14 फरवरी, 2026, गुवाहाटी
भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, ज़ोन VI, गुवाहाटी, का 10वां स्थापना दिवस आज इसके परिसर में बड़े उत्साह के साथ मनाया गया, जो असम, अरुणाचल प्रदेश तथा सिक्किम में कृषि विस्तार एवं तकनीकी हस्तांतरण को मजबूत करने में एक दशक की समर्पित सेवा का प्रतीक है।
मुख्य अतिथि, श्री कामाख्या प्रसाद तासा, सांसद, काजीरंगा, ने कृषि को गुज़ारे पर आधारित गतिविधि से उद्योग-संचालित क्षेत्र में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं की भागीदारी, मशीनीकरण और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को मज़बूत करने पर ज़ोर दिया, यह देखते हुए कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र में कृषि को फिर से जिंदा करने के लिए सरकारी योजनाओं की तरह ही प्रेरणा एवं जागरूकता भी ज़रूरी है।

मुख्य अतिथियों में डॉ. निरंजन कलिता, कुलपति, असम पशुचिकित्सा एवं मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय, और पद्म श्री पुरस्कार विजेता डॉ. जोगेश देउरी शामिल थे। जाने-माने कृषि वैज्ञानिक डॉ. के.एम. बुजरबरुआ, पूर्व कुलपति, असम कृषि विश्वविद्यालय, ने भी इकट्ठा हुए लोगों को संबोधित किया।
डॉ. कलिता ने समेकित कृषि प्रणाली एवं पशुधन तथा पोल्ट्री क्षेत्र को मजबूत करने के महत्व पर ज़ोर दिया, खासकर इम्पोर्टेड टेबल अंडों पर निर्भरता कम करने के लिए। डॉ. बुजरबरुआ ने पारंपरिक खेती से डाटा-प्रेरित, डिजिटल और कृषि उद्योग-ओरिएंटेड विस्तार मॉडल में बदलाव पर ज़ोर दिया।
पद्म श्री डॉ. देउरी ने रेशम उत्पादन के विकास में अपनी प्रेरणा देने वाली यात्रा के बारे में बताया और उत्तर पूर्व में एरी और मूंगा सिल्क की अपार संभावनाओं पर रोशनी डाली। उन्होंने रेशम उत्पादन को आर्थिक रूप से फायदेमंद और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक बनाने के लिए नवाचार, मूल्य संवर्धन और युवाओं पर केन्द्रित तरीकों की वकालत की।

भाग लेने वालों का स्वागत करते हुए, डॉ.जी. कादिरवेल, निदेशक, भाकृअनुप-अटारी, ज़ोन VI, ने पिछले एक दशक में संस्थान की उपलब्धियों पर रोशनी डाली। उन्होंने निक्रा, आर्या, प्राकृतिक खेती के लिए राष्ट्रीय मिशन, तिलहन और दालहन पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन, ड्रोन-बेस्ड हस्तक्षेप और लगभग 30,000 हैक्टर में धान की परती क्षेत्र हेतु सघनीकरण कार्यक्रम जैसी खास पहलों पर ज़ोर दिया। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में पारम्परिक ग्रामीण नॉलेज बैंक पहल, इंडो-चाइना बॉर्डर पर वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम और पीपीवीएफआरए के तहत किसानों के किस्मों के पंजीकरण हेतु 120 एप्लीकेशन जमा करने के बारे में भी बताया।
इस प्रोग्राम में कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके), आयोजन कर्ता संस्थानों, पास के भाकृअनुप संस्थानों, मसाला बोर्ड, नारियल विकास बोर्ड, संबंधित विभागों एवं किसानों के लगभग 150 अधिकारियों ने हिस्सा लिया, जो इस क्षेत्र में खेती के विकास को आगे बढ़ाने में मजबूत संस्थागत सहयोग को दिखाता है।
(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, ज़ोन VI, गुवाहाटी)







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