भाकृअनुप–अटारी, कानपुर में 18वां स्थापना दिवस एवं सीआरएम परियोजना पर कार्यशाला का आयोजन

भाकृअनुप–अटारी, कानपुर में 18वां स्थापना दिवस एवं सीआरएम परियोजना पर कार्यशाला का आयोजन

19 मार्च, 2026, कानपुर

भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी), ज़ोन-III, कानपुर, ने अपना 18वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर ‘फसल अवशेष प्रबंधन: सतत समाधान’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का भी आयोजन किया गया।

मुख्य अतिथि राजकुमारी रत्ना सिंह, अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केन्द्र, प्रतापगढ़, ने ग्रामीण युवाओं को कृषि उद्यमों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

विशिष्ट अतिथि श्री के. विजयेंद्र पांडियन, आयुक्त, कानपुर एवं कुलपति, चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर ने कहा कि बढ़ती जनसंख्या के साथ कृषि का विस्तार हो रहा है और कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कृषि में कृत्रिम मेधा (AI) के बढ़ते उपयोग पर भी प्रकाश डाला।

विशिष्ट अतिथि डॉ. यू.एस. गौतम, पूर्व उप-महानिदेशक (कृषि प्रसार), भाकृअनुप, ने फल भंडारण और डेयरी उत्पाद संरक्षण प्रणालियों को और विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने केवीके की बढ़ती भूमिका और उनके विस्तार की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।

विशिष्ट अतिथि डॉ. आर.आर. बर्मन, सहायक महानिदेशक (कृषि प्रसार), भाकृअनुप, ने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में भाग लिया और आगामी भाकृअनुप परियोजनाओं पर चर्चा की।

18th Foundation Day and Workshop on CRM Project Organized at ICAR-ATARI, Kanpur

इस अवसर पर अन्य गणमान्य अतिथियों में डॉ. एम.पी. चाचरकर, पूर्व निदेशक, डीआरडीओ; डॉ. रवि गोपाल सिंह, अंतरराष्ट्रीय सलाहकार (कृषि अनुसंधान एवं विकास); तथा डॉ. अंजनी कुमार सिंह, निदेशक, भाकृअनुप–एटारी, पटना ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

इससे पूर्व, स्वागत संबोधन में डॉ. राघवेंद्र सिंह, निदेशक, भाकृअनुप–अटारी, कानपुर, ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि संस्थान को आज के दिन क्षेत्रीय समन्वय इकाई से उन्नत कर क्षेत्रीय परियोजना निदेशालय बनाया गया था और आज संस्थान अपना 18वां स्थापना दिवस मना रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि इस अवसर पर ‘फसल अवशेष प्रबंधन: सतत समाधान’ विषयक कार्यशाला का आयोजन किया गया है, जिसमें उत्तर प्रदेश के 23 कृषि विज्ञान केन्द्र, जो सीआरएम परियोजना से जुड़े हैं, भाग ले रहे हैं। सीआरएम परियोजना का मुख्य उद्देश्य पराली जलाने को रोकना और प्रदूषण को कम करना है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में भाकृअनुप–अटारी, ज़ोन-III, कानपुर के अंतर्गत कार्यरत 89 केवीके की उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला।

इस अवसर पर भाकृअनुप–अटारी, कानपुर, की प्रकाशनों का विमोचन किया गया तथा कृषि विज्ञान केन्द्रों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), वैज्ञानिकों और संस्थान के अन्य कर्मचारियों को पुरस्कार प्रदान किए गए।

(स्रोत: भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, ज़ोन-III, कानपुर)

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