भाकृअनुप–आटारी, कोलकाता में ‘मृदा से सफलता तक: कृषि-बागवानी की स्मार्ट पद्धतियों द्वारा कृषि आय वृद्धि में केवीके की भूमिका’ विषय पर मानव संसाधन विकास कार्यक्रम का आयोजन

भाकृअनुप–आटारी, कोलकाता में ‘मृदा से सफलता तक: कृषि-बागवानी की स्मार्ट पद्धतियों द्वारा कृषि आय वृद्धि में केवीके की भूमिका’ विषय पर मानव संसाधन विकास कार्यक्रम का आयोजन

10–12 मार्च, 2026, कोलकाता

“मृदा से सफलता तक: कृषि-बागवानी की स्मार्ट पद्धतियों द्वारा कृषि आय वृद्धि में केवीके की भूमिका” विषय पर तीन दिवसीय मानव संसाधन विकास (एचआरडी) कार्यक्रम 10 से 12 मार्च, 2026 तक कोलकाता में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन पश्चिम बंगाल पशु एवं मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय के अनुसंधान, प्रसार एवं फार्म निदेशालय (डीआरईएफ) द्वारा भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान के सहयोग से किया गया। इसमें पश्चिम बंगाल के पांच कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) के प्रमुखों, विषय विशेषज्ञों (एसएमएस), फार्म प्रबंधकों एवं प्रयोगशाला तकनीशियनों ने भाग लिया।

अपने उद्घाटन संबोधन में डॉ. टी.के. डत्ता, कुलपति, डब्यूबीयूएएफएस ने सतत कृषि विकास के लिए मृदा स्वास्थ्य के संरक्षण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों, उन्नत कृषि प्रबंधन पद्धतियों और कुशल मानव संसाधनों के समन्वय से छोटे और सीमांत किसानों की आय और आजीविका सुरक्षा में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।

डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-आटारी, कोलकाता, ने संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, मृदा कार्बनिक पदार्थों के संरक्षण तथा सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वस्थ मृदा लचीली कृषि प्रणालियों की आधारशिला है, जो पर्यावरणीय स्थिरता, जलवायु अनुकूलन और खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को समर्थन देती है। उन्होंने वैज्ञानिक मृदा प्रबंधन पद्धतियों के प्रसार में कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) तथा प्रसार तंत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया, जो सतत कृषि और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य में योगदान देते हैं।

HRD Programme on ‘From Soil to Success: Smart Agri-Horticultural Practices for Enhancing Farm Income Role of KVKs’ Organised at ICAR-ATARI, Kolkata

डॉ. केशव चंद्र धारा, उप-निदेशक (फार्म) ने कार्यक्रम का समन्वय किया तथा शोधकर्ताओं, प्रसार विशेषज्ञों तथा क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाने वाले सहयोगात्मक प्रयासों के महत्व पर प्रकाश डाला, जो मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन को बढ़ावा देते हैं।

तकनीकी सत्रों में भविष्य की पीढ़ियों के लिए मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य कार्ड कार्यक्रम एवं उन्नत मृदा परीक्षण तकनीक, गंगा के जलोढ़ क्षेत्र में समस्याग्रस्त मिट्टियों का सुधार, तथा पुष्प कृषि में मूल्य संवर्धन और उद्यमिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया। सतत मृदा प्रबंधन पर एक संवादात्मक कार्यशाला ने प्रतिभागियों के सीखने के अनुभव को और समृद्ध किया।

इस कार्यक्रम में कुल 22 प्रतिभागियों ने भाग लिया और सत्रों में सक्रिय रूप से सहभागिता की। यह प्रशिक्षण ज्ञान के आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ तथा इससे पूर्वी भारत में सतत मृदा प्रबंधन पद्धतियों को बढ़ावा देने और कृषि उत्पादकता में वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की अपेक्षा है।

(स्रोत: भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता)

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