भाकृअनुप-अटारी, कानपुर में किसान सारथी 2.0 पर संवेदनशीलता एवं जागरूकता कार्यशाला का आयोजन

भाकृअनुप-अटारी, कानपुर में किसान सारथी 2.0 पर संवेदनशीलता एवं जागरूकता कार्यशाला का आयोजन

24 मार्च, 2026, कानपुर

कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) के वैज्ञानिकों की क्षमता को सुदृढ़ करने हेतु “किसान सारथी 2.0” पर एक दिवसीय संवेदनशीलता एवं जागरूकता कार्यशाला का आयोजन आज भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी), जोन-III, कानपुर, में भाकृअनुप–भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के सहयोग से किया गया। इसका उद्देश्य वैज्ञानिकों को किसानों के लिए डिजिटल एवं आवश्यकता-आधारित कृषि परामर्श सेवाएं प्रभावी ढंग से प्रदान करने हेतु सक्षम बनाना था। किसान सारथी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) की एक पहल है, जो विभिन्न कृषि परामर्श सेवाओं को एकीकृत करने वाला एक डिजिटल मंच है। यह कॉल सेंटर, मोबाइल एप्लिकेशन और वेब-आधारित प्रणालियों के माध्यम से किसानों और वैज्ञानिकों के बीच वास्तविक समय (रियल-टाइम) संवाद सुनिश्चित करता है, जिससे किसानों की समस्याओं का त्वरित समाधान संभव हो पाता है। किसान सारथी 2.0 में नई सुविधाएं जोड़ी गई हैं, जिनके अंतर्गत अब पंजीकृत किसानों के अलावा अन्य किसान भी केवीके और किसान कॉल सेंटर से संपर्क कर सकते हैं तथा किसान सारथी फार्मर्स कॉल मोबाइल एप्लिकेशन की शुरुआत की गई है।

मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. संजय सिंह, महानिदेशक, यूपीसीएआर, लखनऊ, ने कृषि उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने में डिजिटल कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

Kisan SARATHI 2.0 Sensitization and Awareness Workshop Organized at ICAR-ATARI, Kanpur

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में श्री रमेश कुमार सिंह, संस्थापक अध्यक्ष, केवीके उन्नाव; डॉ. अनिल कुमार राय, सहायक महानिदेशक (आईसीटी), भाकृअनुप; डॉ. आर.आर. बर्मन, सहायक महानिदेशक (कृषि विस्तार), भाकृअनुप; तथा डॉ. जी.पी. दीक्षित उपस्थित रहे।

श्री रमेश कुमार सिंह ने क्षेत्रीय अनुभव साझा करते हुए समय पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन के महत्व पर जोर दिया।

डॉ. अनिल कुमार राय ने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में भाग लेते हुए किसान सारथी के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने आधुनिक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के माध्यम से किसानों को समयबद्ध तथा आवश्यकता-आधारित सलाह प्रदान करने में इसकी भूमिका को रेखांकित किया।

डॉ. आर.आर. बर्मन ने भी वर्चुअल रूप से कार्यशाला में भाग लिया और केवीके वैज्ञानिकों को कृषि तकनीकों पर लघु वीडियो मॉड्यूल विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि व्यापक स्तर पर जानकारी का प्रसार हो सके। उन्होंने विशेष रूप से टेक्स्ट-टू-स्पीच कॉलिंग प्रणाली के महत्व पर बल दिया, जो कम डिजिटल साक्षरता वाले किसानों तक पहुंच बढ़ाने में सहायक है।

डॉ. जी.पी. दीक्षित ने दलहन उत्पादन बढ़ाने में आईसीटी-आधारित परामर्श सेवाओं के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि समयबद्ध और स्थान-विशिष्ट डिजिटल सलाह से उत्पादकता, लाभप्रदता और निर्णय लेने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है।

कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉ. राघवेंद्र सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-अटारी, जोन-III, कानपुर, ने स्वागत संबोधन देते हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह मंच किसानों को सीधे कृषि विशेषज्ञों से जोड़ता है और मोबाइल एवं डिजिटल तकनीकों के माध्यम से आवश्यकता-आधारित सलाह प्रदान करता है। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश में 89 कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से 60 लाख से अधिक किसान इस प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं।

किसान सारथी मंच का उद्देश्य किसानों को सीधे कृषि विशेषज्ञों से जोड़ना है, जिससे नवीनतम मोबाइल और डिजिटल तकनीकों के माध्यम से अनुकूलित (कस्टमाइज्ड) और आवश्यकता-आधारित परामर्श सेवाएं प्रदान की जा सकें। यह भी बताया गया कि देशभर में इस मंच पर 2.88 करोड़ से अधिक किसान पंजीकृत हैं, जिनमें से लगभग 21% उत्तर प्रदेश से हैं।

Kisan SARATHI 2.0 Sensitization and Awareness Workshop Organized at ICAR-ATARI, Kanpur

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य केवीके वैज्ञानिकों को किसान सारथी मंच और इसकी नई सुविधाओं के प्रभावी उपयोग हेतु व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना था। इसमें तीन-स्तरीय कॉलिंग प्रणाली शामिल है, जो किसानों के साथ सीधे संवाद को सक्षम बनाती है, तथा बेहतर कार्यक्रम समन्वय के लिए इवेंट मैनेजमेंट सिस्टम भी शामिल है।

तकनीकी सत्रों के दौरान किसान सारथी लॉगिन, उपयोगकर्ता प्रबंधन, हेल्प डेस्क संचालन और परामर्श प्रसार तंत्र पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। ये सत्र किसान सारथी टीम द्वारा संचालित किए गए। दूसरे सत्र में वैज्ञानिकों को सामग्री निर्माण, अनुमोदन प्रक्रिया का पालन करने तथा विशेष रूप से दलहनों के लिए स्थान-विशिष्ट और फसल-विशिष्ट परामर्श तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला का समापन प्रतिभागियों के साथ संवादात्मक फीडबैक सत्र के साथ हुआ।

इस कार्यशाला में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोन-III, कानपुर)

×