भाकृअनुप-डीएफआर, पुणे ने ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत सरपंच सम्मेलन-सह-किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम का किया आयोजन

भाकृअनुप-डीएफआर, पुणे ने ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत सरपंच सम्मेलन-सह-किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम का किया आयोजन

29 जून 2026, पुणे

भाकृअनुप-पुष्प अनुसंधान निदेशालय (डीएफआर), पुणे ने राज्य कृषि विभाग, खेड़ तहसील के सहयोग से आज पंचायत समिति, राजगुरुनगर, पुणे में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत सरपंच सम्मेलन-सह-किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, वैज्ञानिक हस्तक्षेपों तथा सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. के.वी. प्रसाद, निदेशक, भाकृअनुप-डीएफआर, पुणे, ने की। इस अवसर पर राज्य कृषि विभाग के अधिकारी, सरपंच, ग्राम पंचायत सदस्य तथा खेड़ तहसील के 35 गांवों की 42 महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

ICAR-DFR, Pune Organizes Sarpanch Sammelan-cum-Farmers' Training under ‘Khet Bachao Abhiyan’

अपने उद्घाटन संबोधन में डॉ. प्रसाद ने मृदा स्वास्थ्य को सतत कृषि की आधारशिला बताते हुए किसानों से जैव उर्वरकों एवं जैव कीटनाशकों को अपनाने का आग्रह किया, ताकि मृदा उर्वरता, फसल उत्पादकता तथा पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा दिया जा सके।

वरिष्ठ अधिकारियों ने मोबाइल महाविस्तार ऐप के लाभों पर प्रकाश डाला तथा भाकृअनुप-डीएफआर द्वारा विकसित उद्यमिता, मूल्य संवर्धन तथा आय सृजन, विशेषकर महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए विकसित अभिनव प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के उपरांत भाकृअनुप-डीएफआर के वैज्ञानिकों ने खेड़ तालुका के खरपुड़ी गांव में प्रगतिशील किसानों के पॉलीहाउस पुष्प फार्मों का दौरा किया। उन्होंने गुलाब एवं जरबेरा की खेती का निरीक्षण किया तथा समेकित पोषक तत्व प्रबंधन, समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन तथा सतत पुष्प उत्पादन के लिए जैविक एवं अकार्बनिक आदानों के संतुलित उपयोग संबंधी तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया।

ICAR-DFR, Pune Organizes Sarpanch Sammelan-cum-Farmers' Training under ‘Khet Bachao Abhiyan’

कार्यक्रम में 179 प्रतिभागियों (147 महिलाएं एवं 32 पुरुष) ने भाग लिया, जो सतत कृषि को बढ़ावा देने में ग्रामीण समुदायों तथा स्थानीय स्वशासन संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है। आईसीएआर-डीएफआर के वैज्ञानिकों ने भी कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया तथा किसान समुदाय के साथ संवाद किया।

(स्रोत: भाकृअनुप-पुष्प अनुसंधान निदेशालय, पुणे)

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