22 जुलाई, 2026, झांसी
मध्य प्रदेश में विद्यमान 35–40 प्रतिशत हरित चारा कमी की समस्या के समाधान हेतु भाकृअनुप–भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-आईजीएफआरआई), झांसी, ने मध्य प्रदेश शासन के पशुपालन एवं डेयरी विभाग के वित्तीय सहयोग से राज्य के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों के पशु चिकित्सा एवं प्रसार अधिकारियों के लिए क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। यह प्रशिक्षण 13–15 जुलाई तथा 20–22 जुलाई, 2026 के दौरान दो बैचों में आयोजित किया गया, जिसमें मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से कुल 30 अधिकारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए कार्यक्रम निदेशक ने बताया कि राज्य में हरित चारे की कमी का प्रमुख कारण उन्नत चारा उत्पादन प्रौद्योगिकियों के प्रति सीमित जागरूकता और उनका कम अपनाया जाना है। उन्होंने कहा कि चारा उत्पादन, संरक्षण एवं उसके प्रभावी उपयोग से संबंधित उन्नत प्रौद्योगिकियाँ वर्तमान चारा अंतर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

कार्यक्रम समन्वयक ने पशुपालन की लाभप्रदता बढ़ाने के लिए हरित चारे पर आधारित संतुलित पशु आहार के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने हरित चारा उत्पादन बढ़ाने तथा अतिरिक्त चारे के संरक्षण को हे (Hay), साइलेज (Silage) और लीफ मील (Leaf Meal) जैसी प्रौद्योगिकियों के माध्यम से प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि पशुओं के लिए पूरे वर्ष गुणवत्तापूर्ण आहार की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
प्रतिभागियों के साथ संवाद के दौरान प्रभारी निदेशक ने भाकृअनुप-आईजीएफआरआई, झांसी द्वारा तैयार किए गए 'मध्य प्रदेश राज्य चारा विकास योजना' के प्रभावी क्रियान्वयन के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने राज्यभर में उन्नत चारा उत्पादन प्रौद्योगिकियों के व्यापक प्रसार एवं अपनाने पर बल दिया, ताकि चारे की मांग और आपूर्ति के बीच मौजूद अंतर को कम किया जा सके।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में चारा उत्पादन, संरक्षण एवं उपयोग के प्रमुख पहलुओं को शामिल किया गया। इसमें विशेषज्ञ व्याख्यानों के साथ-साथ व्यावहारिक प्रदर्शन तथा प्रौद्योगिकी प्रसार से संबंधित संवादात्मक सत्र आयोजित किए गए।
कार्यक्रम के सफल समापन के बाद प्रशिक्षित पशु चिकित्सा एवं प्रसार अधिकारी अपने-अपने जिलों में मास्टर ट्रेनर के रूप में कार्य करेंगे तथा पशुपालकों, कृषि उद्यमियों एवं गौशाला प्रबंधकों को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। इस पहल से उन्नत चारा प्रौद्योगिकियों के अपनाने में तेजी आने, मध्य प्रदेश में हरित चारे की उपलब्धता बढ़ने, पशुधन उत्पादकता में सुधार होने तथा किसानों की आजीविका को सुदृढ़ करने की अपेक्षा है।
(स्रोत: भाकृअनुप–भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान, झांसी)







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