाएँ” विषय पर एक मंथन सत्र का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में तमिलनाडु के विभिन्न भागों से 62 एफपीओ का प्रतिनिधित्व करने वाले 135 अधिकारियों ने भाग लिया, जिससे समिति, एफपीओ प्रतिनिधियों, सरकारी एजेंसियों और अन्य हितधारकों के बीच प्रत्यक्ष संवाद के लिए एक मंच उपलब्ध हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव (विपणन) श्री चिन्मय पी. गोटमारे, आईएएस ने की तथा भाकृअनुप-एनआरसीबी के निदेशक डॉ. आर. सेल्वराजन ने सह-अध्यक्षता की।
अपने उद्घाटन संबोधन में डॉ. आर. सेल्वराजन ने किसानों की सामूहिक भागीदारी को सशक्त बनाने और बाजार तक पहुंच में सुधार करने में एफपीओ की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्तमान में देशभर में लगभग 45,000 एफपीओ कार्यरत हैं, जिनमें से लगभग 85 प्रतिशत कृषि क्षेत्र, जिसमें फसल एवं बागवानी फसलें शामिल हैं, से जुड़े हैं, जबकि शेष 15 प्रतिशत पशुपालन एवं संबद्ध क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने एफपीओ नेतृत्व की लैंगिक संरचना का भी उल्लेख करते हुए बताया कि लगभग 85 प्रतिशत एफपीओ का नेतृत्व पुरुषों द्वारा तथा 15 प्रतिशत का नेतृत्व महिलाओं द्वारा किया जा रहा है।
एनएएएस (एनएएएस) की नीति रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए डॉ. सेल्वराजन ने कहा कि स्थापना के पाँच वर्ष बाद भी केवल 4,009 एफपीओ ही लाभकारी बने रह पाए हैं। उन्होंने अपर्याप्त प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण, पूंजी तक सीमित पहुंच तथा कमजोर विपणन नेटवर्क को एफपीओ की दीर्घकालिक स्थिरता को प्रभावित करने वाली प्रमुख बाधाओं के रूप में चिन्हित किया।
श्री जी.के. नागराज, निदेशक, एग्री इनोवेट इंडिया लिमिटेड (भाकृअनुप), ने किसानों द्वारा केन्द्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं का प्रभावी उपयोग कर कृषि आय और आजीविका में सुधार के उदाहरण प्रस्तुत किए। उन्होंने वाराणसी के किसानों के अनुभवों का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने पीएम-किसान सम्मान निधि, राज्य सरकार की योजनाओं तथा मोटे अनाजों (मिलेट्स) के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) जैसी पहलों का लाभ उठाकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है।
चर्चा के दौरान एफपीओ को बढ़ावा देने और उन्हें ऋण तथा संस्थागत सहायता प्रदान करने में नाबार्ड की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया। जानकारी दी गई कि तमिलनाडु में नाबार्ड द्वारा प्रोत्साहित लगभग 400 एफपीओ स्थापित किए गए हैं, जिनमें से लगभग 250 सफलतापूर्वक कार्य कर रहे हैं।

राज्य में वर्तमान में लगभग 10 लाख किसान एफपीओ से जुड़े हुए हैं। ऐसे में इन संगठनों को सशक्त बनाने से किसानों को कृषि मूल्य श्रृंखला में बिचौलियों द्वारा अर्जित किए जा रहे अनुमानित 44,000 करोड़ रुपये के मूल्य का बड़ा हिस्सा प्राप्त करने में सहायता मिल सकती है। तमिलनाडु में एफपीओ का वार्षिक कारोबार लगभग 2,200 करोड़ रुपये बताया गया।
संवाद सत्र के दौरान एफपीओ प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए और प्रमुख परिचालन एवं संस्थागत चुनौतियों को रेखांकित किया। उन्होंने इक्विटी अनुदान की समयबद्ध रिहाई, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पारिश्रमिक हेतु वित्तीय सहायता, आरओसी ऑडिट प्रावधानों में शिथिलता, नाफेड द्वारा प्रत्यक्ष खरीद, अवसंरचना एवं कृषि आदान सहायता तथा एफपीओ को सुदृढ़ करने और एफपीओ कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक समर्पित शासन तंत्र की मांग की।
यह मंथन सत्र एफपीओ द्वारा जमीनी स्तर पर सामना की जा रही वास्तविक चुनौतियों को समझने तथा उनकी वित्तीय व्यवहार्यता, संस्थागत क्षमता, बाजार संपर्क और दीर्घकालिक स्थिरता को बढ़ाने के लिए व्यावहारिक उपायों की पहचान करने हेतु एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।
(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय केला अनुसंधान केन्द्र, तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु)







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