2 मार्च, 2026, हैदराबाद
भाकृअनुप-डायरेक्टोरेट ऑफ पोल्ट्री रिसर्च, हैदराबाद ने आज अपनी स्थापना के बाद से गौरवशाली यात्रा के एक और मील के पत्थर को चिह्नित करते हुए बड़े उत्साह के साथ अपना 39वां स्थापना दिवस मनाया।
मुख्य अतिथि डॉ. एस. बी. बारबुद्धे, निदेशक, भाकृअनुप-नेशनल मीट रिसर्च इंस्टीट्यूट, हैदराबाद ने देश के पोल्ट्री क्षेत्र में भाकृअनुप-डीपीआर के योगदान की अत्यधिक सराहना की। बहुआयामी अनुसंधान गतिविधियों तथा विभिन्न मुर्गी नस्लों के विकास के माध्यम से यह संस्थान देश की पोषण सुरक्षा में, विशेष रूप से वंचित ग्रामीण/जनजातीय आबादी के लिए, महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने बताया कि देश में कुल मांस उपभोग का पचास प्रतिशत से अधिक योगदान चिकन मांस का है। उन्होंने आगे कहा कि पोल्ट्री उत्पाद सस्ते और आम जनता के लिए सुलभ हैं। इससे पूर्व, उन्होंने संस्थान की विभिन्न प्रयोगशालाओं का भ्रमण किया और वैज्ञानिकों द्वारा किए जा रहे अनुसंधान कार्यों की सराहना की। उन्होंने दोनों संस्थानों के बीच अनुसंधान गतिविधियों में सहयोग को और सुदृढ़ करने का प्रस्ताव भी रखा।

डॉ. आर. एन. चटर्जी, निदेशक, भाकृअनुप–डीपीआर ने अध्यक्षीय उद्बोधन दिया। उन्होंने अत्याधुनिक अनुसंधान गतिविधियों तथा संस्थान के प्रसार कार्यक्रमों के माध्यम से देश के पोल्ट्री क्षेत्र में किए गए महत्वपूर्ण योगदानों को रेखांकित किया। उन्होंने देशभर में फैले एआईसीआरपी केंद्रों के योगदान पर भी प्रकाश डाला, जो विभिन्न कृषि-जलवायु परिस्थितियों में किसानों के लाभ हेतु देशी नस्लों के संरक्षण तथा स्थान-विशिष्ट क्रॉस ब्रीड के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों एवं वैज्ञानिक मानव संसाधन के प्रशिक्षण पर भी विशेष जोर दिया।

संस्थान के वैज्ञानिकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु संस्थान के दृष्टिकोण एवं मिशन को बनाए रखने के अपने संकल्प को दोहराया।
(स्रोत: भाकृअनुप-डायरेक्टोरेट ऑफ पोल्ट्री रिसर्च, हैदराबाद)







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