25 जून, 2026, जबलपुर
किसान फर्स्ट कार्यक्रम (एफएफपी) के अंतर्गत “खेत बचाओ अभियान एवं महत्वपूर्ण कृषि आदानों का वितरण” विषय पर आज एक जागरूकता-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में एफएफपी के अंतर्गत अपनाए गए जबलपुर जिले के कुंडम विकासखंड के तीन जनजातीय बहुल गांवों—खुक्खम, पड़रिया और रानीपुर—के 19 महिला किसानों सहित कुल 45 किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों के साथ विस्तृत संवाद आयोजित किया गया, जिसमें बदलती परिस्थितियों एवं आगामी मानसून मौसम को ध्यान में रखते हुए जलवायु-सहिष्णु कृषि पद्धतियों पर वैज्ञानिक मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
अनिश्चित वर्षा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए किसानों को सफल फसल स्थापना एवं उत्पादकता बढ़ाने के लिए विभिन्न जलवायु-स्मार्ट फसल प्रबंधन रणनीतियों के बारे में जागरूक किया गया। इनमें प्रत्यक्ष बुवाई धान (डीएसआर) तकनीक को अपनाना, खेत में ही नमी संरक्षण की पद्धतियां, विशेष रूप से यूरिया एवं डीएपी सहित उर्वरकों का संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग तथा लंबे शुष्क अंतराल के दौरान स्प्रिंकलर के माध्यम से पूरक सिंचाई का उपयोग शामिल था।

कार्यक्रम के अंतर्गत आगामी खरीफ मौसम की तैयारियों को सुदृढ़ करने के लिए किसानों के बीच महत्वपूर्ण कृषि आदानों का वितरण भी किया गया। किसानों को उच्च उपज देने वाली एवं खरपतवार प्रतिस्पर्धी धान की किस्मों—स्वर्णा श्रेया, अभिषेक, डीआरआर 47 और पूर्णा—के बीज प्रदान किए गए। इसके साथ ही प्रत्यक्ष बुवाई धान (डीएसआर) प्रणाली के लिए विशेष रूप से अनुशंसित आईएमआई शाकनाशी-सहिष्णु धान किस्म सीआर धान 207 भी वितरित की गई। इन धान किस्मों का भाकृअनुप-डीडब्ल्यूआर में वैज्ञानिक रूप से मूल्यांकन किया गया है और इन्हें उत्कृष्ट खरपतवार प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता तथा संसाधन संरक्षण आधारित उत्पादन प्रणालियों के लिए उपयुक्त पाया गया है। डॉ. मुखर्जी ने वैज्ञानिक खरपतवार प्रबंधन पर विशेष बल देते हुए उन्नत धान उत्पादन तकनीकों पर विस्तृत व्याख्यान भी दिया।
प्रतिभागी किसानों ने सक्रिय रूप से संवाद में भाग लिया, अपने खेतों के अनुभव साझा किए तथा आगामी मानसून मौसम की बदलती परिस्थितियों में सफल धान उत्पादन के लिए अनुशंसित जलवायु-स्मार्ट तकनीकों एवं वैज्ञानिक प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने में रुचि व्यक्त की। कार्यक्रम का समापन संवादात्मक चर्चा एवं धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
(स्रोत: भाकृअनुप-खरपतवार अनुसंधान निदेशालय, जबलपुर)







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