भाकृअनुप-एमजीआईएफआरआई, मोतिहारी ने वृक्षारोपण अभियान, किसान–वैज्ञानिक संवाद तथा स्वच्छता अभियान के साथ 98वां भाकृअनुप स्थापना दिवस का किया आयोजन

भाकृअनुप-एमजीआईएफआरआई, मोतिहारी ने वृक्षारोपण अभियान, किसान–वैज्ञानिक संवाद तथा स्वच्छता अभियान के साथ 98वां भाकृअनुप स्थापना दिवस का किया आयोजन

16 जुलाई, 2026, मोतिहारी, बिहार

भाकृअनुप–महात्मा गांधी एकीकृत कृषि अनुसंधान संस्थान (एमजीआईएफआरआई), मोतिहारी, ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) का 98वां स्थापना दिवस पर्यावरणीय स्थिरता, वैज्ञानिक कृषि, स्वच्छता और किसान जागरूकता को बढ़ावा देने वाली विभिन्न गतिविधियों के साथ मनाया। समारोह का आयोजन डॉ. राघवेंद्र सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-एमजीआईएफआरआई, के समग्र मार्गदर्शन में किया गया, जिसमें वैज्ञानिकों, तकनीकी कर्मचारियों, प्रशासनिक कर्मियों, संविदा कर्मचारियों, कृषि श्रमिकों और किसानों ने सक्रिय भागीदारी की।

समारोह की शुरुआत राष्ट्रव्यापी अभियान “एक पेड़ मां के नाम” के अंतर्गत वृक्षारोपण अभियान से हुई, जिसने पर्यावरण संरक्षण और जलवायु-सहिष्णु कृषि के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ किया। संस्थान परिसर और अनुसंधान फार्म में कुल 262 फलदार पौधे लगाए गए, जिनमें 90 रेड लेडी पपीता पौधे, 36 अमरपाली आम पौधे, 36 एल-49 अमरूद पौधे तथा 100 जी-9 केले के पौधे शामिल थे। वैज्ञानिकों ने जैव विविधता बढ़ाने, पोषण सुरक्षा में सुधार करने, कार्बन अवशोषण को बढ़ावा देने तथा एकीकृत कृषि प्रणालियों को मजबूत करने में फल-आधारित वृक्षारोपण के महत्व पर प्रकाश डाला।

ICAR-MGIFRI, Motihari Celebrates 98th ICAR foundation day with plantation drive, farmers–scientists interaction and swachhata campaign

वृक्षारोपण कार्यक्रम के बाद पूरे संस्थान समुदाय ने प्रायोगिक खेतों, खेत मार्गों और आसपास के अनुसंधान क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान में भाग लिया। विशेष रूप से पार्थेनियम (कांग्रेस घास) के प्रबंधन पर जोर दिया गया, जहां वैज्ञानिकों ने फसल उत्पादकता, पशुधन, मानव स्वास्थ्य और जैव विविधता पर इसके हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा की। प्रतिभागियों को यांत्रिक निष्कासन, निवारक उपायों और पारिस्थितिकीय दृष्टिकोणों के माध्यम से पार्थेनियम प्रबंधन की एकीकृत विधियों के बारे में जागरूक किया गया।

स्थापना दिवस समारोह के अंतर्गत संस्थान के सेमिनार हॉल में भाकृअनुप मुख्यालय से 98वें भाकृअनुप-एमजीआईएफआरआई स्थापना दिवस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी आयोजित किया गया। कार्यक्रम में लगभग 62 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें 38 कृषि महिलाएं, आसपास के गांवों के 8 किसान, संस्थान के कर्मचारी तथा संविदा कर्मी शामिल थे। प्रतिभागियों ने उभरती कृषि प्रौद्योगिकियों और कृषि अनुसंधान से संबंधित राष्ट्रीय पहलों पर वैज्ञानिकों के साथ संवाद किया।

एक किसान–वैज्ञानिक संवाद बैठक का भी आयोजन किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने मृदा परीक्षण, गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती तथा एकीकृत कृषि प्रणाली (आईएफएस) से संबंधित प्रमुख विषयों पर चर्चा की। किसानों ने मृदा उर्वरता, फसल उत्पादकता, पोषक तत्वों की कमी तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों से संबंधित प्रश्न पूछे, जिनका उत्तर क्षेत्र-विशिष्ट वैज्ञानिक सिफारिशों के माध्यम से दिया गया।

वैज्ञानिकों ने मृदा स्वास्थ्य केंद्रित प्रौद्योगिकियों के एक व्यापक पैकेज का प्रदर्शन किया, जिसमें मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग, ढैंचा (सेसबानिया) के माध्यम से हरित खाद, ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती, फसल विविधीकरण, जैव उर्वरक, वर्मी कम्पोस्टिंग, फसल अवशेष पुनर्चक्रण, संरक्षण कृषि, डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर), लेजर लैंड लेवलिंग, धान नर्सरी प्रबंधन, एकीकृत कीट प्रबंधन तथा जलवायु-सहिष्णु फसल नियोजन शामिल थे। विशेष रूप से उत्तर बिहार के बाढ़ प्रभावित और जलभराव वाले पारिस्थितिक तंत्रों के लिए फसल, मत्स्य, पशुधन, बागवानी तथा संसाधन पुनर्चक्रण को एकीकृत करने वाली एकीकृत कृषि प्रणालियों (आईएफएस) पर बल दिया गया। किसानों को आम, लीची और पपीते के लिए पोषक तत्व प्रबंधन तथा टिकाऊ बाग प्रबंधन पद्धतियों पर वैज्ञानिक परामर्श भी प्रदान किया गया।

ICAR-MGIFRI, Motihari Celebrates 98th ICAR foundation day with plantation drive, farmers–scientists interaction and swachhata campaign

इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. राघवेंद्र सिंह ने कहा कि संस्थान क्षेत्रीय प्रदर्शनों, क्षमता निर्माण तथा एकीकृत कृषि दृष्टिकोणों के माध्यम से वैज्ञानिक नवाचारों को किसानों के लिए व्यावहारिक समाधानों में परिवर्तित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ मिट्टी, विविधीकृत कृषि प्रणालियां और प्राकृतिक संसाधनों का कुशल प्रबंधन जलवायु-सहिष्णु और लाभकारी कृषि प्राप्त करने के लिए आवश्यक हैं।

समारोह का समापन कृषि अनुसंधान, पर्यावरण संरक्षण और किसान-केंद्रित प्रौद्योगिकी प्रसार के बीच संबंधों को और मजबूत करने की सामूहिक शपथ के साथ हुआ। इस अवसर पर सतत कृषि विकास, पोषण सुरक्षा तथा विकसित भारत @2047 के विजन के प्रति भाकृअनुप की प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया गया।

(स्रोत: भाकृअनुप–महात्मा गांधी एकीकृत कृषि अनुसंधान संस्थान, मोतिहारी, बिहार)

×