27 जनवरी, 2026, रायपुर
भाकृअनुप द्वारा प्रायोजित "फसलों में राष्ट्रीय महत्व के कीटों एवं रोगजनकों को कम करने हेतु उभरते बायोटेक्नोलॉजिकल तथा बायोरेशनल हस्तक्षेप" पर 21-दिवसीय विंटर स्कूल प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन आज भाकृअनुप-राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान, रायपुर, में किया गया।
मुख्य अतिथि डॉ. सच्चिदानंद शुक्ला, कुलपति, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर, ने ओरिएंटेशन-आधारित क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों के महत्व पर जोर दिया और बदलते कृषि-पारिस्थितिक परिदृश्यों के तहत कीटों एवं पौधों के रोगजनकों की चुनौतियों से निपटने में उभरते बायोटेक्नोलॉजिकल और बायो-रेशनल हस्तक्षेपों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
डॉ. पी.के. राय, निदेशक, भाकृअनुप-एनआईबीएसएम, ने एकीकृत कीट प्रबंधन के महत्व पर जोर दिया, जिसमें रसायनों पर निर्भरता कम करने और फसलों में जैविक तनावों के स्थायी प्रबंधन के लिए बायो-कंट्रोल-आधारित तरीकों को अधिक अपनाने की बात कही।

डॉ. अनिल दीक्षित, संयुक्त निदेशक, भाकृअनुप-एनआईबीएसएम तथा कोर्स निदेशक ने प्रतिभागियों को विंटर स्कूल के उद्देश्यों और संरचना के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम एक क्षमता-निर्माण पहल है जिसका उद्देश्य विशेषज्ञ व्याख्यान, इंटरैक्टिव सत्र, व्यावहारिक प्रदर्शन तथा फील्ड एक्सपोजर के सही मिश्रण के माध्यम से युवा वैज्ञानिकों की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता को मजबूत करना है।
उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान भाकृअनुप-एनआईबीएसएम के सभी संयुक्त निदेशक, वैज्ञानिक, संकाय सदस्य और कर्मचारी उपस्थित थे।
विभिन्न भाकृअनुप संस्थानों और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों का प्रतिनिधित्व करने वाले 11 राज्यों के कुल 25 प्रतिभागियों ने विंटर स्कूल में दाखिला लिया है।
विंटर स्कूल 27 जनवरी से 16 फरवरी, 2026 तक भाकृअनुप-एनआईबीएसएम, रायपुर, में आयोजित किया जाएगा।
(स्रोत: भाकृअनुप-राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान, रायपुर)







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