भाकृअनुप-एमजीआईएफआरआई, मोतिहारी और केवीके माधोपुर ने बिहार के पश्चिम चंपारण में खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत मृदा स्वास्थ्य जागरूकता अभियान का किया नेतृत्व

भाकृअनुप-एमजीआईएफआरआई, मोतिहारी और केवीके माधोपुर ने बिहार के पश्चिम चंपारण में खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत मृदा स्वास्थ्य जागरूकता अभियान का किया नेतृत्व

12 जून, 2026, मोतिहारी, बिहार

देशव्यापी “खेत बचाओ अभियान-2026” के अंतर्गत, भाकृअनुप–महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान, मोतिहारी, ने कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), माधोपुर, पश्चिम चंपारण, के सहयोग से पश्चिम चंपारण जिले के विभिन्न गाँवों के किसानों के लिए मृदा स्वास्थ्य एवं संतुलित उर्वरक उपयोग पर एक “किसान चौपाल” तथा जागरूकता-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का समन्वयन एवं संचालन केवीके माधोपुर द्वारा व्यापक स्थानीय संपर्क और किसानों के जुटाव के माध्यम से किया गया।

कार्यक्रम का केन्द्रीय संदेश था “निवेश से पहले परीक्षण (Test Before You Invest)”, जिसमें इस बात पर बल दिया गया कि उर्वरकों और अन्य कृषि आदानों की खरीद से पहले मृदा परीक्षण पहला कदम होना चाहिए। वैज्ञानिकों ने बताया कि मृदा परीक्षण की सिफारिशों पर आधारित सूचित पोषक तत्व प्रबंधन से उत्पादकता में सुधार, आदान लागत में कमी तथा दीर्घकालिक मृदा स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। संवादात्मक सत्र के दौरान किसानों ने प्रचलित कृषि पद्धतियों और चुनौतियों पर खुलकर चर्चा की।

ICAR-MGIFRI, Motihari and KVK Madhopur Lead Soil Health Awareness Drive under Khet Bachao Abhiyan in West Champaran, Bihar

विशेषज्ञों ने उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि उर्वरक विक्रेताओं तथा किसानों को “खेत बचाओ अभियान” के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए मिलकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने रेखांकित किया कि मृदा परीक्षण के मार्गदर्शन में किया गया संतुलित उर्वरीकरण मृदा उर्वरता बनाए रखने और पोषक तत्व उपयोग दक्षता में सुधार के लिए आवश्यक है।

अभियान की थीम “निवेश से पहले परीक्षण” को पुनः दोहराया गया और किसानों को उर्वरकों तथा अन्य कृषि आदानों में निवेश करने से पहले मृदा परीक्षण कराने के लिए प्रोत्साहित किया गया। यह समझाया गया कि मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन अनावश्यक व्यय को कम करने के साथ-साथ फसल प्रदर्शन को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।

रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और मृदा के जैविक स्वास्थ्य में सुधार लाने में जैव उर्वरकों तथा पर्यावरण-अनुकूल पोषक तत्व प्रबंधन पद्धतियों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया। जल संरक्षण और कृषि उत्पादकता में सुधार के लिए “खेत का पानी खेत में” के सिद्धांत को बढ़ावा देते हुए लेजर लैंड लेवलिंग तथा कुशल जल प्रबंधन के महत्व पर भी बल दिया गया।

किसानों को फसल अवशेष जलाने के दुष्प्रभावों के प्रति भी जागरूक किया गया तथा उन्हें प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों के साथ-साथ अवशेष प्रबंधन के टिकाऊ विकल्पों से परिचित कराया गया।

ICAR-MGIFRI, Motihari and KVK Madhopur Lead Soil Health Awareness Drive under Khet Bachao Abhiyan in West Champaran, Bihar

कार्यक्रम में “पोषक तत्व प्रबंधन के 4आर सिद्धांत”—उर्वरक का सही स्रोत (Right Source), सही मात्रा (Right Rate), सही समय (Right Time) और सही विधि (Right Method)—को भी बढ़ावा दिया गया। वैज्ञानिकों ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य और पोषक तत्व उपयोग दक्षता में सुधार के लिए रासायनिक उर्वरकों के साथ जैव उर्वरकों, जैविक खादों, हरी खाद तथा फसल अवशेष पुनर्चक्रण को सम्मिलित करते हुए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन पद्धतियाँ अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

किसानों को उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग के हानिकारक परिणामों, जिनमें मृदा गुणवत्ता में गिरावट, पोषक तत्वों का असंतुलन तथा उत्पादन लागत में वृद्धि शामिल है, के बारे में भी अवगत कराया गया। इस कार्यक्रम ने वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन और किसानों में बढ़ी हुई जागरूकता के माध्यम से टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के प्रति भाकृअनुप-एमजीआईएफआरआई और केवीके माधोपुर की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की।

कार्यक्रम में कुल 52 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें आत्मा (ATMA), एटीएम (ATMs) और बीटीएम (BTMs) के अधिकारी भी शामिल थे।

(स्रोत: भाकृअनुप–महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान, मोतिहारी, बिहार)

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